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Last Modified: नई दिल्ली , गुरुवार, 16 अप्रैल 2026 (19:32 IST)

PM मोदी का ब्लैंक चेक, प्रियंका गांधी की चेतावनी, अमित शाह ने कांग्रेस का कन्फ्यूजन मिटाया, जानें Women Reservation Bill पर बयान

PM Modi
आज लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक को लेकर चर्चा हुई। इसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और प्रियंका गांधी सहित कई मंत्री और सांसद शामिल हुए। किस नेता ने क्या कहा-

पीएम मोदी ने क्या कहा- मैं श्रेय नहीं लेना चाहता 

महिला आरक्षण संशोधन बिल पर पीएम मोदी ने लोकसभा में अपनी बातें रखी। इस दौरान उन्होंने इन बिलों की आवश्यकता बताई और इसके साथ विपक्ष पर तीखा प्रहार किया। पीएम मोदी ने इस दौरान विपक्ष को खुला ऑफर दिया कि अगर ये बिल पास भी हो जाते हैं, तो इसका क्रेडिट सरकार को नहीं चाहिए। यह क्रेडिट विपक्ष रख ले, लेकिन महिलाओं को उनका हक मिले। पीएम मोदी ने कहा कि इस बिल को सर्वसम्मति से पास किया जाना चाहिए।  उन्होंने कहा कि इस विधेयक को राजनीतिक रंग देने की कोई जरूरत नहीं है और यह विधेयक 'विकसित भारत' में एक नया अध्याय जोड़ने का एक अवसर है। पीएम मोदी ने विपक्ष से अपील करते हुए कहा कि वह महिला आरक्षण बिल का श्रेय नहीं चाहते। 
 
उन्होंने कहा कि मैं श्रेय नहीं चाहता। इस बिल के पास होने के बाद कल मैं पूरे पेज का विज्ञापन दूंगा, जिसमें आप जिसकी भी तस्वीर चाहेंगे, उसकी तस्वीर होगी। इसका क्रेडिट लेने का ब्लैंक चेक आपको देता हूं।  प्रधानमंत्री ने लोकसभा में कहा कि महिला आरक्षण बिल पुरानी सीमाओं से आगे बढ़कर, राष्ट्रहित में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने का एक अवसर है। हमें इस बिल को आम सहमति के साथ आगे बढ़ाना चाहिए। जब सर्वसम्मति होती है तो सत्ता पक्ष की एक विशेष जिम्मेदारी होती है। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि मैं इसे गारंटी कह सकता हूं या वादा या फिर कोई उचित तमिल शब्द इस्तेमाल कर सकता हूं। लेकिन अगर हमारी नीयत साफ है तो हमें शब्दों के साथ खेलने की जरूरत नहीं है।
priynaka gandhi new

प्रियंका गांधी ने क्या कहा 

सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि आज की बहस वास्तव में महिला आरक्षण पर नहीं, बल्कि राजनीतिक चालाकी पर है। प्रियंका ने बिल के ड्राफ्ट का जिक्र करते हुए कहा, 'मैंने पूरा प्रारूप पढ़ा है। इसमें सबसे पहले लिखा है कि महिला आरक्षण 2029 तक लागू होगा, हम इससे सहमत हैं। दूसरा, सीटों की संख्या 850 तक बढ़ाई जाएगी और इसके लिए परिसीमन आयोग बनेगा जो 2011 की जनगणना को आधार बनाएगा। पुराने आंकड़ों के आधार पर क्यों आगे बढ़ना चाह रही सरकार। जल्दबाजी क्यों। जब तक जातिगत जनगणना नहीं होगी, सभी वर्गों को उचित हिस्सा नहीं मिल सकता है। इसे ध्यान से देखें तो इसमें साफ राजनीति की बू आती है। उन्होंने याद दिलाया कि 2023 के मूल बिल में नई जनगणना कराने का प्रावधान था, जो इस ड्राफ्ट में गायब है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तंज कसते हुए प्रियंका ने कहा, 'अगर आज चाणक्य जिंदा होते तो वे भी चौंक जाते।
amit shah in loksabha

अमित शाह ने समझाया सीटों का गणित

जो लोग कहते हैं कि संविधान संशोधन और नए कानून आने से दक्षिण की क्षमता लोकसभा में बहुत कम हो जाएगी और दक्षिण के राज्यों को बहुत नुकसान होगा… ऐसे झूठे नैरेटिव व भ्रांति फैलाने वालों को मैं कहना चाहता हूं कि किसी को कोई नुकसान नहीं होगा। जो भ्रांति फैला रहे हैं, शायद वो समझ नहीं पा रहे हों, इसलिए उनके लिए मेरा कोई टिप्पणी नहीं है, लेकिन इतनी सरलता से समझा दूंगा कि KG के बच्चे को भी समझ में आ जाए। गृह मंत्री ने कहा कि 2029 के पहले कोई चुनाव इसके तहत नहीं होगा। अखिलेशजी को परेशान होने की जरूरत नहीं है। हालांकि वो जीतेंगे नहीं। उन्होंने कहा कि 'देश की जनता में भ्रांति नहीं रहनी चाहिए। सदन में पेश बिलों पर भ्रम फैलाया जा रहा है कि तीनों बिलों को लेकर कि दक्षिण के राज्यों को नुकसान हो जाएगा। बिल जो सदन के सामने और कर्नाटक 28 सीटें हैं यानि 5.15 प्रतिशत, बिल पारित होने के बाद कर्नाटक में 28 से बढ़कर 42 सीटें हो जाएगी। आंध्रप्रदेश 4.6 प्रतिशत, 4.65 प्रतिशत हो जाएगी। तेलंगाना- 17 सीटें हैं, जो कि 3.13 प्रतिशत है, बढ़कर 26 सीटें, 3.18 प्रतिशत। तमिलनाडु- 39 सांसद हैं जो 7.18 प्रतिशत, जो कि अब 59 और 7.23 प्रतिशत होगा।
 

NDA के पास संख्याबल नहीं 

संसद में महिला आरक्षण विधेयक को दो-तिहाई बहुमत से पारित कराने के लिए सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पास आवश्यक संख्याबल नहीं है। हालांकि अन्य दलों के समर्थन हासिल करने से या उनमें से कुछ के मतदान से अनुपस्थित होने पर विधेयक का जरूरी मतों के साथ पारित होना संभव है। लोकसभा में राजग को 293 सदस्यों का समर्थन है जो सदन का 54 प्रतिशत है, जबकि विपक्ष के पास 233 सांसद हैं। सात सांसद निर्दलीय हैं, जबकि सात सांसद वाईएसआरसीपी, एआईएमआईएम और शिरोमणि अकाली दल जैसे दलों से हैं, जिन्होंने अभी तक खुले रूप में विधेयकों का समर्थन नहीं किया है। Edited by : Sudhir Sharma 
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