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Last Updated :नई दिल्ली , शनिवार, 18 अप्रैल 2026 (11:58 IST)

क्या प्रियंका गांधी की 'सॉफ्ट पावर' राहुल की 'तल्ख राजनीति' पर पड़ रही है भारी? अमित शाह भी हुए मुरीद

Priyanka Gandhi Vadra amit shah and rahul gandhi
भारतीय राजनीति में इन दिनों एक नई और दिलचस्प चर्चा ने जोर पकड़ा है। संसद से लेकर सड़क तक, प्रियंका गांधी वाड्रा की संवाद शैली और उनके 'इमोशनल इंटेलिजेंस' की तारीफ विपक्षी खेमों के साथ-साथ सत्ता पक्ष के चेहरों पर भी मुस्कराहट बिखेर रही है। हाल ही में सदन में हुए कुछ वाकयों ने यह बहस छेड़ दी है कि क्या राहुल गांधी की आक्रामक और कभी-कभी 'नाराज' दिखने वाली शैली के मुकाबले प्रियंका की 'सौम्य मारक क्षमता' गठबंधन और भविष्य की राजनीति के लिए अधिक कारगर है। ALSO READ: महिला आरक्षण से जुड़ा बिल 54 वोट से गिरा,सरकार का दावा- महिलाओं को अधिकार दिलाकर ही रहेंगे
 

जब अमित शाह भी मुस्कराने पर हुए मजबूर

 
अमूमन बेहद गंभीर और सख्त दिखने वाले गृह मंत्री अमित शाह का सदन में ठहाका लगाना एक विरल दृश्य है। लेकिन जब प्रियंका गांधी ने 'नारी शक्ति वन्दन' पर चर्चा के दौरान उनकी ओर इशारा करते हुए कहा— 'गृह मंत्री जी हंस रहे हैं, पूरी योजना जो बना रखी है... चाणक्य अगर आज जीवित होते तो वो भी चौंक जाते' —तो न केवल पूरा सदन गूंज उठा, बल्कि शाह भी खुद को हंसने से नहीं रोक पाए। यह प्रियंका की वह कला है जिसे राजनीति के जानकार 'सहज कटाक्ष' कहते हैं। वह बिना मर्यादा लांघे अपनी बात सीधे निशाने पर पहुंचाती हैं।
 

राहुल बनाम प्रियंका: दो अलग शैलियां

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी ने पिछले कुछ वर्षों में जितना व्यक्तिगत अपमान और हार का सामना किया है, उससे उनके स्वर में एक किस्म की तल्खी और नाराजगी आई है, जो स्वाभाविक भी है। इसके विपरीत प्रियंका गांधी मुस्कराहट के साथ सधा हुआ कटाक्ष करने में माहिर हैं। उनकी तुलना अक्सर इंदिरा गांधी और सुषमा स्वराज जैसे प्रखर वक्ताओं से की जाती है।
 
इमोशनल इंटेलिजेंस: उन्हें कभी आपा खोते या असहज होते नहीं देखा जाता। वह कठिन परिस्थितियों में भी शांत रहकर सामने वाले को निरुत्तर कर देती हैं। ALSO READ: PM मोदी का ब्लैंक चेक, प्रियंका गांधी की चेतावनी, अमित शाह ने कांग्रेस का कन्फ्यूजन मिटाया, जानें Women Reservation Bill पर बयान
 
"राजनीति में अगर भविष्य में गठबंधन-धर्म का निर्वाह करना पड़ा, तो राहुल की 'तल्ख-शैली' के बजाय प्रियंका की 'सौम्य-शैली' सहयोगियों को जोड़ने में ज्यादा कारगर साबित हो सकती है।" अटल बिहारी वाजपेयी की याद दिलाता व्यक्तित्व
 
 
इतिहास गवाह है कि अटल बिहारी वाजपेयी के सौम्य व्यक्तित्व और सबको साथ लेकर चलने की कला ने भाजपा को सत्ता के शीर्ष तक पहुंचाया था। प्रियंका की शैली में भी वही लचीलापन दिखता है। इसका एक उदाहरण केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के साथ उनका संवाद था, जहां उन्होंने कुछ इस अंदाज में सार्वजनिक मनुहार की कि गडकरी ने सहजता के साथ उनका काम तुरंत निपटाने का भरोसा दिया।
 

क्या भारत को मिलेगी दूसरी महिला प्रधानमंत्री?

वैश्विक परिदृश्य पर नजर डालें तो हाल के वर्षों में क्लॉदिया शेनबॉम और जसिंडा अर्दर्न जैसी नेत्रियों ने दुनिया में उम्मीदें जगाई हैं। हालांकि अमेरिका में हिलेरी क्लिंटन और कमला हैरिस को मतदाताओं ने नकारा, लेकिन भारत का इतिहास इंदिरा गांधी की सशक्त लीडरशिप का गवाह रहा है। 
 
प्रियंका गांधी समकालीन राजनीति में एक अलग रंग और स्वर लेकर आई हैं। उनकी यह 'स्वीकार्य शैली' न केवल संवाद को मारक बनाती है, बल्कि दूरगामी प्रभाव भी छोड़ती है। अब देखना यह है कि कांग्रेस इस 'प्रियंका-फैक्टर' का उपयोग आने वाले चुनावों में किस तरह करती है।
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