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Written By WD Feature Desk
Last Updated : शुक्रवार, 2 जनवरी 2026 (11:28 IST)

Magh Mela 2026: माघ मेले में जा रहे हैं तो जानिए क्या करें और क्या नहीं

Magh Mela 2026 Snan and Stay
Prayagraj Magh Mela 2026: नववर्ष 2026 में 3 जनवरी से माघ मेला शुरू होने वाला है और यह महापर्व 44 दिनों तक जारी रहेगा। यह मेला हिन्दू धर्म के अनुयायियों के लिए महत्वपूर्ण होता है, खासकर उन लोगों के लिए जो आस्था और तर्पण के लिए संगम में स्नान करते हैं। माघ मेला, प्रयागराज/ इलाहाबाद में गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती नदी के पवित्र संगम तट पर आयोजित होने वाला एक विशाल वार्षिक धार्मिक समागम है।ALSO READ: सिंहस्थ महाकुंभ की तारीखों की हुई घोषणा, 27 मार्च से 27 मई 2028 तक चलेगा महापर्व
 
यदि आप माघ मेले में जा रहे हैं, तो यह सुनिश्चित करने के लिए कि आपकी यात्रा आध्यात्मिक और सुरक्षित हो, इन बातों का ध्यान रखें...
 
माघ मेले में क्या करें: 
 
1. स्नान और पूजा: सूर्योदय से पूर्व उठकर त्रिवेणी संगम में  पवित्र स्नान, डुबकी लगाना और सूर्य देव को अर्घ्य देना सबसे महत्वपूर्ण है। माघ पूर्णिमा, मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या ये सबसे महत्वपूर्ण स्नान हैं और बसंत पंचमी के स्नानों में अवश्य भाग लें।
 
2. दान और धर्म: अपनी क्षमतानुसार अन्न विशेषकर तिल, वस्त्र, गर्म कपड़े और कंबल का दान करें। दान का फल अनंत गुना माना जाता है।
 
3. पितृ तर्पण: संगम पर पितरों/ पूर्वजों के लिए तर्पण और पिंडदान करें। यह पितृ दोष से मुक्ति दिलाता है।
 
4. गर्म कपड़े: प्रयागराज में ठंड अधिक होती है। अच्छे स्वास्थ्य के लिाहाज से ऊनी वस्त्र, मोजे, टोपी और शॉल अवश्य रखें।
 
5. सावधानियां: अपना पहचान पत्र और पते का प्रमाण हमेशा साथ रखें। भीड़ में खो जाने पर यह सहायक होता है।
 
6. अस्थायी निवास: यदि कल्पवास कर रहे हैं, तो अपने तंबू/ कैंप या आश्रम के नियम और स्थान की जानकारी स्पष्ट रखें।
 
7. पीने का पानी: केवल सुरक्षित पेयजल यानी बोतलबंद पानी ही पिएं।ALSO READ: माघ मेला 2026: संगम तट पर बस भव्य तंबुओं का शहर, जानिए स्नान, कल्पवास का महत्व
 
8. सहयोग: अन्य साधु-संतों और कल्पवासियों के साथ विनम्र और सहयोगी व्यवहार रखें।
 
माघ मेले में क्या नहीं करें: 
 
1. सुरक्षा- अकेले स्नान: गहरे पानी में अकेले स्नान न करें। घाटों पर सुरक्षा रस्सियों के भीतर ही रहें।
 
2. अमूल्य वस्तुएं- कीमती सामान: मेले में अत्यधिक कीमती गहने, सोने के आभूषण या बहुत सारा नकद लेकर न जाएं। चोरी का खतरा रहता है।
 
3. नियम उल्लंघन- अवैध गतिविधि: मेला क्षेत्र में धूम्रपान, शराब या किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थ का सेवन न करें। यह सख्त वर्जित है।
 
4. पर्यावरण- प्रदूषण: स्नान के घाटों और नदी में साबुन, शैम्पू, डिटर्जेंट या कूड़ा न डालें। गंगा की पवित्रता बनाए रखें।
 
5. खाना- अशुद्ध भोजन: खुले में बिक रहे या बासी भोजन का सेवन न करें। इससे स्वास्थ्य बिगड़ सकता है।
 
6. बच्चों और बुजुर्गों को भीड़भाड़ से बचाएं: अत्यधिक भीड़भाड़ वाले स्नानों जैसे मौनी अमावस्या के दौरान बच्चों और बुजुर्गों को अकेले न छोड़ें। उनके लिए पहचान पत्र और संपर्क नंबर आवश्यक है।
 
7. फोटो- अनुमति: बिना अनुमति के साधु-संतों या संन्यासी समूहों की फोटोग्राफी या वीडियोग्राफी न करें।
 
8. समय- देर रात तक घूमना: रात में अनावश्यक रूप से अकेले घूमना या सुनसान घाटों पर जाना सुरक्षित नहीं है।
 
यदि आप कुंभ नगरी प्रयागराज में गंगा-यमुना और सरस्वती की त्रिवेणी के तट पर माघ के महीने में लगने वाले देश के सबसे बड़े सालाना धार्मिक मेले में जा रहे हैं तो उपरोक्त दिशानिर्देशों का पालन करके अपनी माघ मेले की इस यात्रा को एक सुखद, सुरक्षित और आध्यात्मिक अनुभव वाली बना सकते है।ALSO READ: महाकुंभ 2025 की तरह माघ मेला 2026 को दिव्य और भव्य स्वरूप प्रदान कर रही है योगी सरकार

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