Vishu Kani 2026: जब अप्रैल की चिलचिलाती धूप में अमलतास के पीले फूल (कन्निक्कोन्ना) लद जाते हैं, तब केरल की धरती 'विषु' के स्वागत के लिए तैयार होती है। मेष संक्रांति के दिन मनाया जाने वाला यह पर्व केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि आने वाले साल के लिए सौभाग्य की एक प्रार्थना है। चलिए जानने हैं विषु कानी पर्व को क्यों मनाया जाता है।
मलयालम कोल्लवर्षम्/कोल्लम कैलेंडर- 1201-1202
कोल्लवर्षम् (Kollavarsham) केरल का पारंपरिक सौर कैलेंडर है, जिसे आमतौर पर 'मलयालम कैलेंडर' के नाम से जाना जाता है। यह भारत के अन्य कैलेंडरों से अपनी विशिष्ट गणना पद्धति और इतिहास के कारण काफी अलग है। कोल्लवर्षम् की शुरुआत 825 ईस्वी (CE) में हुई थी। ऐतिहासिक रूप से ऐसा माना जाता है कि इसकी स्थापना केरल के राजा राजशेखर वर्मा या कोल्लम शहर के पुनरुद्धार की याद में की गई थी। चूँकि इसकी शुरुआत कोल्लम शहर से जुड़ी मानी जाती है, इसीलिए इसे 'कोल्ला वर्षम' कहा जाता है। यह एक सौर कैलेंडर (Solar Calendar) है।
इसका मतलब है कि यह सूर्य के राशियों में प्रवेश (संक्रांति) पर आधारित है। प्रत्येक महीने का नाम उस राशि पर आधारित होता है जिसमें सूर्य प्रवेश करता है (जैसे- मेष, वृषभ, मिथुन आदि के मलयालम नाम)। अगर आपको कोल्लवर्षम् का वर्तमान वर्ष जानना है, तो आपको ग्रेगोरियन कैलेंडर (अंग्रेजी साल) में से 824 या 825 साल कम करने होंगे। उदाहरण के लिए, अभी यदि 2026 चल रहा है, तो कोल्लवर्षम् के अनुसार यह लगभग 1201 वर्ष होगा। इसकी गणना पूरी तरह से केरल की भौगोलिक स्थिति और वहां के कृषि चक्र (खेती के मौसम) को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
नववर्ष 'चिंगम'
जहाँ आधिकारिक नववर्ष 'चिंगम' (अगस्त के मध्य) से शुरू होता है, वहीं केरल के लोग 'विषु' (मध्य अप्रैल) को ज्योतिषीय नव वर्ष के रूप में मनाते हैं क्योंकि इस दिन सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है। मलयालम कैलेंडर को 'कोल्ला वर्षम' कहा जाता है। इसकी शुरुआत ऐतिहासिक रूप से 825 ईस्वी (CE) में हुई थी। हालांकि चिंगम का महीना केरल वासियों के लिए बहुत खास है क्योंकि इसी महीने में राज्य का सबसे बड़ा सांस्कृतिक त्योहार ओणम मनाया जाता है। जबकि विषु से मेडम (Medam) माह प्रारंभ होता है। ज्योतिष गणना अनुसार यह भी प्राचीन नववर्ष का पहला माह है।
क्या विषु नया साल है?
अक्सर लोग इसे मलयालम नव वर्ष समझ लेते हैं, लेकिन तकनीकी रूप से मलयालम कैलेंडर का नया साल 'चिंगम' महीने से शुरू होता है। हालाँकि, मालाबार क्षेत्र के लोगों के लिए विषु एक ज्योतिषीय नव वर्ष है, जिसे पूरे राज्य में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।
उत्सव की खास रस्में
विषुक्कणी (सौभाग्य के पहले दर्शन): विषु की सबसे खूबसूरत परंपरा 'विषुक्कणी' है। मान्यता है कि नए साल की सुबह आंख खुलते ही सबसे पहले किसी अत्यंत शुभ वस्तु के दर्शन होने चाहिए। इसीलिए घर की महिलाएं रात में ही भगवान कृष्ण की प्रतिमा के सामने सोने के जेवर, फल, फूल, अनाज और दर्पण को करीने से सजाती हैं। घर के सदस्य अपनी आंखें बंद करके इस झांकी तक लाए जाते हैं ताकि उनके साल की शुरुआत दिव्यता के साथ हो।
विषुकैनीट्टम (बुजुर्गों का आशीर्वाद): इस दिन परिवार के बड़े-बुजुर्ग अपने से छोटों, सेवकों और किरायेदारों को उपहार या धन देते हैं। यह परंपरा आपसी प्रेम और उदारता का प्रतीक है।
स्वाद का अनूठा संगम: विषु साद्या
विषु का भोज यानी 'साद्या' जीवन के प्रति एक गहरा दर्शन छिपाए होता है। यहाँ की थाली में आपको नमकीन, मीठा, खट्टा और कड़वा- चारों स्वाद एक साथ मिलेंगे। यह इस बात का संदेश है कि आने वाला साल सुख और दुख, दोनों को समान रूप से स्वीकार करने का साहस दे।
वेप्पमपूरासम: नीम के फूलों से बनी एक कड़वी डिश।
मांगा पचड़ी: कच्चे आम की खट्टी-मीठी चटनी।
मलयालमी उत्सव: संक्षेप में कहें तो, विषु प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने और नई उम्मीदों के साथ आगे बढ़ने का एक सुंदर मलयालमी उत्सव है।