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श्री शनिदेव के ये 6 मंत्र खोलेंगे किस्मत का द्वार, चुनें कोई भी एक मंत्र

शुक्रवार,दिसंबर 4, 2020
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जिस व्यक्ति पर शनि की ढैया या साढ़ेसाती हो या फिर कुंडली में शनि के अशुभ प्रभाव के कारण जो किसी रोग से पीड़ित है अगर वे इन उपायों को आजमाते हैं तो उसे शनि देव की विशेष कृपा की प्राप्ति होती है
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शनि ग्रह न्याय करने वाले हैं। शनि महाराज अच्छे कर्म करने वालों को अच्छे फल, जबकि बुरे कर्म करने वालों को दंडित करते हैं।
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शनि को काले वर्ण का होना चाहिए और उन्हें वस्त्र भी काले वर्ण के ही पहनाने चाहिए। उनके दोनों हाथों में दंड तथा अक्षमाला रहती है। उनका संपूर्ण शरीर नसों से ढंका रहता है। शनि का रथ लोहे का बना रहता है और 8 सर्प मिलकर उस रथ को चलाते हैं।
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अगर आपमें यह 22 आदतें हैं तो मान कर चलिए कि शनिदेव आपको कभी परेशान नहीं करेंगे उल्टे आप पर उनकी कृपा दृष्टि सदैव रहने वाली है। हर संकट में वे आपके साथी बनकर राह दिखाएंगे। जानिए वे आदतें कौन सी हैं...
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प्रचुर धन प्राप्ति के लिए नीचे दिए गए किसी भी एक शनि मंत्र का जाप करें। जाप संध्याकाल के समय करें-
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शनि का वृषभ राशि पर प्रभाव हो तो यह जातक मंत्रीत्व पद अथवा राजनीति में शीघ्र सफलता प्राप्त करता है। पराई स्त्रियों में आकर्षण उत्पन्न करता है। मन में कपट रखता है, अपने नजदीक रहने वालों को भी मन की बात नहीं बताता।
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भगवान शनिदेव की आज जयंती है,जानिए उनकी पूजा के खास नियम....
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आज शनि जयंती है,क्या आप जानते हैं शनिदेव के पूजन में क्या सामग्री लगती है...
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शिव पुराण के अनुसार अयोध्या के राजा दशरथ ने भी शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए 'शनि चालीसा' का पाठ किया था। अत: आप भी जीवन में परेशानियों से गुजर रहे है
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आज शनि जयंती है,आप लॉक डाउन में फंसे असहायों की सहायता करेंगे, भिखारी एवं कौड़ियों को कंबल देंगे एवं भोजन कराएंगे, तो शनिदेव सदा प्रसन्न रहेंगे....इसके अलावा ये 4उपाय भी आजमा सकते हैं...
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आज शनि जयंती ...पूजा पाठ और मंत्र से ज्यादा जरूरी है अपनी जीवनशैली में अपनाएं कुछ अच्छी बातें ताकि शनिदेव रहें प्रसन्न...। पढ़ें 10 खास काम की बातें।
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शनिदेव सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक, प्रशासनिक, विद्या, व्यापार आदि में स्थापित ऊंचाई देने का कार्य करते हैं
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एक दिन श्री शनिजी को कड़ी भूख लगी और उन्होंने मां संवर्णा के पास खाने को कुछ मांगा, किंतु संवर्णा ने कहा कि 'भगवान को भोग चढ़ाने के बाद ही मैं तुझे खाने खिलाऊंगी।' शनिजी को क्रोध आया ...
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शनि ग्रह के संबंध में ज्योतिष और खगोल विज्ञान दोनों की अलग अलग धारणाएं हैं। आओ जानते हैं कि खगोल विज्ञान क्या कहता है इस संबंध में संक्षिप्त जानकारी।
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शनिदेव गिद्ध पर सवार रहते हैं। हाथों में क्रमश: धनुष, बाण, त्रिशूल और वरमुद्रा धारण करते हैं। वे भगवान सूर्य तथा छाया (सवर्णा) के पुत्र हैं। वे क्रूर ग्रह माने जाते हैं। इनकी दृष्टि में क्रूरता का मुख्य कारण उनकी पत्नी का श्राप है।
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श्री शनिदेव की लोहा एवं पत्थरयुक्त दिखाई देने वाली, काले वर्ण वाली 5 फुट 9 इंच लंबी तथा 1 फुट 6 इंच चौड़ी मूर्ति जो आंगन में धूप, ठंडक तथा बरसात में रात-दिन खुले आकाश के नीचे है। इसके संदर्भ में स्थानीय बुजुर्गों से सुनने में मिला है कि लगभग 350 ...
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शनि देवता भी हैं और नवग्रहों में प्रमुख ग्रह भी जिन्हें ज्योतिषशास्त्र में बहुत अधिक महत्व मिला है। शनिदेव को सूर्य का पुत्र माना जाता है। मान्यता है कि ज्येष्ठ माह की अमावस्या को ही सूर्यदेव एवं छाया (संवर्णा) की संतान के रूप में शनि का जन्म हुआ।
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कुंडली का 8वां घर शनि का हेडक्वार्टर है और मृत्यु स्थान भी है। इसके उपरांत भी 8वें घर का चन्द्र आयु बढ़ाता है। ऐसा इसलिए है कि चन्द्र अर्थात माता जब शनि के घर आ गई तो शनि ने बुराई छोड़ दी। शनि के साथ और केतु के घर मे उमर बहुत लंबी होती है। मृत्यु के ...
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वैसे जो भारतभर में शनिदेव के कई पीठ है किंतु तीन ही प्राचीन और चमत्कारिक पीठ है, जिनका बहुत महत्व है। शनि शिंगणापुर (महाराष्ट्र), शनिश्चरा मन्दिर (ग्वालियर मध्यप्रदेश), सिद्ध शनिदेव (कशीवन, उत्तर प्रदेश)। इनमें से शनि शिंगणापुर को भगवान शनिदेव का ...
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