Adhikamas 2026: ज्येष्ठ माह 1 मई से 29 जून 2026 तक रहेगा। इस दौरान पांच मंगलवार के चलते खप्पर योग बनेगा और इसी दौरान शनि और मंगल का संबंध भी रहेगा। भले ही संवत्सर का नाम 'रौद्र' है, लेकिन ज्येष्ठ के इन 60 दिनों में गुरु, मंगल और सूर्य की कृपा से निम्नलिखित 5 राशियों की किस्मत चमकने वाली है। इसी के साथ भारत में 3 घटनाएं घटने का प्रबल योग भी है।
ज्येष्ठ माह और 5 राशियां
1. मेष राशि (Aries)
संवत्सर के मंत्री मंगल आपकी राशि के स्वामी हैं। ज्येष्ठ माह में आपको करियर में बड़ी छलांग लगाने का मौका मिलेगा। रुके हुए धन की प्राप्ति होगी और समाज में आपका वर्चस्व बढ़ेगा। साहस और पराक्रम से आप कठिन कार्यों को भी सिद्ध कर लेंगे।
2. वृषभ राशि (Taurus)
अधिक मास के दौरान गुरु की दृष्टि आपके धन भाव पर रहेगी। व्यापार में निवेश के लिए यह सर्वोत्तम समय है। अचानक पैतृक संपत्ति से लाभ होने के योग हैं। पारिवारिक विवादों का अंत होगा और आप नया वाहन या मकान खरीदने की योजना बना सकते हैं।
3. सिंह राशि (Leo)
सिंह राशि वालों के लिए ज्येष्ठ के 60 दिन वरदान साबित होंगे। राजकीय कार्यों में सफलता मिलेगी और जो लोग राजनीति से जुड़े हैं, उन्हें बड़ा पद मिल सकता है। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी और आपकी निर्णय क्षमता आपको शत्रुओं पर विजय दिलाएगी।
4. तुला राशि (Libra)
आपके लिए यह समय प्रेम और सामंजस्य का रहेगा। यदि कोई नया व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, तो ग्रहों का साथ मिलेगा। विशेषकर विदेश से जुड़े व्यापार में बड़ा मुनाफा होने के संकेत हैं। धार्मिक यात्राओं के योग बनेंगे जो मानसिक शांति प्रदान करेंगे।
5. धनु राशि (Sagittarius)
चूंकि संवत्सर के राजा गुरु आपकी राशि के स्वामी हैं, इसलिए यह 13 माह का वर्ष आपके लिए आध्यात्मिक और आर्थिक उन्नति लाएगा। ज्येष्ठ माह में आपकी बौद्धिक क्षमता निखरेगी। विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं में अपार सफलता मिलेगी।
भारत में घट सकती हैं 3 बड़ी घटनाएं
1. भीषण गर्मी और प्राकृतिक आपदाएं (Extreme Weather):
दो ज्येष्ठ मास होने का सीधा संबंध सूर्य की तपिश से जोड़ा जाता है। ज्येष्ठ का महीना गर्मी का प्रतीक है, और इसका दोहराव भीषण लू (Heatwaves) और जल संकट की ओर इशारा करता है। मैदानी क्षेत्र में भीषण गर्मी ,समुद्री क्षेत्र में बड़े तूफान और पहाड़ी क्षेत्र में किसी बड़े भूकंप की संभावना है। उत्तर और मध्य भारत में तापमान रिकॉर्ड स्तर तक जा सकता है। इसके अलावा, मानसून के पैटर्न में भारी बदलाव के कारण कुछ क्षेत्रों में सूखा और कुछ में अचानक विनाशकारी बाढ़ (Flash Floods) की स्थिति बन सकती है।
2. राजनीतिक उथल-पुथल और सीमा पर तनाव:
ऐतिहासिक रूप से, जब भी पंचांग में महीनों का दोहराव और अगस्त के आसपास खप्पर योग या पूर्ण सूर्य ग्रहण का संयोग बनता है, तो सत्ता पक्ष के लिए चुनौतियां बढ़ती हैं। भारत के पड़ोसी देशों (विशेषकर बांग्लादेश और पाकिस्तान सीमा पर) के साथ रिश्तों में तनाव बढ़ सकता है। आंतरिक राजनीति में बड़े फेरबदल या किसी वरिष्ठ राजनेता को लेकर अशुभ समाचार मिलने की आशंका जताई जाती है। भारत में राजनीतिक अराजगकता या किसी बड़े आंदोलन के चलते सरकार के सामने कड़ी चुनौती पेश होगी। किसी बड़े नेता के निधन का योग भी बन रहा है। खप्पर योग के चलते बांग्लादेश या पाकिस्तान की ओर से भारत में किसी बड़ी आतंकवादी घटना को अंजाम दिया जा सकता है।
3. आर्थिक अस्थिरता और बाजार में मंदी:
दो ज्येष्ठ मास का पड़ना 'अन्न' और 'अर्थ' (Economy) के लिए चुनौतीपूर्ण माना जाता है। खाद्यान्न (अनाज) की कीमतों में अचानक उछाल आ सकता है। शेयर बाजार में अस्थिरता और वैश्विक स्तर पर आर्थिक मंदी का असर भारतीय बाजारों पर गहरा दिख सकता है। विशेष रूप से सोने और चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
एक दिलचस्प तथ्य: ऐसा संयोग कई वर्षों के अंतराल पर बनता है। इससे पहले जब ज्येष्ठ का महीना दो बार आया था, तब भी देश ने बड़े सामाजिक और राजनीतिक बदलाव देखे थे। हालांकि, ये ज्योतिषीय आकलन हैं, जिन्हें वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं किया जा सकता, लेकिन पंचांग के जानकार इसे "अशुभ योग" मानकर सावधानी बरतने की सलाह देते हैं।