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Last Updated :नई दिल्ली , शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026 (15:51 IST)

राहुल गांधी ने संसद में सुनाई कहानी, भाषण पर मचा बवाल, स्पीकर ने कार्यवाही से हटाया बयान

rahul gandhi in loksabha
Rahul Gandhi Parliament Speech : नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पर बात करते हुए संसद में कहानी सुनाई। उन्होंने कहा कि इस बिल का महिलाओं से कोई लेना देना नहीं। परिसीमन बिल से महिलाओं का भला नहीं।  यह भारत के चुनावी नक्शे को बदलने की कोशिश है। यह ओबीसी, दलित और मुस्लिमों से ताकत छिनने की कोशिश है। हम ऐसा होने नहीं देंगे। पूरा विपक्ष मिलकर इसे गिराएगा। राहुल के बयान पर संसद में भारी हंगामा हुआ। स्पीकर ओम बिरला ने उनका बयान कार्यवाही से हटा दिया। ALSO READ: महिला आरक्षण बिल: क्या 2026 में फंस जाएगा मोदी सरकार का दांव? एनडीए के सामने खड़ी हैं ये 3 बड़ी चुनौतियां
 
रायबरेली से कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि मोदी सरकार दलितों को हिंदू कहती है, पिछड़ों को हिंदू कहती है लेकिन वो उन्हें देश के पॉवर स्‍ट्रक्चर में जगह नहीं देना चाहती। उन्होंने कहा कि दक्षिण का प्रतिनिधित्व कम नहीं होने देंगे। देश की आत्मा पर हमला नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि सरकार डरी हुई है। भाजपा को पता है कि यह बिल संसद में पास नहीं होगा। ये सिर्फ संदेश देना चाहते हैं।
 
उन्होंने कहा कि मैं देश भर के अपने मित्रों, भाइयों और बहनों—विशेषकर दक्षिणी राज्यों, छोटे राज्यों और पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों को—यह विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि आप चिंता न करें। हम उन्हें यूनियन ऑफ इंडिया पर हमला नहीं करने देंगे। आप इस संघ में बराबर के भागीदार हैं। उनमें 'यूनियन ऑफ इंडिया' में आपके प्रतिनिधित्व को छूने की हिम्मत नहीं होगी। 
 
यही सवाल इंदिरा गांधी के सामने भी आया था और वाजपेयी के सामने भी। उन दोनों ने इस सवाल का सामना किया था। वे इसके खतरों को समझते थे, और इसीलिए उन्होंने वह कदम नहीं उठाया जो वर्तमान प्रधानमंत्री उठा रहे हैं। ALSO READ: "लालू यादव जैसी गलती न करें": महिला आरक्षण बिल पर ललन सिंह ने विपक्ष को दी चेतावनी
 

राहुल ने संसद में सुनाई कहानी

राहुल ने कहा कि मुझे याद है कि जब मैं छोटा था, तो मुझे अंधेरे से डर लगता था। हमारे पास एक बहुत बड़ा कुत्ता था जो अक्सर मुझ पर और मेरी बहन पर हमला कर देता था। एक दिन, मेरी दादी को इस बारे में पता चला। मेरे माता-पिता रात के खाने के लिए बाहर गए हुए थे। मेरी दादी मुझे बगीचे में ले गईं, मुझे वहीं छोड़ दिया और कहा, 'डरो मत।'
 
उन्होंने कहा कि मैंने उन्हें दूर जाते हुए देखा, लेकिन मुझमें इतनी हिम्मत नहीं थी कि मैं उनसे कह सकूँ कि मैं वहां नहीं रुकना चाहता। मेरे लिए, वे कुछ मिनट दो या तीन घंटों के समान थे। मैंने सांपों, कुत्तों और उन तमाम चीज़ों की कल्पना कर ली जो मुझे डरा सकती थीं। अंततः, मेरी दादी वापस आईं और पूछा, 'तुम्हें किस बात का डर है?' मैंने कहा, 'मुझे उस कुत्ते से डर लगता है, और मुझे हर चीज़ से डर लगता है।' उन्होंने कहा, 'तुम कुत्तों, चमगादड़ों या अंधेरे से नहीं डरते। तुम अपने मन, अपनी कल्पना और अपने विचारों से डरते हो।'
 
फिर उन्होंने मुझसे कहा, 'तुम्हें अंधेरे से नहीं डरना चाहिए, क्योंकि सत्य अक्सर अंधेरे में ही छिपा होता है। यदि तुममें अपने डर या अंधेरे का सामना करने का साहस नहीं है, तो तुम कभी भी सत्य को समझने या उसके लिए लड़ने के काबिल नहीं बन पाओगे।' यह न केवल एक राजनीतिक सबक था, बल्कि मौलिक रूप से एक धार्मिक सीख थी — सत्यम शिवम सुंदरम।"
 

हंगामे के बीच स्पीकर की नसीहत

राहुल के भाषण के दौरान सत्ता पक्ष के सांसदों ने जमकर हंगामा किया। स्पीकर ओम बिरला ने भी उन्हें नसीहत देते हुए कहा कि संसद की मर्यादा होती है। मुद्दे पर अपनी राय रखें। उन्होंने कहा कि आप किसी चौराहे पर नहीं संसद में बोल रहे हैं। कहानी ना सुनाएं, सीधे मुद्दे पर आएं।

राजनाथ और किरेन रीजीजू ने जताई आपत्ति

केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पीएम को जादूगर कहना उनका अपमान। ये देश के प्रधानमंत्री का अपमान कर रहे हैं। देश की जनता ने उन्हें प्रधानमंत्री बनाया। राहुल पूरे देश का अपमान कर रहे हैं। उन्हें अपने बयान के लिए माफी मांगना होगी। केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू ने भी कहा कि नेता प्रतिपक्ष की भाषा सही नहीं है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को जादू कहा। इस पर स्पीकर बिरला ने कहा कि राहुल का बयान कार्यवाही से हटाया।
 

गौरतलब है कि महिला आरक्षण समेत तीनों बिलों पर चर्चा का जवाब गृहमंत्री अमित शाह देंगे। इसके बाद सदन में मतदान होगा। लोकसभा में अगर सभी 540 सदस्य उपस्थित होकर वोट करते हैं, तो बिल पास कराने के लिए 360 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होगी। एनडीए के पास अभी केवल 293 सदस्य हैं। यानी उसे विपक्ष के कम से कम 67 और सांसदों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी।
edited by : Nrapendra Gupta
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