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हरिद्वार कुंभ मेला : नागा बाबाओं के 17 श्रृंगार जानकर हैरान रह जाएंगे

रविवार,अप्रैल 4, 2021
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उत्तररांचल प्रदेश में हरिद्वार अर्थात हरि का द्वार है। हरि याने भगवान विष्णु। हरिद्वार नगरी को भगवान श्रीहरि (बद्रीनाथ) का द्वार माना जाता है, जो गंगा के तट पर स्थित है। इसे गंगा द्वार और पुराणों में इसे मायापुरी क्षेत्र कहा जाता है। यह भारतवर्ष के ...
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कल्पवास का अर्थ होता है संगम के तट पर निवास कर वेदाध्ययन और ध्यान करना। प्रयाग इलाहाबाद कुम्भ मेले में कल्पवास का अत्यधिक महत्व माना गया है। कल्पवास पौष माह के 11वें दिन से माघ माह के 12वें दिन तक रहता है। कुछ लोग माघ पूर्णिमा तक कल्पवास करते हैं।
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हर वर्ष माघ माह में हरिद्वार, प्रयाग, उज्जैन, नासिक आदि जगहों पर पवित्र नदी में स्नान करने का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इस बार माघ माह में हरिद्वार में कुंभ मेले का आयोजन हो रहा है। ऐसे में पवित्र नदी में स्नान का महत्व कई गुना है। पूस एवं माघ माह ...
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मूलत: कुम्भ या अर्धकुम्भ में साधु-संतों के कुल तेरह अखाड़ों द्वारा भाग लिया जाता है। इन अखाड़ों की प्राचीन काल से ही स्नान पर्व की परंपरा चली आ रही है। इन अखाड़ों के नाम है: -
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कोरोना काल के चलते हरिद्वार कुंभ मेले में वैसे तो बहुत ही सावधानी रखने की जरूरत है परंतु हम यहां बता रहे हैं वे सावधानियां या नियम जिसका उल्लेख शास्त्रों में किया गया है क्यों कुंभ नगरी एक तीर्थ क्षेत्र है जहां पर धर्म और कर्म का नियम है यह कोई ...
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अगले वर्ष 2021 को हरिद्वार में कुंभ मेले का आयोजन होने वाला है। कोरोना का असर 2021 में हरिद्वार में होने वाले कुंभ मेले पर भी रहेगा। कुंभ का आयोजन मुख्य तौर पर मार्च से अप्रैल के बीच किया जाएगा, परंतु इसकी अधिसूचना फरवरी के अंत में होगी। आओ जानते ...
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कुंभ मेला का दूसरा प्रमुख शाही स्नान पर्व मौनी अमावस्या चार फरवरी को है। इस बार सोमवती व मौनी अमावस्या पर महोदय योग बन रहा है। यह दुर्लभ योग 71 वर्ष बाद कुंभ के दौरान बन रहा है।
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इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के उपेक्षापूर्ण रवैये से नाराज अखाड़ों के साधुओं ने प्रयाग में अगले वर्ष लगने वाले कुंभ मेले में शाही स्नान नहीं करने का आज निर्णय किया।
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भोपाल। मध्यप्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में अगले वर्ष अप्रैल माह में होने वाले सिंहस्थ-2016 (कुंभ) में किन्नर समुदाय भी शामिल होंगे और यहां किन्नरों का एक अलग अखाड़ा भी होगा।
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कांग्रेस के शासनकाल में जहां प्रदेश में 10-15 घंटे बिजली कटौती होती थी, वहीं आज स्थिति यह हो चुकी है प्रदेश में सरप्लस बिजली पैदा होने लगी है। इसकी बदौलत आज हम दूसरे को बिजली बेचने की स्थिति में आ गए हैं।
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मध्यप्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में अगले वर्ष होने वाले सिंहस्थ महापर्व में किन्नर अखाड़े के गठन एवं परी (महिला) अखाड़े को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद् द्वारा मान्यता नहीं दिए जाने से पिछले सिंहस्थ 2004 की तरह विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है।
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श्वभर में आस्था के लिए लाखों लोगों के एकत्र होने के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन नासिक सिंहस्थ कुंभ के मद्देनजर आज (शुक्रवार को) त्र्यंबकेश्वर में तीसरा और अंतिम ‘शाही स्नान’ संपन्न होगा। हिन्दू कैलेंडर के हिसाब से यह हर 12 साल में आयोजित होता है।
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नासिक के त्र्यंबकेश्वर में चल रहे कुंभ मेले के दौरान शुक्रवार को तीसरा और अंतिम ‘शाही स्नान’ होगा। जिला प्रशासन के एक अधिकारी ने कहा क‍ि इस दौरान सुबह 4.15 से दोपहर 12 बजे तक 10 अखाड़ों से जुड़े हजारों ऋषि, महंत और साधु कुशवर्त तीर्थ में पवित्र ...
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भारी बारिश के बीच शुक्रवार को कुंभ मेले के आखिरी दिन हजारों संतों और भक्तों ने यहां रामकुंड में ‘शाही स्नान’ किया। निर्मोही, निर्वाणी और दिगंबर 3 अखाड़ों से संबंध रखने वाले संत, तपोवन इलाके के लक्ष्मीनारायण मंदिर से गोदावरी नदी के तट पर स्थित ...
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हिन्दू कैलेंडर के हिसाब से यह हर 12 साल में महाकुंभ का आयोजन होता होता है। इस बार 2016 में इसका आयोजन उज्जैन में होगा। धारणा है कि कुंभ के दौरान इन स्थानों में नदियों में पवित्र स्नान करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है।
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कुंभ, अर्धकुंभ और महाकुंभ आते ही लाखों की संख्या में आपको नागा बाबा डुबकी लगाते हुए दिखाई दे जाएंगे। लेकिन, कभी किसी ने सोचा है कि नागा बाबा कहां से आते हैं और कहां चले जाते हैं?
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नागा साधु अपने पूरे शरीर पर भभूत मले रहते हैं। आखिर क्यों? दरअसल नग्न अवस्था मे भस्मी या भभूत ही उनका वस्त्र होता है। यह भभूत उन्हें बहुत सारी आपदाओं से बचाती है, जैसे मच्‍छर या वायरल। इसे नागा साधुओं का प्रमुख श्रृंगार कहा जाता है।
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कुंभ में 'पान' खाना पाप है...!

मंगलवार,जुलाई 14, 2015
ताम्बूल अर्थात् पान होता है। पान का दान करने से मनुष्य पापों से छुटकारा पा जाता है, जबकि पान खाने से पाप होता है। वह पाप पान (ताम्बूल) दान करने से नष्ट हो जाता है। पान का पत्ता, इसके आगे का हिस्सा, इसके नाड़ी तंतु, चूना और रात के समय कत्था खाने से ...
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आचार्य शंकर द्वारा संन्यासियों की पहले से चली आ रही परंपरा को जब संगठित किया तो उसे नाम दिया- दशनामी साधु संघ। दीक्षा के समय प्रत्येक दशनामी जैसा कि उसके नाम से ही स्पष्ट है, निम्न नामों, गिरि, पुरी, भारती, वन, अरण्य, पर्वत, सागर, तीर्थ, आश्रम या ...
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