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मानसून पर 'अल नीनो' का साया! भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में बड़ी हलचल, IMD ने दी चेतावनी
IMD NOAA El Nino Warning: क्या इस साल मानसून हमें तरसाने वाला है? एक तरफ देश में मानसून की एंट्री हो चुकी है, तो दूसरी तरफ समुद्र के भीतर एक ऐसा 'वेदर मॉन्स्टर' एक्टिव हो गया है जो भारत की खेती और अर्थव्यवस्था को हिला सकता है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और अमेरिकी एजेंसी NOAA ने प्रशांत महासागर से एक बेहद चिंताजनक रिपोर्ट जारी की है—भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में अल नीनो (El Niño) की स्थिति न सिर्फ बन चुकी है, बल्कि यह तेजी से मजबूत हो रही है। आइए एक्सपर्ट्स से समझते हैं कि इस खतरनाक बदलाव का आपके बजट, खेती और बारिश पर क्या असर होने वाला है।
क्या है प्रशांत महासागर का ताजा हाल? IMD का आधिकारिक डेटा
IMD की जून 2026 की ताजा रिपोर्ट और सैटेलाइट इमेजरी के अनुसार, भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर (Equatorial Pacific Ocean) के केंद्रीय और पूर्वी हिस्सों में समुद्र की सतह का तापमान (SST) सामान्य से काफी ऊपर चला गया है। ALSO READ: Monsoon : महाराष्ट्र में मानसून की एंट्री, केरल में भारी बारिश से हालात बिगड़े, जानिए अपने राज्य में कब पहुंचेगा
IMD और अंतरराष्ट्रीय मॉडल्स का डेटा : वैश्विक मौसम मानकों के अनुसार, 'Niño 3.4' रीजन में तापमान का विचलना (Anomaly) +0.81°C से अधिक दर्ज किया गया है, जो अल नीनो की आधिकारिक शुरुआत की पुष्टि करता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बात की 92% संभावना है कि यह अल नीनो पूरे दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन (जून से सितंबर) के दौरान एक्टिव रहेगा और सर्दियों तक यह एक "सुपर अल नीनो" (Super El Niño) का रूप ले सकता है।
अल नीनो और भारतीय मानसून का कनेक्शन (Scientific Analysis)
सरल शब्दों में कहें तो अल नीनो प्रशांत महासागर में होने वाली एक मौसमी घटना है, जिसका सीधा असर भारत के मानसून पर पड़ता है।
- प्रशांत महासागर का गर्म होना (अल नीनो)
- हवाओं के रुख में बदलाव (कमजोर ट्रेड विंड्स)
- भारत की तरफ आने वाले मानसूनी बादलों का रुकना
भारत में कम बारिश/ सूखा (Drought Like Situation)
ऐतिहासिक रूप से, जब-जब प्रशांत महासागर में अल नीनो मजबूत हुआ है, भारत में मानसून या तो देरी से आया है या फिर सामान्य से बहुत कम बारिश हुई है। इस साल भी दक्षिण-पश्चिम मानसून केरल के तट पर सामान्य से देरी से (4 जून को) पहुंचा है और जून के पहले दो हफ्तों में देश में दीर्घकालिक औसत (LPA) से 26% कम बारिश दर्ज की गई है। ALSO READ: 45°C तापमान होगा न्यू नॉर्मल? UN की रिपोर्ट ने क्यों बढ़ाई दुनिया, खासकर भारत की टेंशन
इस साल कैसी रहेगी बारिश? IMD का पूर्वानुमान (Long Range Forecast)
मौसम विभाग ने इस साल के लिए अपने लॉन्ग रेंज फोरकास्ट (LPA) को अपडेट किया है:
- सामान्य से कम बारिश: देश में इस साल कुल मानसूनी बारिश LPA के 90% के आसपास रहने का अनुमान है (यानी सामान्य से कम)।
- सूखे और हीटवेव का खतरा: उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत (विशेषकर उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार और मध्य प्रदेश) में जून और जुलाई के महीनों में सामान्य से अधिक हीटवेव (लू) के दिन देखने को मिल सकते हैं और बारिश में बड़ी कमी आ सकती है।
- कृषि विशेषज्ञों की चेतावनी : किसान भाई तुरंत अपनाएं ये 'स्मार्ट एग्रीकल्चर टिप्स' (Expertise)
पूसा कृषि विज्ञान संस्थान और मौसम वैज्ञानिकों ने अल नीनो के इस साये को देखते हुए भारतीय किसानों के लिए विशेष गाइडलाइंस जारी की हैं, ताकि फसलों को नुकसान से बचाया जा सके:
1. कम पानी वाली फसलों (Short-Duration Crops) का चुनाव करें
कृषि विशेषज्ञों की सलाह है कि इस साल किसान धान की ऐसी किस्मों को प्राथमिकता दें जो कम समय में और कम पानी में पककर तैयार हो जाती हैं। इसके अलावा मक्का, बाजरा, रागी और दलहन (दालें) जैसी फसलों पर ध्यान दें, जिन्हें बहुत ज्यादा सिंचाई की जरूरत नहीं होती। ALSO READ: 16 राज्यों में भारी बारिश और 60km की स्पीड से तूफान का अलर्ट, मौसम विभाग की बड़ी चेतावनी!
2. 'डायरेक्ट सीडिंग' (DSR विधि) अपनाएं
परंपरागत रूप से धान की रोपाई (Transplantation) में बहुत पानी खर्च होता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस साल किसानों को धान की सीधी बुआई (Direct Seeding of Rice) तकनीक अपनानी चाहिए, जिससे पानी की 25-30% बचत होती है।
3. वाटर हार्वेस्टिंग और नमी प्रबंधन
विशेषज्ञों की राय: "चूंकि इस साल बारिश के स्पेल (Rain Spells) छोटे और अनियमित हो सकते हैं, इसलिए जब भी बारिश हो, खेतों की मेड़बंदी मजबूत रखें ताकि पानी बाहर न बहे। मल्चिंग (Mulching) तकनीक का उपयोग करें ताकि मिट्टी की नमी धूप के कारण जल्दी न उड़े।"
क्या वाकई चिंता की बात है?
हालांकि अल नीनो के कारण मानसून कमजोर रहने की आशंका है, लेकिन स्काईमेट (Skymet) और IMD के एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर हिंद महासागर में 'इंडियन ओशन डिपोल' (IOD) पॉजिटिव स्थिति में आता है, तो वह अल नीनो के बुरे असर को कुछ हद तक कम कर सकता है। सरकार ने भी बफर स्टॉक और सिंचाई व्यवस्था को लेकर राज्यों को एडवाइजरी जारी कर दी है।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala
Edited by: Vrijendra Singh Jhala
