नाना पाटेकर का देर रात क्यों हुआ अंतिम संस्कार? बेटे मल्हार ने बताई वजह, पिता के अधूरे कामों पर भी दिया अपडेट
भारतीय सिनेमा के दिग्गजों में शुमार और अपने दमदार अभिनय व तीखे तेवरों से लाखों दिलों पर राज करने वाले अभिनेता नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं रहे। 8 अक्टूबर की सुबह गोवा में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। देर रात पुणे स्थित उनके फार्महाउस पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई।
नाना पाटेकर के बेटे मल्हार पाटेकर ने रात करीब 11:30 बजे नम आंखों से अपने पिता को मुखाग्नि दी। नाना पाटेकर के अंतिम संस्कार के दौरान महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, कई प्रमुख राजनीतिक हस्तियों, सिनेमा जगत की दिग्गज हस्तियों और हजारों की संख्या में पहुंचे प्रशंसकों ने नम आंखों से अपने प्रिय अभिनेता को श्रद्धांजलि दी।
VIDEO | Pune: Actor Nana Patekar cremated with full state honours at his farmhouse in Donje. His son Malhar Patekar says, “…The most important thing is that a person like Nana Sahib never really leaves us. I said this for the past two days as well: a person like Nana Sahib lives on through his work…In Marathi, we call such people ajaramar, meaning immortal. That is one thing. The second thing is that he always had one thought. He used to repeat one line again and again: Lets get together in the name of humanity and work for the betterment of the world.” (Full video available on PTI Videos - https://t.co/bIyFWTfmBd)
— Press Trust of India (@PTI_News) October 8, 2026
देर रात क्यों किया गया अंतिम संस्कार?
आमतौर पर सूर्यास्त के बाद अंतिम संस्कार नहीं किया जाता, लेकिन नाना पाटेकर की अंतिम क्रियाएं गुरुवार देर रात संपन्न हुईं। अंतिम संस्कार के बाद फार्महाउस के बाहर मौजूद पत्रकारों से बातचीत करते हुए उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने इसके पीछे का कारण स्पष्ट किया।
मल्हार पाटेकर ने कहा, यह दुखद घटना सुबह-सुबह गोवा में हुई थी। उनके पार्थिव शरीर को हवाई मार्ग और सड़क मार्ग से पुणे के गांव स्थित फार्महाउस तक लाना था। हमें उम्मीद थी कि हम जल्दी पहुंच जाएंगे, लेकिन प्रक्रियाओं और यात्रा में समय लग गया। चूंकि घटना सुबह ही हो चुकी थी और काफी समय बीत चुका था, इसलिए परिवार ने और देरी न करते हुए गुरुवार रात को ही अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया।
अपने पिता के विचारों और उनके सामाजिक योगदान को याद करते हुए मल्हार भावुक नजर आए। उन्होंने कहा, नाना साहब जैसे व्यक्तित्व कभी हमें छोड़कर नहीं जाते। अपने काम के जरिए वे हमेशा अमर रहते हैं। उनकी सोच बेहद स्पष्ट और स्थिर थी। वे हमेशा एक बात दोहराते थे— 'चलो इंसानियत के नाम पर एक साथ आएं और दुनिया की बेहतरी के लिए काम करें'।'
मल्हार ने आगे बताया कि नाना पाटेकर का नाम फाउंडेशन के जरिए जल संरक्षण के क्षेत्र में जो काम शुरू हुआ था, उसे आगे भी पूरे समर्पण के साथ जारी रखा जाएगा। इसके अलावा कश्मीर में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में जो बड़े प्रोजेक्ट्स उन्होंने शुरू किए थे, उन्हें पूरा करना परिवार और संस्था की प्राथमिकता होगी। मल्हार ने कहा कि उनके पिता जाने से पहले हर किसी को उनकी जिम्मेदारी सौंपकर गए हैं।
गोवा में तबियत बिगड़ी, अस्पताल में डॉक्टरों ने की कोशिश
जानकारी के मुताबिक, गुरुवार तड़के गोवा स्थित अपने आवास पर नाना पाटेकर को अचानक सीने में बेचैनी महसूस हुई। उन्होंने तुरंत अपने एक करीबी दोस्त को फोन कर इसकी जानकारी दी। इसके बाद उन्हें आनन-फानन में गोवा के मनीपाल अस्पताल ले जाया गया।
मनीपाल अस्पताल के ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. शेखर साल्कर ने बताया कि डॉक्टरों की टीम ने करीब 45 मिनट तक उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे देश और फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई।

