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जस्टिस भुइयां के बयान से घिरे मुख्य चुनाव आयुक्त, जयराम रमेश ने मांगा ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा

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जस्टिस उज्जवल भुइयां ने हैदराबाद की नलसर यूनिवर्सिटी में कहा कि वोटिंग से रोकने वाली प्रक्रिया मनमानी है। इसे कोई बहाना सही नहीं ठहरा सकता। ऐसी प्रक्रिया संवैधानिक व्यवस्था को नकारती है। उन्होंने कहा कि अरबपति हो या रिक्शे वाला, दोनों के वोट बराबर होती है। जस्टिस भुइयां के बयान के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की मुश्किल बढ़ गई। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी उनसे इस्तीफे की मांग की। 
 
उन्होंने कहा कि भारत का संविधान नागरिकों के दो वर्ग नहीं बनाता, जिसमें एक वर्ग को वोट देने का अधिकार हो और दूसरे को इससे रोका जाए। भारतीय नागरिकों को बड़े पैमाने पर वोटिंग से रोकने वाली कोई भी प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 326 और 14 का उल्लंघन होगी।

जस्टिस भुइयां के अनुसार, अगर कोई प्रक्रिया लाखों भारतीय नागरिकों को उनके ही देश में दूसरे दर्जे का नागरिक बनाती है तो यह मनमानी है। इसे किसी भी तर्क से सही नहीं ठहराया जा सकता। यह संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ और संवैधानिक व्यवस्था का उल्लंघन है।
 

क्या बोले जयराम रमेश?

जयराम रमेश ने कहा कि जस्टिस भुइयां की टिप्पणी से यह साबित होता है कि सांविधानिक पद पर बैठे मुख्य चुनाव आयुक्त ने संविधान के प्रावधानों और उसकी भावना, दोनों का उल्लंघन किया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि जस्टिस भुइयां की टिप्पणी ने ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। CEC ने पद पर बने रहने का सारा नैतिक अधिकार खो दिया है।
 
पिछले 3 दिनों ने दिल्ली, मुंबई समेत कई स्थानों पर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं। कॉकरोच जनता पार्टी ने 10 अक्टूबर को दिल्ली में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक बड़े प्रदर्शन का एलान किया है।
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