Dhanu Sankranti Vrat: धनु संक्रांति हिंदू कैलेंडर का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो इस बार 16 दिसंबर 2025, दिन मंगलवार को मनाया जा रहा है। यह दिन सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करने का प्रतीक है, जो विशेष रूप से पितरों की पूजा और तर्पण करने के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है। धनु संक्रांति का संबंध न केवल सूर्य के संक्रमण से है, बल्कि यह दिन पितृ ऋण से मुक्ति पाने का भी एक महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है।
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धनु संक्रांति पर तर्पण का महत्व: धार्मिक शास्त्रों के अनुसार तर्पण शब्द का अर्थ है पितरों को श्रद्धांजलि अर्पित करना, ताकि उनकी आत्मा को शांति मिले। हिंदू धर्म में यह विश्वास किया जाता है कि व्यक्ति अपने पितरों के ऋण से तभी मुक्त हो सकता है, जब वह उन्हें तर्पण अर्पित करता है और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करता है। धनु संक्रांति पर विशेष रूप से पितरों की पूजा और तर्पण करने से पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है और व्यक्ति को जीवन में सुख-शांति प्राप्त होती है।
धनु संक्रांति पर तर्पण के लाभ:
1. पितृ ऋण से मुक्ति: हिंदू धर्म में यह माना जाता है कि पितृ ऋण से मुक्त होने के लिए व्यक्ति को अपने पितरों को श्रद्धांजलि अर्पित करनी चाहिए। धनु संक्रांति का दिन इस कार्य के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। तर्पण करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार के सदस्य पितृ दोष से मुक्त हो जाते हैं।
3. पुण्य की प्राप्ति: धनु संक्रांति के दिन तर्पण करने से व्यक्ति को धार्मिक पुण्य मिलता है, जो जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सफलता लाता है। इस दिन तर्पण से न केवल पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है, बल्कि इससे व्यक्ति के जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
4. पारिवारिक सुख-शांति: पितरों की पूजा और तर्पण से परिवार में सुख-शांति का वातावरण बनता है। इस दिन पितृ दोष और अन्य पारिवारिक समस्याएं दूर होती हैं। यदि किसी व्यक्ति को जीवन में कोई बाधा या समस्या आ रही हो, तो इस दिन तर्पण से वह समस्याएं समाप्त हो सकती हैं।
5. मंत्र जाप: इस दिन सूर्य मंत्र: 'ॐ सूर्याय नमः' जाप से सूर्यदेव का आशीर्वाद प्राप्त होकर जीवन में उन्नति और सुख-शांति आती है। साथ ही पितृ तर्पण मंत्र: 'ॐ पितृ देवाय नमः' के जप से तर्पण करने से मनुष्य अपने जीवन के कष्टों से मुक्ति प्राप्त करता है।
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