रावण सिर्फ विलेन नहीं, विरोधाभासों से भरा महाज्ञानी, 'रामायणम्' में अपने किरदार पर बोले रॉकस्टार यश
नितेश तिवारी की महत्वाकांक्षी और बहुप्रतीक्षित सिनेमाई महागाथा 'रामायणम्' को लेकर दर्शकों के बीच उत्सुकता चरम पर है। फिल्म में लंकापति रावण की भूमिका निभा रहे कन्नड़ सिनेमा के 'रॉकस्टार' यश ने हाल ही में कॉमिक-कॉन इवेंट में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने न केवल अपनी भूमिका से पर्दा उठाया, बल्कि भारतीय पौराणिक इतिहास और इस महाकाव्य के गहरे दर्शन पर भी विस्तार से बात की।
यश इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट में सिर्फ मुख्य अभिनेता के रूप में ही शामिल नहीं हैं, बल्कि वे अपने होम बैनर 'मॉनस्टर माइंड क्रिएशंस' के तहत निर्माता नमित मल्होत्रा के साथ इसके सह-निर्माता भी हैं।
मीडिया बातचीत में यश ने रामायणम् के दार्शनिक पहलुओं पर जोर देते हुए कहा कि यह कहानी अच्छाई और बुराई के बीच के शाश्वत संतुलन को दर्शाती है। उन्होंने भगवान राम और रावण के जीवन के विरोधाभास को स्पष्ट करते हुए कहा, भगवान राम का जीवन हमें सिखाता है कि एक राजा के रूप में जन्म लेने के बाद सब कुछ खो देने पर भी, कोई व्यक्ति अपने आदर्शों, संयम और कर्म के बल पर अपना खोया हुआ सम्मान और शक्ति कैसे वापस पा सकता है।
उन्होंने कहा, इसके ठीक विपरीत, रावण की शुरुआत बेहद साधारण थी। उसने अपनी मेहनत से असीम शक्ति हासिल की, लेकिन जब ज्ञान और शक्ति पर अहंकार हावी हो जाता है, तो विनाश निश्चित होता है।
रावण: ज्ञान, कला और असीमित अहंकार का संगम
रावण के चरित्र की परतों को खोलते हुए यश ने स्पष्ट किया कि उन्हें परदे पर एक पारंपरिक 'खलनायक' पेश करने में कोई रुचि नहीं है। रावण एक ऐसा पात्र था जो वेदों का प्रकांड पंडित, महान संगीतकार और कई कलाओं का ज्ञाता था।
यश के अनुसार, रावण के पास अपार शक्ति और ज्ञान था, लेकिन उसकी सबसे बड़ी त्रासदी यह रही कि वह अपनी ही शक्ति पर नियंत्रण नहीं रख सका। ज्ञान और अनियंत्रित अहंकार का यही विरोधाभास रावण को भारतीय पौराणिक इतिहास का सबसे जटिल और आकर्षक पात्र बनाता है।
अपनी व्यक्तिगत यात्रा को साझा करते हुए यश ने बताया कि रामायण से उनका नाता बहुत पुराना है। बचपन में उनके दादाजी उन्हें रामायण की कहानियां सुनाया करते थे, जिसने उनके बाल मन पर इस महाकाव्य की एक अनूठी छवि उकेरी थी।
जब उनसे इस रोल के लिए तैयारी के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य रावण को किसी नए तरीके से "री-इन्वेंट" करना नहीं है। बल्कि, उनका और निर्देशक नितेश तिवारी का ध्यान रावण की मनोस्थिति और मंशा को गहराई से समझने पर है।
यश ने कहा, एक अभिनेता के रूप में मेरे लिए यह समझना सबसे महत्वपूर्ण है कि रावण ने जो फैसले लिए, उनके पीछे उसका चिंतन और क्या कारण थे। जब आप किसी पात्र के कर्मों के पीछे की सोच को समझ लेते हैं, तभी आप उसे ईमानदारी से परदे पर जी पाते हैं।
दिवाली 2026 पर रिलीज के लिए प्रस्तावित फिल्म 'रामायणम्' भारतीय सिनेमा के इतिहास का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट मानी जा रही है। इसमें यश के साथ रणबीर कपूर (भगवान राम) और साई पल्लवी (माता सीता) मुख्य भूमिकाओं में हैं।

