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Last Modified: गुरुवार, 14 मई 2026 (14:27 IST)

शनि जयंती 2026: शनिदेव की कृपा प्राप्ति हेतु 6 अनिवार्य अनुष्ठान

शनि जयंती 2026
हिंदू धर्म में शनिदेव को न्याय का देवता और कर्मफल दाता माना गया है। उनकी जयंती का दिन भक्तगणों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इस दिन की गई पूजा-अर्चना से जीवन के कष्टों का निवारण होता है। 
 

तिथि और समय का महत्व:

शनि जयंती ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। उत्तर भारतीय (पूर्णिमान्त) और दक्षिण भारतीय (अमावस्यान्त) कैलेंडरों में महीनों के नाम भले ही भिन्न हों (ज्येष्ठ और वैशाख), परंतु खगोलीय गणना के अनुसार यह एक ही दिन पड़ता है। इस वर्ष भी श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से शनिदेव का जन्मोत्सव मना रहे हैं।
भगवान शनिदेव को प्रसन्न करने और कुंडली के दोषों को शांत करने के लिए निम्नलिखित 6 अनुष्ठान अत्यंत फलदायी माने गए हैं:

1. विशेष हवन और यज्ञ

शनि जयंती के पावन अवसर पर शनि शांति के लिए हवन, होम या यज्ञ करने का विधान है। विद्वान पंडितों के सानिध्य में किए जाने वाले इस यज्ञ में काले तिल, समिधा और घी की आहुतियां दी जाती हैं। माना जाता है कि अग्नि के माध्यम से दी गई आहुतियां सीधे देवता तक पहुँचती हैं, जिससे घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और सुख-समृद्धि का वास होता है।
 

2. शनि तैलाभिषेकम

शनि देव की प्रतिमा पर सरसों या तिल के तेल से अभिषेक करना इस दिन का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान है।
साढ़े साती और ढैय्या: जिन जातकों की कुंडली में शनि की साढ़े साती या ढैय्या चल रही हो, उनके लिए शनि तैलाभिषेकम रामबाण उपाय माना जाता है।
धार्मिक मान्यता: तेल के अर्पण से शनिदेव की पीड़ा शांत होती है और भक्त के जीवन में स्थिरता आती है।

3. व्रत और मंदिर दर्शन

शनि जयंती पर भक्त पूर्ण श्रद्धा के साथ उपवास (व्रत) रखते हैं। इस दिन सुबह जल्दी स्नान कर स्वच्छ वस्त्र (संभव हो तो नीले या काले) धारण किए जाते हैं। दिनभर निराहार या फलाहार रहकर शाम के समय शनि मंदिरों में जाकर दर्शन करना और शनिदेव की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित करना अत्यंत पुण्यदायी है।
 

4. मंत्र जप और पाठ

भक्ति भाव को प्रगाढ़ करने के लिए इस दिन धार्मिक ग्रंथों का पाठ किया जाता है।
पाठ: भक्त मुख्य रूप से शनि चालीसा, शनि स्तुति और शनि स्तोत्र का सामूहिक या व्यक्तिगत पाठ करते हैं।
मंत्र: शनि के बीज मंत्र “ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः” या “ॐ शं शनैश्चराय नमः” का १०८ बार जाप करने से मानसिक शांति और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।

5. शमी वृक्ष की पूजा

शास्त्रों में शमी के पेड़ को शनिदेव का साक्षात रूप माना गया है। शनि जयंती पर शमी के वृक्ष की जड़ में जल देना और शाम के समय उसके नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना बहुत शुभ होता है। ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति शमी की सेवा करता है, उसे शनिदेव कभी भी कष्ट नहीं देते।
 

6. सेवा और दान (मानवता ही पूजा है)

शनिदेव कर्म प्रधान देवता हैं, इसलिए वे केवल मंत्रों से नहीं बल्कि अच्छे कर्मों से भी प्रसन्न होते हैं।
किन्हें दान दें: दिव्यांगजनों, श्रमिकों (मजदूरों), विधवाओं, सफाई कर्मियों और गरीबों की सेवा करना साक्षात शनिदेव की सेवा के समान है।
क्या दान दें: काले कपड़े, जूते-चप्पल, छाता, उड़द की दाल और सामर्थ्य अनुसार धन का दान करने से शनिदेव की विशेष अनुकंपा प्राप्त होती है।
 
निष्कर्ष: शनि जयंती केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि अपने कर्मों के आत्म-निरीक्षण का दिन है। उपरोक्त अनुष्ठानों को यदि शुद्ध मन और सात्विक विचार के साथ किया जाए, तो जातक को जीवन के कठिन संघर्षों से मुक्ति मिलती है और शनिदेव का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम
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