सबके लिए समय है... फिर अपने सपनों के लिए क्यों नहीं?
रात को सोने से पहले आप बीते दिन के बारे में सोचते हैं। कितने काम किए, कितनी जिम्मेदारियां निभाईं, कितने लोगों की जरूरत पूरी की, लेकिन जिस काम को करने की इच्छा सुबह मन में उठी थी, वह आज भी छूट गया। आप खुद को समझाते हैं- कल जरूर समय निकालूंगा।
कभी-कभी ऐसे ही कई महीने बीत जाते हैं। जीवन चलता रहता है, पर भीतर कोई इच्छा चुपचाप प्रतीक्षा करती रहती है। उसे याद करते ही एक कसक उठती है- क्या मेरा जीवन केवल जरूरी काम निपटाते हुए बीत जाएगा?
इस प्रश्न में आपके भीतर बचे हुए सपने की आवाज है। उसे सुनिए। हो सकता है वह आपको किसी अधूरे काम की याद दिला रही हो, किसी दबे हुए हुनर की ओर बुला रही हो या जीवन को थोड़ा अधिक अर्थपूर्ण बनाने का आग्रह कर रही हो।
हम अक्सर अपनी इच्छाओं को इसलिए पीछे रख देते हैं क्योंकि जिम्मेदारियां सामने खड़ी होती हैं। परिवार, आजीविका और संबंधों का महत्त्व अपनी जगह है लेकिन उन्हें निभाते हुए अपनी क्षमताओं के लिए थोड़ी जगह बचाना भी जरूरी है। आपके भीतर जो अच्छा है, उसे विकसित होने का अवसर मिलना चाहिए।
अपने आप से पूछिए, कौनसा काम करने के बाद मुझे केवल थकान नहीं, मन में संतोष भी मिलता है? किस काम को बेहतर करने की इच्छा बार-बार लौटती है? लोग किस बात के लिए मेरी सहायता लेते हैं? इन प्रश्नों के उत्तर आपकी छिपी प्रतिभा का परिचय दे सकते हैं।
हो सकता है आप कठिन बात आसानी से समझा लेते हों। लोगों की परेशानी धैर्य से सुनते हों। किसी अव्यवस्थित काम को संवार देते हों। लिखने, सिखाने, बनाने या समस्याएं सुलझाने में आपकी सहज रुचि हो। जिसे आप सामान्य समझकर अनदेखा करते आए हैं, वही आपकी विशेष क्षमता हो सकती है।

