मेष राशि पर साढ़ेसाती का प्रथम, मीन पर दूसरा और कुंभ पर अंतिम चरण, सिर्फ 3 उपाय से मिलेगा लाभ
Shani ki sade sati gochar 2026: वर्ष 2026 ज्योतिषीय गणनाओं के लिहाज से 3 राशियों पर शनि की साढ़ेसाती जारी है। ये राशियां हैं- मेष, कुंभ और मीन। तीनों राशियों को साढ़ेसाती के चरणों और कर्मों के अनुसार फल मिल रहा है। यदि आप की राशि भी शनि की साढ़ेसाती की चपेट में है तो इसका प्रभाव जानकर करें उपाय।
शनि की साढ़ेसाती की गिरफ्त में ये 3 राशियां
1. मेष राशि (प्रथम चरण लोहे का पाद):
मेष जातकों के लिए साढ़ेसाती का उदय हुआ है। नए कार्यों में विलंब और आर्थिक निवेश में सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी। इसका सीधा असर जातक की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। धन हानि या फिजूलखर्ची बढ़ सकती है।
उपाय: नित्य हनुमानजी की पूजा करें। शनिवार के दिन 8 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें और हनुमानजी को चमेली का तेल अर्पित करके गुड़ एवं चने का प्रसाद बांटें।
2. मीन राशि (मध्य चरण तांबे का पाद):
मीन राशि के लिए यह समय सबसे चुनौतीपूर्ण हो सकता है। साढ़ेसाती का दूसरा चरण 'शिखर' माना जाता है, जो मानसिक और पारिवारिक तनाव दे सकता है। यह चरण सबसे कठिन माना जाता है। इसका प्रभाव पारिवारिक और सामाजिक जीवन पर होता है। रिश्तों में दरार और मानसिक अशांति संभव है।
उपाय: बृहस्पतिवार का उपवास करें और प्रत्येक मंगलवार के दिन हनुमान जी के मंदिर में गुड़ एवं चने के प्रसाद का वितरण करें। मंगलवार और शनिवार को चमेली के तेल का दीपक जलाकर सिंदूर अर्पित करें।
3. कुंभ राशि (अंतिम चरण स्वर्ण/रजत पाद):
कुंभ जातकों के लिए यह राहत का समय होगा क्योंकि वे साढ़ेसाती के अंतिम पड़ाव में होंगे। उतार-चढ़ाव के बाद अब स्थिरता आने का समय है। यह अंतिम समय होता है। इसका मुख्य असर सेहत पर पड़ता है, लेकिन जाते-जाते शनि जातक को कर्मों का मीठा फल भी देकर जाते हैं।
उपाय: एक लोहे की कटोरी में सरसों का तेल भरें। शनिवार की सुबह उसमें अपना चेहरा देखें और फिर तेल सहित उस कटोरी को शनि मंदिर में दान कर दें।