Karla caves:2,000 साल पुरानी कार्ला गुफाओं में बड़ा रहस्य, सिंह स्तंभ के नीचे मिली गुप्त गुफा
महाराष्ट्र के लोनावला (पुणे) के पास स्थित प्रसिद्ध कार्ला गुफाओं (Karla Caves) को लेकर हाल ही में एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की टीम जब कार्ला गुफा परिसर में एक पुराने पानी के टैंक (cistern) की सफाई और वहां से अतिक्रमण हटाने का काम कर रही थी, तब उन्हें गुफा के मुख्य आकर्षण 'लायन पिलर' (Lion Pillar/सिंह स्तंभ) के बिल्कुल नीचे एक छिपी हुई गुप्त जगह (Cavity) मिली।
खतरे की बात:
इस खोखली जगह के कारण स्तंभ के नीचे की चट्टानें आपस में जुड़ी हुई नहीं थीं। मौसम के प्रभाव और पानी के रिसाव के कारण यह खोखलापन बढ़ गया था, जिससे इस 2,000 साल पुराने ऐतिहासिक स्तंभ के ढहने या उसमें दरारें आने का बड़ा खतरा पैदा हो सकता था।
ASI की तुरंत कार्रवाई:
गनीमत यह रही कि स्तंभ को कोई नुकसान पहुँचने से पहले ही पुरातत्व विभाग ने इसे ढूंढ निकाला। एएसआई (ASI) ने तुरंत कदम उठाते हुए स्तंभ के आधार को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त सपोर्ट (स्ट्रक्चरल स्टेबलाइजेशन) तैयार किया है, ताकि खंभे का वजन बराबर बंटा रहे और भविष्य में इसके गिरने का कोई खतरा न रहे।
कार्ला गुफाओं के बारे में कुछ खास बातें:
- यह भारत के सबसे बड़े और सबसे सुरक्षित बौद्ध चैत्य गृह (प्रार्थना हॉल) के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है।
- इस गुफा के ठीक बाहर एक विशाल स्तंभ है, जिसके ऊपर चार सिंह (शेर) चारों दिशाओं में मुंह किए बैठे हैं (यह काफी हद तक हमारे राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ जैसा दिखता है)। इसी स्तंभ के नीचे यह खराबी पाई गई थी।
- इस गुफा परिसर के बाहर ही प्रसिद्ध एकवीरा देवी का मंदिर भी स्थित है।
- इनका निर्माण दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व से पांचवीं शताब्दी ईस्वी के बीच मुख्यतः मौर्य और उत्तर-मौर्य काल के दौरान हुआ था।
- यह मुंबई-पुणे मार्ग पर लोनावला के पास बनघटा पहाड़ियों पर स्थित है।
- इन्हें बौद्ध भिक्षुओं द्वारा सिर्फ छेनी और हथौड़े से पहाड़ी को तराश कर बनाया गया था।
- गुफा संख्या 8 में यहाँ भारत का सबसे बड़ा, भव्य और सबसे सुरक्षित रॉक-कट चैत्यगृह (प्रार्थना हॉल) स्थित है, जो 45 मीटर लंबा और 14 मीटर चौड़ा है।
- गुफाओं का प्रवेश द्वार एक विशाल मेहराब (Arch) से सुसज्जित है। हॉल के भीतर बौद्ध देवी-देवताओं और रूपांकनों की सुंदर नक्काशीदार मूर्तियां हैं।
- इस परिसर में भिक्षुओं के रहने और ध्यान लगाने के लिए कई आवासीय कक्ष (विहार) बने हैं।
- यह लगभग 2 वर्ग किलोमीटर में फैला 16 गुफाओं का समूह है, जिसकी देखरेख भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) करता है।
बेडसे की गुफाएं:
इन गुफाओं के पास ही बेडसे की गुफाएं भी हैं। ये पहली शताब्दी ईस्वी पूर्व (ईसा पूर्व) की हैं, जिनका निर्माण सातवाहन साम्राज्य के काल में हुआ था। यह पुणे (महाराष्ट्र) के पास कार्ला और भाजा गुफाओं के समीप स्थित है। यद्यपि ये कार्ला गुफाओं की तुलना में आकार में छोटी हैं, लेकिन बेहद कलात्मक हैं। दोनों ही गुफाएं भिक्षुओं के निवास (विहार) और पूजा स्थल (चैत्य) के रूप में विकसित की गई थीं। जहाँ कार्ला गुफाएं अपने विशालकाय चैत्य हॉल के लिए विख्यात हैं, वहीं बेडसे गुफाएं अपनी अनूठी स्तंभ कला और बारीक वेदिका अलंकरण के लिए जानी जाती हैं। ये स्थल प्राचीन भारत की धार्मिक प्रथाओं, व्यापारिक मार्गों और शिल्पकला के क्रमिक विकास का जीवंत प्रमाण हैं।
Edited By: Anirudh Joshi
