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धार्मिक स्थलों से अलग यूपी की ये 4 प्राकृतिक जगहें हैं बेहद खास, एक बार जाएंगे तो बार-बार आने का करेगा मन
उत्तर प्रदेश की जब भी बात आती है तो हमें लगता है कि यहां पर घूमने के लिए सिर्फ तीर्थ स्थल, मंदिर या नदियों के तट ही होंगे क्योंकि यहां पर अयोध्या, वृंदावन, मधुरा, प्रयाग, काशी, सारनाथ जैसे कई धार्मिक और तीर्थ स्थल है जोकि पवित्र नदियों के तट पर बसे हैं। अधिकतर जनता यहीं पर घूमने जाती है, लेकिन इसके अलावा भी यहां पर बहुत सुंदर और महत्वपूर्ण प्राकृतिक पर्यटन स्थल भी हैं, चलिए जानते हैं इनके बारे में संक्षिप्त में जानकारी।
1. कुदरत का आशियाना: यूपी के जादुई जंगल और अभयारण्य
दुधवा नेशनल पार्क (लखीमपुर खीरी):
लगभग 818 वर्ग किलोमीटर में फैला यह जंगल मानों प्रकृति की कोई खुली किताब है। यहाँ की जीप सफारी आपको सीधे बाघों, गैंडों, हाथियों और बारहसिंगों के संसार में ले जाती है। काले हिरण, तेंदुए, स्लथ बियर और दुर्लभ हिसपिड खरगोश जैसे वन्यजीव यहाँ की शान हैं। अगर आप परिंदों के शौकीन हैं, तो यहाँ पक्षियों की 450 प्रजातियाँ आपका स्वागत करेंगी। राजधानी लखनऊ से बस या ट्रेन पकड़िए और पहुँच जाइए हाथी की पीठ पर सवार होकर जंगल को करीब से महसूस करने।
पीलीभीत टाइगर रिज़र्व (शाहजहांपुर):
60 से ज़्यादा बाघों का यह आशियाना रोमांच से भरा है। यहाँ चूका बीच की खूबसूरती है, तो सनराइज और सनसेट पॉइंट्स के जादुई नजारे भी हैं। पाइथन पॉइंट, क्रोकोडाइल पॉइंट, बारहसिंगा ताल और सप्त सरोवर जैसी जगहें इस जंगल की सैर को एक मुकम्मल तजुर्बा बनाती हैं।
चंद्रप्रभा वन्यजीव अभयारण्य (चंदौली):
वाराणसी के पास विंध्य पहाड़ियों के बीच छुपा यह ठिकाना ट्रैकिंग और कैंपिंग के दीवानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। मॉनसून के दिनों में यहाँ के दो झरने—'राजदरी' और 'देवदरी'—अपने पूरे शबाब पर होते हैं, जिन्हें देखना आँखों को सुकून देता है।
कतरनियाघाट वन्यजीव अभयारण्य (बहराइच):
अगर आपको पानी और जंगल का मेल पसंद है, तो गेरुआ नदी के किनारे बसा कतरनियाघाट आपका दिल जीत लेगा। यहाँ बोट सफारी के दौरान पानी में अठखेलियां करतीं दुर्लभ गंगा डॉल्फिन, मगरमच्छ और घड़ियाल देखना एक रोंगटे खड़े कर देने वाला अनुभव है।
सूर सरोवर और कीठम झील (आगरा):
आगरा के शोर-शराबे से दूर यह एक बेहद शांत और हरी-भरी जन्नत है। सर्दियों के दस्तक देते ही यहाँ कीठम झील के आस-पास साइबेरिया और दुनिया के अलग-अलग कोनों से आए 100 से ज़्यादा प्रजातियों के प्रवासी पक्षियों का मेला लग जाता है। यहाँ का 'भालू बचाव केंद्र' भी देखने लायक है।
लाख बहोसी पक्षी अभयारण्य (कन्नौज):
दो विशाल झीलों (लाख और बहोसी) को समेटे हुए यह भारत के सबसे बड़े बर्ड सेंचुरीज में से एक है। 80 वर्ग किलोमीटर के इस शांत इलाके में सारस क्रेन, बगुले और नीलगाय जैसे जीवों को निहारते हुए नेचर वॉक करना और तस्वीरें खींचना बेहद सुकून देता है।
2. झांसी और ओरछा: वीरता और बेजोड़ वास्तुकला की भूमि
झांसी सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि इतिहास प्रेमियों के लिए एक जज्बा है। बेतवा और पहुँच नदियों के आंचल में बसे, रानी लक्ष्मीबाई के इस शहर का 'झांसी फोर्ट' बीते दौर की वीरता की गवाही देता है। लेकिन झांसी की यह यात्रा तब तक अधूरी है, जब तक आप यहाँ से महज 13 किलोमीटर दूर 'ओरछा' न चले जाएं। बीते कुछ सालों में ओरछा अपनी अद्भुत वास्तुकला, महलों और बेहद शांत माहौल के दम पर घुमक्कड़ों की पहली पसंद बन चुका है।
3. आगरा: सिर्फ ताजमहल नहीं, कला और स्वाद का गढ़
यमुना के किनारे बसा आगरा इतिहास के सुनहरे पन्नों जैसा है। सिकंदर लोदी से लेकर मुगलों के दौर तक, इस शहर ने ताजमहल, फतेहपुर सीकरी, आगरा किला और जामा मस्जिद जैसी नायाब इमारतें पाईं। लेकिन आगरा सिर्फ इमारतों का शहर नहीं है, यह अपनी कला के लिए भी मशहूर है। यहाँ संगमरमर पर उकेरी गई नक्काशी, जरदोजी के कपड़े और सदर बाजार, किनारी बाजार व राजा-की-मंडी की रौनक पर्यटकों को बांधे रखती है। और हाँ, यहाँ के मशहूर पेठे और तिल-गुड़ से बनी गजक का स्वाद लिए बिना आगरा की यात्रा पूरी नहीं होती।
4. चित्रकूट: आस्था, पहाड़ और झरनों की जुगलबंदी
ज्यादातर लोग चित्रकूट को रामायण के उस अध्याय के रूप में जानते हैं जहाँ भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण जी ने अपने वनवास के पल बिताए थे। विंध्य पर्वतमाला की गोद में बसे इस स्थान पर भरत मिलाप मंदिर, जानकी कुंड और हनुमान धारा जैसी आस्था से जुड़ी जगहें तो हैं ही, लेकिन प्रकृति प्रेमियों के लिए यहाँ के ऊंचे पहाड़, रहस्यमयी कुंड और कल-कल बहते खूबसूरत झरने सबसे यादगार और सुकून देने वाला अनुभव साबित होते हैं।
यूपी के अन्य 5 प्राकृतिक स्थल जो जंगल, तीर्थ और मंदिरों से दूर हैं।
1. राजदरी और देवदरी जलप्रपात (चंदौली)
वाराणसी के पास स्थित ये दोनों जुड़वां झरने विंध्य पर्वत श्रृंखला की गोद में बसे हैं। मानसून के मौसम में जब पहाड़ों से सैकड़ों फीट नीचे पानी गिरता है, तो यहाँ का नजारा किसी हिल स्टेशन जैसा लगता है। चारों तरफ हरी-भरी पहाड़ियाँ और चट्टानी रास्ते हैं, जो बिना किसी धार्मिक हस्तक्षेप के पूरी तरह से ट्रैकिंग और पिकनिक मनाने के लिए एक शुद्ध प्राकृतिक स्पॉट है।
2. कीठम झील (आगरा)
अगर आप सिर्फ पानी की विशालता और शांति को महसूस करना चाहते हैं, तो आगरा के पास स्थित यह एक मानव निर्मित लेकिन पूरी तरह प्राकृतिक रूप ले चुकी झील है। यह चारों तरफ से शांत वादियों से घिरी हुई है। यहाँ न तो कोई मंदिर का शोर है और न ही घना डरावना जंगल, बल्कि झील के किनारे बैठकर सनसेट देखना और पानी की लहरों को निहारना एक बेहद सुकून भरा अनुभव देता है।
3. चूका बीच (पीलीभीत)
यूं तो यह इलाका एक नदी क्षेत्र से जुड़ा है, लेकिन शारदा सागर बांध (Sharda Sagar Dam) के किनारे स्थित इस जगह को 'उत्तर प्रदेश का मिनी गोवा' कहा जाता है। यह एक विशाल वाटर रिज़र्वयार (जलधारा) का किनारा है जहाँ सफेद रेत फैली हुई है। यहाँ खड़े होकर देखने पर पानी का छोर नजर नहीं आता, जिससे बिल्कुल समंदर के किनारे जैसा अहसास होता है। यह पानी और शांत मैदानी प्रकृति का अद्भुत मेल है।
4. समसपुर वेटलैंड और झील (रायबरेली)
लगभग 8 वर्ग किलोमीटर में फैली यह प्राकृतिक झीलों और दलदली भूमि (wetland) की एक खूबसूरत श्रृंखला है। यदि आपको फोटोग्राफी का शौक है और आप शांत पानी के बीच प्राकृतिक वनस्पति व शांत वातावरण की तलाश में हैं, तो यह जगह एकदम मुफीद है। सर्दियों में यहाँ पानी के ऊपर तैरते हजारों जलीय पौधे और पक्षी इस जगह की खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं।
5. ओखला बर्ड सेंचुरी और यमुना नदी क्षेत्र (नोएडा)
दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर यमुना नदी के मुहाने पर स्थित यह स्थल कंक्रीट के जंगलों के बीच प्रकृति का एक अनोखा नखलिस्तान (oasis) है। यहाँ विशाल यमुना नदी का शांत फैलाव है और किनारे पर लंबी प्राकृतिक घास और वेटलैंड्स हैं। शहरी कोलाहल से दूर, नदी के ठंडे शांत पानी और शुद्ध प्राकृतिक हवा का आनंद लेने के लिए यह दिल्ली-एनसीआर के लोगों के लिए सबसे सुलभ प्राकृतिक जगह है।
