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इंदौर पहुंची दिल्‍ली प्रोटेस्‍ट की आग, हजारों स्‍टूडेंट्स जुटे, कहा, मर जाएंगे, पर उठेंगे नहीं, सरकार सुनती क्‍यों नहीं?

Indore Protest
  • दिल्‍ली में स्‍टूडेंट के साथ पुलिस के बर्ताव से दुखी छात्र
  • हम भविष्‍य के लिए लड़ रहे, सरकार हमारी सुनती क्‍यों नहीं
  • उज्‍जैन, देवास, धार के कई क्षेत्रों से इंदौर में जुट हजारों छात्र
उनकी आवाज में गुस्‍सा है, लेकिन आंखों में भविष्‍य को लेकर फिक्र। वे अपने कॅरियर के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं, वे चाहते हैं कि उनके और उनके मां-बाप के सपने पूरे हों, जो लाखों रुपए उनके परिवारों ने कर्ज लेकर कोचिंग में फूंके कम से कम उनकी भरपाई हो सकें, लेकिन देश की भ्रष्‍ट शिक्षा व्‍यवस्‍था के खिलाफ उनके चेहरे पर बेबसी साफ नजर आती है। वे नारे लगा रहे हैं, रो रहे हैं, चीख रहे हैं, लेकिन उनकी चीख से जिम्‍मेदारों के कान पर जूं तक नहीं रेंगती।
पिछले करीब 20 दिनों से इंदौर के भंवरकुआ चौराहे पर हजारों स्‍टूडेंट शिक्षा व्‍यवस्‍था में सुधार और शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्‍तीफे की मांग के साथ यहां जुटे हुए हैं। वे भूखे हैं, प्‍यासे हैं, पानी पीकर और केले खा कर जैसे-तैसे गुजारा कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि हम मर जाएंगे, लेकिन यहां से तब तक नहीं उठेंगे जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं हो जाती। जो स्‍टूडेंट नीट के नहीं हैं, वे भी यहां नजर आ रहे हैं। कई बच्‍चों के परिजन भी यहां उनका हौंसला बढ़ाने के लिए कई दिनों से उनके साथ ब्रिज के नीचे बैठे हैं।
Indore Protest
धर्मेंद प्रधान को लेकर क्‍या मजबूरी है : अक्षरा दुबे, माही शर्मा, आरती पटेल, प्रमोद नामदेव, अरुण बडोले, आनंद पाल समेत कई स्‍टूडेंट्स ने वेबदुनिया से चर्चा की। उनका कहना है कि सरकार आखिर उनकी क्‍यों नहीं सुनती। वे आखिरकार अपने भविष्‍य के लिए ही तो लड़ रहे हैं। वे सिर्फ यही तो चाहते हैं कि देश के एजुकेशन सिस्‍टम में लगी दीमक साफ हो, इस सड़ांध का इलाज हो। उनका कहना है कि क्‍या ये गलत मांग है। अगर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में नीट पेपर लीक हुआ है और लाखों बच्‍चों का भविष्य अंधेरे की गर्त में चला गया है तो सरकार उनका इस्‍तीफा क्‍यों नहीं लेती। इसमें ऐसा क्‍या बड़ा काम है। जो जिम्‍मेदार हैं, वे अपनी जवाबदेही क्‍यों नहीं मान रहे हैं।
Indore Protest
दिल्‍ली में पुलिस की बेदर्दी से दुखी स्‍टूडेंट : स्‍टूडेंट ने बताया कि शांति से प्रोटेस्‍ट करने वाले स्‍टूडेंट पर सरकार उलटा लाठियां भांज रही है, कई बच्‍चे और यहां तक कि लड़कियां घायल हुएं हैं। स्‍टूडेंट खून से सने हैं, इस बेरहमी के वीडियो और तस्‍वीरें सोशल मीडिया में वायरल हैं। बच्‍चे चीख चीखकर अपनी बात कह रहे हैं, अपने अधिकारों की रक्षा की बात कर रहे हैं, लेकिन दिल्‍ली पुलिस उनके साथ हिंसा कर रही है। स्‍टूडेंट ने बताया कि पुलिस मारपीट कर रही है। अगर उनकी सरकार ही उनकी बात नहीं सुनेगी तो वे कहां जाएंगे।

केले और पानी पर गुजर रहे दिन : बाहर से आए स्‍टूडेंट ने बताया कि वे बगैर कुछ खाए और पिये यहां अपने हक के लिए बैठे हैं। कुछ लोगों ने केले और पानी की बोतलें रख दी तो जैसे तैसे उनका दिन गुजर जाता है। दिन में और रात में भी भंवरकुआ ब्रिज के नीचे बैठे रहते हैं। मंगलवार को बारिश शुरू होने पर भी छात्र और छात्राएं वहां डटे रहे और नारे लगाते रहे। कोई देशभक्‍ति गीत गा रहा है तो कोई हौसला बढ़ा रहा है। कोई ढपली बजा रहा है तो कोई माइक में भाषण देकर बच्‍चों में जोश भर रहा है।
Indore Protest
सोनम वांगचुक को हमारा समर्थन : बता दें कि राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) पेपर लीक प्रकरण को लेकर देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर व्यापक प्रदर्शन हो रहा है। इसकी गूंज अब मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में भी सुनाई देने लगी है। भंवरकुआं चौराहे पर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन में स्कूल और कॉलेजों के छात्र-छात्राएं शामिल हो रहे हैं। इनके साथ बड़ी संख्या में शिक्षक, अभिभावक, स्थानीय कलाकार और आम नागरिक भी अपनी एकजुटता दिखाने पहुंच रहे हैं। प्रदर्शनकारी केंद्र सरकार में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग के साथ देश की शिक्षा व्यवस्था को सुधारने की मांग कर रहे हैं। उन्‍होंने दिल्‍ली में धरने पर बैठे पर्यावरणविद सोनम वांगचुक को अपना पूरा समर्थन दिया है। छात्रों पर हो रहे लाठीचार्ज खिलाफ गहरा आक्रोश व्यक्त किया।
लेखक के बारे में
नवीन रांगियाल
नवीन रांगियाल DAVV Indore से जर्नलिज्‍म में मास्‍टर हैं। वे इंदौर, भोपाल, मुंबई, नागपुर और देवास आदि शहरों में दैनिक भास्‍कर, नईदुनिया, लोकमत और प्रजातंत्र जैसे राष्‍ट्रीय अखबारों में काम कर चुके हैं। करीब 15 साल प्रिंट मीडिया में काम करते हुए उन्‍हें फिल्‍ड रिपोर्टिंग का अच्‍छा-खासा अनुभव है। उन्‍होंने अखबार.... और पढ़ें
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