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शनि प्रदोष : व्रत कथा, नियम, आरती, मंत्र, पूजा विधि, महत्व, शुभ मुहूर्त और पारण का समय

शुक्रवार,मई 7, 2021
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शनि प्रदोष होने के कारण शनि देव का पूजन करना अवश्य ही लाभदायी रहता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भगवान शनिदेव को मनाने के ऐसे कई उपाय हैं जिनके द्वारा शनि की शांति होती है
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शनि साढ़ेसाती, ढैया अथवा शनि महादशा के दौरान शनि चालीसा, दशरथ कृत शनि स्तोत्र का पाठ अवश्य करना चाहिए। शिव पुराण के अनुसार अयोध्या के राजा दशरथ ने भी शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए 'शनि चालीसा' का पाठ किया था।
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भगवान शनि की आरती- ॐ जय जय शनि महाराज, स्वामी जय जय शनि महाराज। कृपा करो हम दीन रंक पर, दुःख हरियो प्रभु आज ॥ॐ॥
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शनि प्रदोष व्रत की कथा के अनुसार प्राचीन काल में एक नगर सेठ थे। सेठजी के घर में हर प्रकार की सुख-सुविधाएं थीं लेकिन संतान नहीं होने के कारण सेठ और सेठानी हमेशा दुःखी रहते थे।
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शनि प्रदोष व्रत के दिन उपवास करने वाले को प्रात: जल्दी उठकर नित्य कर्मों से निवृत्त होकर स्नान करके स्वच्छ धुले हुए वस्त्र धारण करके शिवजी का पूजन करना चाहिए।
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शनि प्रदोष होने के कारण शनि देव का पूजन करना अवश्य ही लाभदायी रहता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भगवान शनिदेव को मनाने के ऐसे कई उपाय हैं जिनके द्वारा शनि की शांति होती है
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शनिवार के दिन तथा शनि अमावस्या के अवसर पर इन उपायों को करने से कई गुना ज्यादा फल प्राप्त होते हैं। यहां पाठकों के लिए प्रस्तुत हैं ऐसे 11 सरल उपाय
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शास्त्रों में शनि अमावस्या बड़ा ही पवित्र दिन माना गया है। इस दिन यूं तो तेल में बनी सामग्री शनिदेव को अर्पित की जाती है लेकिन अगर आप 5 मिठाइयों का यह उपाय करें तो भी आपकी सभी समस्याएं दूर हो सकती हैं।
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हिंदू धर्मशास्त्रों में शनि अमावस्या का दिन बड़ा ही पवित्र माना गया है। अत: फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या का विशेष महत्व है। वर्ष 2021 में यह तिथि शनिवार, 13 मार्च 2021 को पड़ रही है।
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एक समय सूर्यदेव जब गर्भाधान के लिए अपनी पत्नी छाया के समीप गए तो छाया ने सूर्य के प्रचंड तेज से भयभीत होकर अपनी आंखें बंद कर ली थीं। कालांतर में छाया के गर्भ से शनिदेव का जन्म हुआ।
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साल की पहली शनि अमावस्या 13 मार्च को होगी। शनिश्चरी अमावस्या इस वर्ष 13 मार्च 2021 को मनाई जाएगी। इस दिन अमावस्या होने से शनिवार का महत्व बढ़ गया है।
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आप यह तो जानते ही होंगे कि महाराष्ट्र के एक गांव शनि शिंगणापुर में शनिदेव का सिद्ध स्थान है। यह बहुत ही चमरिक स्थान है। इसी तरह मध्यप्रदेश के ग्वालियर के पास स्थित है शनिश्चरा मन्दिर। इसके बारे में किंवदंती है कि यहां हनुमानजी के द्वारा लंका से ...
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शनिवार को काले कुत्ते, काली गाय को रोटी, काली चिंटी और काली चिड़िया को दाने डालने से जीवन की रुकावटें दूर होती है।
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ज्योतिष में इनको तीसरी सप्तम तथा दशम दृष्टि दी गई है। आइए जानिए एक नजर में शनिदेव का परिचय...
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ब्रह्मपुराण के अनुसार बाल्यकाल से ही शनिदेव भगवान श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त थे। वे भगवान श्रीकृष्ण के अनुराग में निमग्न रहा करते थे। युवावस्था में उनके पिताश्री ने उनका विवाह चित्ररथ
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Shani mantra : शनिदेव के पौराणिक मंत्र

शुक्रवार,जनवरी 22, 2021
शनि भगवान के शीश पर स्वर्ण मुकुट, गले में माला तथा शरीर पर नीले रंग के वस्त्र सुशोभित हैं। शनिदेव गिद्ध पर सवार रहते हैं। हाथों में क्रमश: धनुष, बाण, त्रिशूल और वरमुद्रा धारण करते हैं।
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जिन जातकों को शनि की साढ़ेसाती व ढैया चल रहा है, वे मानसिक शांति, सुरक्षा तथा भाग्योन्नति करना चाहते हैं तो उन्हें शनि मंत्र, शनि स्त्रोत, शनि वज्रपिंजर कवच तथा महाकाल शनि मृत्युंजय स्त्रोत
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जिस व्यक्ति पर शनि की ढैया या साढ़ेसाती हो या फिर कुंडली में शनि के अशुभ प्रभाव के कारण जो किसी रोग से पीड़ित है अगर वे इन उपायों को आजमाते हैं तो उसे शनि देव की विशेष कृपा की प्राप्ति होती है
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इस बार शनि प्रदोष व्रत 12 दिसंबर 2020 यानी कल पड़ रहा है। ऐसी मान्यता है कि शिवजी की पूजा शनि की पीड़ा से मुक्ति दिलाने वाली होती है।
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