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Last Modified: सोमवार, 20 अप्रैल 2026 (18:16 IST)

टोंक का नन्हा मानसिंह: 10 साल का बच्चा, जो कहता है- हल्दीघाटी मैंने लड़ी, आमेर में मेरा है खजाना

The image depicts a child surrounded by villagers who are questioning him. In the background stands a traditional mud house from the village.
Raja Man Singh Rebirth Claim News: टोंक/राजस्थान: राजस्थान की रेतीली धरती कहानियों और किंवदंतियों के लिए मशहूर है, लेकिन इन दिनों टोंक जिले का जैकमाबाद गाँव एक ऐसी गुत्थी में उलझा है जिसने विज्ञान और आस्था के बीच की लकीर धुंधली कर दी है। यहाँ रहने वाला 10 साल का कान्हाराम बैरवा अब महज़ एक पाँचवीं का छात्र नहीं रहा, वह खुद को आमेर के प्रतापी शासक राजा मानसिंह प्रथम का अवतार बताता है।
 

ढाई साल की उम्र में पहला शब्द: 'राजा मानसिंह'

जहाँ बच्चे आमतौर पर 'मम्मी-पापा' बोलना सीखते हैं, कान्हाराम की माँ ग्यारसी देवी का दावा है कि उनके लाडले ने सबसे पहले 'राजा मानसिंह' शब्द का उच्चारण किया था। परिवार के मुताबिक, कान्हाराम का व्यवहार किसी आम बच्चे जैसा नहीं है।
 
राजपूती ठाट-बाट: वह घर के साधारण बर्तनों में भोजन नहीं करता।
सिंहासन और रणकौशल: घर में ही 'सिंहासन' लगाकर बैठना और तलवारबाज़ी (युद्ध क्रीड़ा) करना उसकी दिनचर्या का हिस्सा है।
शिलादेवी का भक्त: वह दावा करता है कि आमेर की शिलादेवी की मूर्ति वही बंगाल से लाया था और अष्टमी के दिन वह 'दरबार' लगाकर लोगों की समस्याएं भी सुलझाता है।
 

खजाना, टेढ़ी गर्दन और हल्दीघाटी: दावों की फेहरिस्त

कान्हाराम की जुबान पर आमेर के इतिहास की ऐसी कहानियां हैं जो उसे रहस्यमयी बनाती हैं। वह बताता है कि आमेर के महलों में आज भी भारी खजाना छिपा है। शिलादेवी की मूर्ति की गर्दन टेढ़ी होने का कारण वह 'नरबलि' बंद होने को बताता है।
 

विराट कोहली का फैन और 'पुलिस अफसर' बनने का सपना

  • अजीब विरोधाभास तब दिखता है जब 16वीं शताब्दी का 'राजा' आधुनिक दौर की बातें करता है।
  • जब इतिहास के कठिन सवाल पूछे गए, तो कान्हा लड़खड़ा गया। उसने राजा मानसिंह की मृत्यु का स्थान 'अनाज मंडी' बताया, जबकि इतिहास कहता है कि उनकी मृत्यु बुरहानपुर (दक्षिण भारत) में हुई थी।
  • खुद को आमेर का अधिपति बताने वाले इस बच्चे का पसंदीदा खिलाड़ी विराट कोहली है और ताज्जुब की बात यह है कि वह बड़ा होकर राजा नहीं, बल्कि पुलिस अधिकारी बनना चाहता है।

कैमरों की चकाचौंध और ठप होती पढ़ाई

इस 'चमत्कार' की खबर ने जैकमाबाद के सरकारी स्कूल की शांति भंग कर दी है।
स्कूल का रुख: शिक्षक परेशान हैं क्योंकि हर दिन मीडिया और जिज्ञासु लोगों की भीड़ स्कूल पहुँच रही है। स्टाफ का कहना है कि इससे कान्हाराम और अन्य बच्चों की पढ़ाई का नुकसान हो रहा है।
अनोखा व्यवहार: स्कूल में वह एक सामान्य छात्र है, लेकिन रह-रहकर अपने 'राजसी अतीत' का जिक्र करना नहीं भूलता।
 

सच या फसाना?

परिवार चाहता है कि कान्हाराम को एक बार जयपुर के आमेर महल ले जाया जाए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। क्या वह महल के गुप्त रास्तों को पहचान पाएगा? या फिर यह सिर्फ एक अबोध मन की कल्पना है जो इतिहास की गलियों में भटक गई है? फिलहाल, टोंक का यह 'नन्हा राजा' राजस्थान में चर्चा का सबसे बड़ा विषय बना हुआ है।
 

कौन था राजा मानसिंह?

राजा मानसिंह प्रथम मुगल सम्राट अकबर के नवरत्नों में से एक थे और उन्होंने ही आमेर के प्रसिद्ध महलों का निर्माण करवाया था। उनकी मृत्यु 1614 ईस्वी में हुई थी। 18 जून, 1576 को आमेर के राजा मानसिंह और आसफ खां के नेतृत्व में मुगल सेना और महाराणा प्रताप के बीच हल्दीघाटी का युद्ध हुआ। माना जाता है कि इस युद्ध में न तो अकबर की जीत हो सकी और न ही महाराणा प्रताप की हार हो सकी। इसका अर्थ है कि राजा मानसिंह ने महाराणा प्रताप का साथ नहीं दिया था।  
 

क्या कहता है मनोविज्ञान:

मनोविज्ञान की भाषा में इसे 'फैंटेसी प्रोन पर्सनैलिटी' (Fantasy Prone Personality) या 'हाइपर-इमेजिनेशन' कहा जा सकता है। अक्सर बच्चे कहानियों या टीवी सीरियल्स से इतने प्रभावित हो जाते हैं कि वे उसे अपना सच मानने लगते हैं। हालांकि, पुनर्जन्म के शोधकर्ताओं (जैसे डॉ. इयान स्टीवेन्सन) के अनुसार, अगर बच्चा ऐसी बारीक जानकारियाँ दे जो उसने कहीं सुनी न हों, तभी उसे 'पास्ट लाइफ रिग्रेशन' की श्रेणी में रखा जाता है।
 
 
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