अमेरिका ने रूसी तेल पर दी बड़ी छूट, भारत के लिए क्या हैं मायने?
ट्रंप प्रशासन ने शुक्रवार को तेल पर बड़ी राहत देते हुए सभी देशों को समुद्र में रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने की अनुमति दे दी। यह छूट लगभग एक महीने के लिए है। इस फैसले से भारत समेत सभी देशों को बड़ी राहत मिली है। दो दिन पहले ही ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने छूट देने से इनकार कर दिया था।
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ट्रेजरी विभाग ने शुक्रवार देर रात अपनी वेबसाइट पर यह लाइसेंस जारी किया। इसमें कहा गया है कि 17 अप्रैल या उससे पहले समुद्र में लदे रूसी तेल पर लागू प्रतिबंध से छूट को अब 16 मई तक बढ़ा दिया गया है। इसका मतलब है कि जो तेल पहले से जहाजों में लोड हो चुका है, उसे वैश्विक बाजारों तक पहुंचने की अनुमति मिलेगी।
क्या है फैसले के भारत के लिए मायने
भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। रूस से आने वाला कच्चा तेल भारत के लिए सस्ता और सुलभ है। अमेरिका के इस फैसले से यह सुनिश्चित होगा कि समुद्र में पहले से मौजूद रूसी तेल की आपूर्ति बाधित नहीं होगी, जिससे भारत के रिफाइनरियों को कच्चा तेल मिलने में कोई रुकावट नहीं आएगी। अगर अमेरिका इस छूट को नहीं बढ़ाता, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति कम हो जाती, जिससे कीमतों में भारी उछाल आने का डर था।
इन 3 देशों को नहीं मिली राहत
यह लाइसेंस वैश्विक ऊर्जा कीमतों को नियंत्रित करने के प्रशासन के प्रयासों का एक हिस्सा है। इसमें ईरान, क्यूबा और उत्तर कोरिया से जुड़े लेन-देन शामिल नहीं हैं। इसका मतलब है कि कोई भी देश रूस से तो तेल खरीदी कर सकेगा लेकिन 3 देशों को छूट नहीं मिलेगी।
बेसेंट ने पिछले महीने एक बयान में कहा था कि ईरानी छूट की वजह से लगभग 140 मिलियन बैरल तेल वैश्विक बाजारों तक पहुंच पाया और युद्ध के दौरान ऊर्जा आपूर्ति पर पड़े दबाव को कम करने में मदद मिली।
edited by : Nrapendra Gupta
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