क्या आप जानते हैं कि हमारी काल-गणना (Calendar) सिर्फ तारीखें नहीं बदलती, बल्कि हर तीन साल में हमें आध्यात्मिक रूप से रिचार्ज होने का एक जादुई मौका देती है? जी हाँ, इसे ही हम 'अधिकमास' या 'पुरुषोत्तम मास' कहते हैं। इस साल यह अनूठा और पवित्र कालखंड 17 मई से 15 जून 2026 तक रहने वाला है। आइए जानते हैं इस महीने के पीछे का अनोखा विज्ञान, इसकी दिलचस्प कहानी और उन 33 दिव्य शक्तियों के बारे में, जो आपके पूरे साल को खुशियों से भर सकती हैं।
क्यों आता है यह अतिरिक्त महीना? (समय का संतुलन)
यह कोई अंधविश्वास नहीं, बल्कि शुद्ध खगोल विज्ञान है। दरअसल, सूर्य और चंद्रमा की चाल में हर साल 11 दिनों का अंतर आ जाता है। अगर इस अंतर को ऐसे ही छोड़ दिया जाए, तो हमारे मौसम और त्योहारों का संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाएगा। इसी गैप को भरने के लिए प्रकृति हर तीसरे साल में एक अतिरिक्त महीना जोड़ देती है, जिसे हम अधिकमास कहते हैं। इस तरह 12 महीनों का साल, इस बार 13 महीनों का महावर्ष बन जाता है।
जब 'मलमास' बना 'पुरुषोत्तम मास'
एक बेहद दिलचस्प पौराणिक कथा है कि शुरुआत में इस अतिरिक्त महीने का कोई स्वामी (भगवान) नहीं था, इसलिए इसे लोग 'मलमास' कहकर इसकी उपेक्षा करते थे। तब इस महीने ने भगवान विष्णु की शरण ली। श्रीहरि ने दया भाव दिखाते हुए न केवल इसे अपना सबसे प्रिय नाम 'पुरुषोत्तम' दिया, बल्कि इसके अधिपति देवता भी बन गए। यही वजह है कि इस पूरे महीने में भगवान विष्णु के 'नृसिंह अवतार', श्री राम कथा और श्रीमद्भगवद्गीता के पाठ का माहौल चारों तरफ गूंजने लगता है।
श्रीहरि के वे 33 रूप, जो चमकाएंगे आपकी किस्मत
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस विशेष महीने के हर दिन भगवान विष्णु के 33 अलग-अलग स्वरूपों की आराधना की जाती है। माना जाता है कि इन नामों के सुमिरन मात्र से जीवन के सारे संकट दूर हो जाते हैं। ये दिव्य नाम हैं:
विष्णु, जिष्णु, महाविष्णु, हरि, कृष्ण, अधोक्षज, केशव, माधव, राम, अच्युत, पुरुषोत्तम, गोविंद, वामन, श्रीश, श्रीकांत, नारायण, मधुरिपु, अनिरुद्ध, त्रिविक्रम, वासुदेव, जगतयोनि, अनंत, विश्वाक्षिभूणम्, शेषशायी, संकर्षण, प्रद्युम्न, दैत्यारि, विश्वतोमुख, जनार्दन, धरावास, दामोदर, अघार्दन और श्रीपति।
स्वयं भगवान नृसिंह का वरदान: "कोई गरीब नहीं रहेगा"
शास्त्रों में साफ़ लिखा है कि स्वयं भगवान नृसिंह ने इस महीने को वरदान देते हुए कहा था— "अब से मैं इस मास का स्वामी हूँ और इसके नाम से सारा संसार पवित्र होगा। इस महीने में जो भी भक्ति, जप, तप और दान के जरिए मुझे प्रसन्न करेगा, दरिद्रता कभी उसके दरवाजे पर दस्तक नहीं देगी। उसकी हर मनोकामना पूरी होगी।"
चलते-चलते...
अधिकमास का यह समय किसी उत्सव से कम नहीं है। यह भागदौड़ भरी जिंदगी से थोड़ा ठहरकर, खुद को भीतर से शुद्ध करने और पुण्य कमाने का 'बोनस टाइम' है। तो इस बार 17 मई से शुरू हो रहे इस पावन महीने में जप, तप और दान का हाथ थामिए, और अपने पूरे साल को सकारात्मक ऊर्जा से सराबोर कर लीजिए!