बैसाखी कब है, क्या है इसका महत्व, जानिए खास 5 बातें
बैसाखी उत्तर भारत, विशेषकर पंजाब और हरियाणा का प्रमुख ऐतिहासिक और सांस्कृतिक त्योहार है। यह पर्व कृषि, धर्म और ज्योतिषीय गणनाओं का एक अनूठा संगम है। वैसाखी एक प्राचीन कृषि उत्सव है, जिसे पंजाब क्षेत्र में सभी पंजाबियों द्वारा बिना किसी धार्मिक भेदभाव के मनाया जाता है। पंजाब के लोगों, विशेषकर सिखों के लिए, वैसाखी एक अत्यन्त महत्वपूर्ण पर्व है। वैसाखी को हिन्दु सौर कैलेण्डर पर आधारित, सिख नव वर्ष के रूप में भी मनाया जाता है। इस बार यह 14 अप्रैल 2026 को मनाया जाएगा।
1. खालसा पंथ का स्थापना दिवस
सिख धर्म के लिए बैसाखी का दिन सबसे पवित्र माना जाता है। इसी दिन 1699 में दसवें गुरु, गुरु गोविंद सिंह जी ने आनंदपुर साहिब में 'खालसा पंथ' की स्थापना की थी। उन्होंने जाति-पाति के भेदभाव को खत्म कर मानवता और समानता का संदेश दिया था।
2. सौर नववर्ष और मेष संक्रांति
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, बैसाखी के दिन सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है। इसे 'मेष संक्रांति' कहा जाता है, जो भारतीय सौर नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक है। इसे देश के अलग-अलग हिस्सों में नए साल के रूप में मनाया जाता है।
3. फसलों और खुशहाली का त्योहार
किसानों के लिए बैसाखी का अर्थ है 'रबी' की फसल का पकना। अपनी मेहनत का फल देखकर किसान ईश्वर के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं। ढोल की थाप पर भांगड़ा और गिद्दा के साथ खेतों में भरपूर फसल की खुशी मनाई जाती है।
4. धार्मिक अनुष्ठान और 'नगर कीर्तन'
इस दिन श्रद्धालु गुरुद्वारों में विशेष अरदास और कीर्तन के लिए जुटते हैं। सजाई गई पालकी में गुरु ग्रंथ साहिब को नगर भ्रमण पर निकाला जाता है, जिसे 'नगर कीर्तन' कहते हैं। इसमें सिख मार्शल आर्ट 'गतका' का प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र होता है।
5. सामाजिक मिलन और पारंपरिक व्यंजन
बैसाखी मेलों, सामुदायिक लंगर और आपसी मेल-जोल का पर्व है। घरों में मक्की दी रोटी, सरसों दा साग और मीठे चावल जैसे पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं। इसे नए व्यापार या शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए अत्यंत श्रेष्ठ दिन माना जाता है।
बैसाखी केवल एक फसल उत्सव नहीं, बल्कि यह आध्यात्मिक जागृति, वीरता और सामुदायिक एकता का प्रतीक है।
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