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shivratri vrat vidhi in hindi
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शिवरात्रि पर शिव-उपासना और व्रत से क्या मिलता है फल
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मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में गोचर, 3 राशियों को रहना होगा 12 अगस्त तक सावधान
वृषभ राशि के मंगल का 24 जुलाई 2026 को रोहिणी नक्षत्र से मृगशिरा नक्षत्र में गोचर होगा, जहां वे 12 अगस्त तक रहेंगे। मंगल के इस नक्षत्र परिवर्तन के चलते 3 राशि के लोगों को 12 अगस्त तक रहना होगा सावधान। चलिए जानते हैं कि किन राशि 3 राशियों को रहना होगा सावधान।
Rationalism: सत्य की वैज्ञानिक खोज: देकार्त का बुद्धिवाद और आधुनिक दर्शन का जन्म
देकार्त के जीवन का सबसे बड़ा ध्येय यह था कि दर्शनशास्त्र को भी गणित (Mathematics) की तरह सटीक, अकाट्य और संदेह से परे बनाया जाए। वे एक ऐसा सार्वभौमिक सत्य खोजना चाहते थे, जिस पर कोई भी प्रश्नचिह्न न लगा सके। इसी विचार ने बुद्धिवाद (Rationalism) की नींव रखी। आइए, देकार्त के इस अद्भुत दार्शनिक चिंतन के 4 प्रमुख स्तंभों को गहराई से समझते हैं।
मिथुन में मार्गी बुध का प्रभाव: भारत समेत दुनिया में होंगे ये बड़े बदलाव
वृषभ राशि के मंगल का 24 जुलाई 2026 को रोहिणी नक्षत्र से मृगशिरा नक्षत्र में गोचर होगा, जहां वे 12 अगस्त तक रहेंगे। ज्योतिष की दुनिया में एक बड़ा हलचल भरा मोड़ आ चुका है- बुध ग्रह अपनी ही प्रिय राशि मिथुन में सीधे (मार्गी) चलने लगे हैं। अब जब बुद्धि और संवाद का कारक ग्रह सीधी चाल चलेगा, तो जाहिर है आपकी सोच, बातचीत और फैसलों की रफ्तार भी बदल जाएगी।
Rakhi 2026: कब है रक्षा बंधन का त्योहार, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त?
Raksha Bandhan 2026: हिन्दू पंचांग के अनुसार, रक्षा बंधन का पर्व प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। भारतीय संस्कृति में इसे मिठास और खुशियों का उत्सव माना गया है। यह भाई-बहन के प्रेम का पावन पर्व है। यहां जानें रक्षा बंधन 2026 कब है? जानें रक्षा बंधन 2026 की तारीख...
चातुर्मास में सुख-समृद्धि लाने के लिए इन 4 महीनों में राशि के अनुसार ये खास उपाय
Chaturmas Astrology Remedies: हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार चातुर्मास यह चार महीनों का पवित्र काल भगवान विष्णु के योगनिद्रा में जाने से प्रारंभ होकर देवउठनी एकादशी पर समाप्त होता है। यदि आप अपनी राशि के अनुसार चातुर्मास में कुछ विशेष उपाय करते हैं, तो जीवन में आ रही और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। यहां जानें 12 राशियों के लिए चातुर्मास के अचूक उपाय...
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Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 16 सितंबर 2026: बुधवार का पंचांग और शुभ समय
16 September 2026 Today Shubh Muhurat: क्या आप आज कोई नया काम शुरू करने की सोच रहे हैं? या कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाले हैं? ज्योतिष और पंचांग के अनुसार, किसी भी शुभ कार्य को सही मुहूर्त में करने से सफलता की संभावना बढ़ जाती है। 'वेबदुनिया' आपके लिए लेकर आया है 16 सितंबर, 2026 का विशेष पंचांग और शुभ-अशुभ मुहूर्त।
परिवर्तिनी एकादशी 2026 का व्रत कब रखा जाएगा, क्या है इसका महत्व?
Parivartini Ekadashi 2026: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी, जिसे जलझूलनी एकादशी, पद्मा एकादशी या वामन एकादशी भी कहा जाता है, हिंदू धर्म के अत्यंत पवित्र व्रतों में से एक है। यह व्रत प्रतिवर्ष भाद्रपद (भादो) मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। शास्त्रों के अनुसार, देवशयनी एकादशी से 4 महीने के लिए योगनिद्रा में गए भगवान विष्णु इस दिन अपनी करवट बदलते हैं। भगवान के शयन के दौरान करवट बदलने (परिवर्तन) के कारण ही इसे 'परिवर्तिनी एकादशी' कहा जाता है। परिवर्तिनी एकादशी इस बार 22 सितंबर, मंगलवार 2026 को मनाई जा रही है। आइए जानते हैं इसका महत्व और कथा...
Ganesh Visarjan 2026: गणपति विसर्जन की सरल विधि, जानें पूजा से लेकर विदाई तक के नियम
When is Anant Chaturdashi 2026: गणेशोत्सव के समापन पर श्री गणेश प्रतिमा का विसर्जन एक अत्यंत पवित्र और भावुक परंपरा है। यह इस बात का प्रतीक है कि बाप्पा अपने धाम कैलाश पर्वत की ओर प्रस्थान कर रहे हैं। लोकानुसार प्रतिमा का विसर्जन डेढ़, 3, 5, 7 या 10 दिन (अनंत चतुर्दशी) पर किया जाता है। इस वर्ष अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर 2026 (शुक्रवार) को है।
गणेश चतुर्थी 2026: गणपति को तीसरे दिन कौन सा भोग लगाएं, प्रसाद चढ़ाएं
इन दिनों गणेशोत्सव का समय हैं और इन दिनों भगवान गणेश को अलग-अलग भोग लगाया जाता है। वर्ष 2026 में गणेश चतुर्थी के तीसरे दिन गणपति बाप्पा को उनकी प्रिय और विशेष वस्तुओं का भोग लगाने से घर में सुख-समृद्धि आती है। वैसे तीसरे दिन नारियल के लड्डू का भोग लगाया जाता है। इसके अलावा मोदक, बेसन, बूंदी के लड्डू का भी भोग लगा सकते हैं।
बुध-शनि का समसप्तक योग: 4 राशियों के लिए शुरू होगा शुभ समय, करियर और धन में मिल सकता है बड़ा लाभ
वर्तमान में मीन राशि में शनि और कन्या राशि में बुध गोचर कर रहे हैं। दोनों के बीच समसप्तक योग का निर्माण हुआ है। ज्योतिष में बुध और शनि के बीच 180 डिग्री की दूरी का मतलब समसप्तक योग (या प्रतियुति योग) होता है। यदि बुध किसी एक राशि में है, तो शनि उससे ठीक सातवीं राशि में होगा तो यह समसप्तक योग है। यानी दोनों ग्रह एक-दूसरे को 100% (पूर्ण) दृष्टि से देख रहे होते हैं। बुध और शनि के समसप्तक योग पर आमने-सामने होने से वृषभ, कन्या, मकर और मिथुन राशि के जातकों पर विशेष रूप से शुभ और सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
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