ब्रह्मपुत्र पर चीन की खतरनाक चाल : तिब्बत में बन रहे दुनिया के सबसे बड़े बांध से भारत-बांग्लादेश में मचेगी तबाही!
चीन द्वारा तिब्बत के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में भारत के साथ विवादित सीमा के पास ब्रह्मपुत्र नदी (यारलुंग त्सांगपो) पर बनाए जा रहे दुनिया के सबसे बड़े जलविद्युत बांध (Mega Dam Project) को लेकर एक बेहद चौकाने वाला खुलासा हुआ है। खुद चीनी शोधकर्ताओं (Chinese Researchers) ने चेतावनी दी है कि इस सदी में ब्रह्मपुत्र के निचले बहाव (Downstream) वाले क्षेत्रों—विशेषकर भारत और बांग्लादेश—में जल प्रवाह (Runoff) में असामान्य बढ़ोतरी होगी, जिससे बाढ़ का खतरा काफी बढ़ सकता है।
चीनी शोधकर्ताओं ने खुद माना- भारत-बांग्लादेश में बढ़ेगा बाढ़ का खतरा, 168 अरब डॉलर की परियोजना पर सवाल!
यह अध्ययन हांगकांग के प्रसिद्ध समाचार पत्र साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (SCMP) में प्रकाशित रिपोर्ट और चाइना साइंस बुलेटिन में 8 अक्टूबर को छपे एक शोध पत्र के हवाले से सामने आया है। ALSO READ: नेपाल तबाही के बावजूद नहीं माना चीन : ब्रह्मपुत्र पर 14 लाख करोड़ का 'सदी का बांध' बनाने की ज़िद, भारत के पूर्वोत्तर पर बड़ा संकट?
700 सालों का अध्ययन : ग्लोबल वार्मिंग और बढ़ता जल प्रवाह
'चीनी एकेडमी ऑफ साइंसेज' और 'युन्नान यूनिवर्सिटी' के वैज्ञानिकों की एक संयुक्त टीम ने इस खतरे का वैज्ञानिक आधार प्रस्तुत किया है:
60,000 मेगावाट क्षमता : थ्री गोर्जेस डैम से 3 गुना बड़ा
जिस स्थान पर चीन यह मेगा प्रोजेक्ट बना रहा है, वह भौगोलिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील है:
यह परियोजना चीन के मध्य भाग में स्थित चालू 'थ्री गोर्जेस डैम' (Three Gorges Dam) से तीन गुना अधिक बिजली पैदा करने में सक्षम होगी। लेकिन यह जिस मेडोग (Medog) घाटी में बनाया जा रहा है, वह भारत के अरुणाचल प्रदेश राज्य की सीमा से बेहद सटा हुआ है।
भूकंपीय दरार (Fault Line) और भूस्खलन का दोहरा खतरा
बाढ़ के खतरे के अलावा, जुलाई में चीनी भूवैज्ञानिकों ने 'सेडिमेंटरी जियोलॉजी एंड टेथियन जियोलॉजी' पत्रिका में प्रकाशित एक अन्य शोध पत्र में चेतावनी दी थी कि:
तिब्बत से निकलने के बाद यह नदी अरुणाचल प्रदेश में 'सियांग' के नाम से जानी जाती है और फिर असम में प्रवेश कर 'ब्रह्मपुत्र' बनती है, जिसके बाद यह बांग्लादेश में बहती हुई बंगाल की खाड़ी में गिरती है।
यह अध्ययन हांगकांग के प्रसिद्ध समाचार पत्र साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (SCMP) में प्रकाशित रिपोर्ट और चाइना साइंस बुलेटिन में 8 अक्टूबर को छपे एक शोध पत्र के हवाले से सामने आया है। ALSO READ: नेपाल तबाही के बावजूद नहीं माना चीन : ब्रह्मपुत्र पर 14 लाख करोड़ का 'सदी का बांध' बनाने की ज़िद, भारत के पूर्वोत्तर पर बड़ा संकट?
700 सालों का अध्ययन : ग्लोबल वार्मिंग और बढ़ता जल प्रवाह
'चीनी एकेडमी ऑफ साइंसेज' और 'युन्नान यूनिवर्सिटी' के वैज्ञानिकों की एक संयुक्त टीम ने इस खतरे का वैज्ञानिक आधार प्रस्तुत किया है:
- पेड़ों के छल्लों (Tree Rings) से अध्ययन : शोधकर्ताओं ने दक्षिण-पूर्वी तिब्बती पठार के पेड़ों के छल्लों के जरिए वर्ष 1325 से 2020 तक (लगभग 7 शताब्दियों) के नदी प्रवाह का वैज्ञानिक पुनर्निर्माण (Reconstruction) किया।
- तिब्बत में दोहरी वार्मिंग : रिपोर्ट के अनुसार, तिब्बती पठार वैश्विक औसत की तुलना में लगभग दोगुनी दर से गर्म हो रहा है। इससे वहां की बर्फ तेजी से पिघल रही है और जल चक्र (Hydrological Cycle) बिगड़ रहा है।
- भविष्य का मॉडल : इस 700 साल के डेटा को आधुनिक जलवायु परिदृश्यों के साथ जोड़कर बनाए गए मॉडल से पता चला कि भविष्य में यारलुंग त्सांगपो (ब्रह्मपुत्र) में पानी का प्रवाह अप्रत्याशित रूप से बढ़ेगा, जिससे उच्च-प्रवाह (High-flow) और भीषण बाढ़ जैसी स्थितियां उत्पन्न होंगी।
60,000 मेगावाट क्षमता : थ्री गोर्जेस डैम से 3 गुना बड़ा
जिस स्थान पर चीन यह मेगा प्रोजेक्ट बना रहा है, वह भौगोलिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील है:
यह परियोजना चीन के मध्य भाग में स्थित चालू 'थ्री गोर्जेस डैम' (Three Gorges Dam) से तीन गुना अधिक बिजली पैदा करने में सक्षम होगी। लेकिन यह जिस मेडोग (Medog) घाटी में बनाया जा रहा है, वह भारत के अरुणाचल प्रदेश राज्य की सीमा से बेहद सटा हुआ है।
बाढ़ के खतरे के अलावा, जुलाई में चीनी भूवैज्ञानिकों ने 'सेडिमेंटरी जियोलॉजी एंड टेथियन जियोलॉजी' पत्रिका में प्रकाशित एक अन्य शोध पत्र में चेतावनी दी थी कि:
- सक्रिय फॉल्ट लाइन : प्रस्तावित बांध के ठीक नीचे एक सक्रिय भूकंपीय दरार (Active Fault Line) मौजूद है। इस क्षेत्र में तीव्र भूकंप आने पर बांध के ढहने या संरचनात्मक रूप से क्षतिग्रस्त होने का भारी जोखिम है।
- भूस्खलन (Landslides) : शोधकर्ताओं ने चीनी इंजीनियरों से आग्रह किया है कि वे ढलान स्थिरता को मजबूत करें, वर्ना भारी भूस्खलन से जलाशय का पानी अचानक बहकर नीचे की ओर भारी तबाही मचा सकता है।
तिब्बत से निकलने के बाद यह नदी अरुणाचल प्रदेश में 'सियांग' के नाम से जानी जाती है और फिर असम में प्रवेश कर 'ब्रह्मपुत्र' बनती है, जिसके बाद यह बांग्लादेश में बहती हुई बंगाल की खाड़ी में गिरती है।
- अचानक बाढ़ (Flash Floods) का हथियार : यदि चीन मानसून या भारी बारिश के दौरान बांध के दरवाजे अचानक खोल देता है, तो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों (विशेषकर अरुणाचल प्रदेश और असम) में अचानक जलप्रलय (Flash Floods) आ जाएगी।
- जल की कमी का संकट : सूखे के मौसम में यदि चीन इस विशाल बांध में पानी रोक लेता है, तो पूर्वोत्तर भारत में सूखे जैसी नौबत आ जाएगी और सिंचाई व पेयजल आपूर्ति बाधित हो सकती है।
- पर्यावरणीय संतुलन बिगाड़ना : नदी के तलछट (Sediment) के रुक जाने से भारत की कृषि योग्य भूमि की उर्वरता पर असर पड़ेगा।

