पुरुषोत्तम मास (अधिकमास) साक्षात भगवान विष्णु का महीना माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस महीने में की गई भक्ति का फल सामान्य महीनों की तुलना में अनंत गुना अधिक मिलता है। यदि आप इस पावन महीने में अपनी राशि, समय या रुचि के अनुसार नीचे दिए गए पाठ, मंत्र या चालीसा में से किसी एक का भी नियमित पालन करते हैं, तो आपको अपार मानसिक शांति, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होगी। यहां पुरुषोत्तम मास के लिए सबसे प्रभावशाली पाठ, मंत्र और चालीसा की सूची दी गई है:-
1. महालाभ देने वाले मुख्य 'पाठ' (Holy Texts)
यदि आपके पास समय है, तो इस महीने में नीचे दिए गए ग्रंथों या अध्यायों का पाठ अवश्य करना चाहिए:
श्रीमद्भगवद्गीता का पुरुषोत्तम योग (15वां अध्याय): इस पूरे महीने में गीता के 15वें अध्याय (जिसे पुरुषोत्तम योग कहा जाता है) का पाठ करना सबसे उत्तम माना गया है। यह जीवन के सभी संकटों को काटता है।
विष्णुसहस्रनाम स्तोत्र: भगवान विष्णु के 1000 नामों का यह पाठ घर की नकारात्मक ऊर्जा और दरिद्रता को जड़ से मिटा देता है।
श्रीमद्भागवत महापुराण या श्री रामचरितमानस: इस महीने में भागवत कथा सुनना या रामचरितमानस का नियमित पाठ करना सीधे बैकुंठ धाम की प्राप्ति कराता है।
गजेंद्र मोक्ष पाठ: यदि आप कर्ज के जाल में फंसे हैं या किसी बड़े कानूनी/स्वास्थ्य संकट से जूझ रहे हैं, तो रोज सुबह गजेंद्र मोक्ष का पाठ करें।
2. चमत्कारी और सरल 'मंत्र' (Powerful Mantras)
इस महीने में तुलसी की माला या करमाला (उंगलियों) से इन मंत्रों का जाप करें। कम से कम 1 माला (108 बार) रोज जपें:
पुरुषोत्तम मास का मूल मंत्र:- गोवर्धनधरं वन्दे गोपालं गोपरूपिणम्। गोकुलोत्सवमीशानं गोविन्दं गोपिकाप्रियम्॥
महामंत्र (इच्छा पूर्ति के लिए): ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
हरे कृष्ण महामंत्र (कलयुग के पापों से मुक्ति के लिए): हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे॥
विष्णु गायत्री मंत्र (बुद्धि और ऐश्वर्य के लिए): ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात।
3. फलदायी 'चालीसा' (Devotional Hymns)
जो लोग बहुत लंबे पाठ या कठिन मंत्रों का उच्चारण नहीं कर सकते, उनके लिए चालीसा का पाठ सबसे सरल और सर्वोत्तम माध्यम है:
श्री विष्णु चालीसा: इसका नियमित पाठ करने से जीवन में सुख, समृद्धि और वैभव आता है।
श्री कृष्ण चालीसा: संतान सुख, मानसिक शांति और भक्ति की प्राप्ति के लिए इसका पाठ करें।
श्री राम चालीसा: पारिवारिक कलह को दूर करने और जीवन में मर्यादा व अनुशासन लाने के लिए यह बेहद प्रभावी है।
श्री महालक्ष्मी चालीसा: चूंकि लक्ष्मी जी भगवान विष्णु की अर्धांगिनी हैं, इसलिए पुरुषोत्तम मास में विष्णु जी के साथ लक्ष्मी चालीसा पढ़ने से आर्थिक तंगी हमेशा के लिए दूर हो जाती है।
पुरुषोत्तम मास का स्वर्णिम नियम (जरूर ध्यान रखें)
इस महीने में केवल पाठ या मंत्र पढ़ना ही काफी नहीं है। इसके साथ दीपदान (तुलसी जी के पास या मंदिर में दीया जलाना), पीली वस्तुओं का दान (चना दाल, पीले कपड़े, केले या आम) और सात्विक जीवन (क्रोध, झूठ और तामसिक भोजन का त्याग) अपनाने से इन पाठ और मंत्रों का असर हजार गुना तेज हो जाता है।