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जहां शनिदेव को श्रीकृष्‍ण ने दिए थे कोयल के रूप में दर्शन

शनिवार,मार्च 6, 2021
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गजानन महाराज का प्रकटोत्सव 4 से 6 मार्च 2021 तक मनाया जा रहा है। गजानन महाराज का जन्म कब हुआ, उनके माता-पिता कौन थे, इस बारे में किसी को कुछ भी पता नहीं।
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उत्तराखंड प्रदेश में हरिद्वार अर्थात हरि का द्वार है। हरि याने भगवान विष्णु। हरिद्वार नगरी को भगवान श्रीहरि बद्रीनाथ का द्वार माना जाता है, जो गंगा के तट पर स्थित है। इसे गंगा द्वार और पुराणों में इसे मायापुरी क्षेत्र कहा जाता है। यह भारतवर्ष के सात ...
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पौराणिक संदर्भों के अनुसार शबरी जाति से भीलनी थीं और उनका नाम था श्रमणा। रामायण में प्रसंग आता है कि भगवान श्रीराम ने शबरी के झूठे बैर खाएं थे। शबरी का भक्ति साहित्य में एक विशिष्ट स्थान है। उन्होंने कई भजन लिखे हैं।
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वैसे तीर्थराज तो प्रयाग है लेकिन संपूर्ण भारत में महाकाल की नगरी उज्जैन को सब तीर्थों में श्रेष्ठ माना जाता है जिसके कई कारण है। पहला यह कि यहां जितने प्रमुख और महत्वपूर्ण स्थान है उतने किसी तीर्थ क्षेत्र में नहीं। आओ जानते हैं उन्हीं में से 10 ...
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सोमनाथ, द्वारका, डाकोरजी आदि विश्व प्रसिद्ध मंदिरों की भूमि गुजरात धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में भी लोगों की पहली पसंद बना हुआ है। हम बात कर रहे हैं गुजरात के पोइचा में स्थित नीलकंठधाम की। 2013 में बना यह भव्य मंदिर अपनी अनुपम छटा और आधुनिकता के ...
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जापान में देवी सरस्वती का मंदिर ओसाका नामक स्थान पर मंदिर है।
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प्राचीनकाल से ही किसी भी धर्म के लोग सामूहिक रूप से एक ऐसे स्थान पर प्रार्थना करते रहे हैं, जहां पूर्ण रूप से ध्यान लगा सकें, मन एकाग्र हो पाए या ईश्वर के प्रति समर्पण भाव व्यक्त किया जाए इसीलिए मंदिर निर्माण में वास्तु का बहुत ध्यान रखा जाता है। ...
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यूं तो दक्षिण और उत्तर भारत में महालक्ष्मी माता के कई मंदिर है, जिनमें से कुछ तो बहुत ही प्राचीन है। मुंबई का महालक्ष्मी मंदिर बहुत ही प्रसिद्ध है। इसी तरह महाराष्ट्र में अष्‍टलक्ष्मी और अष्टविनायक के मंदिर भी काफी प्रसिद्ध है। परंतु इस बार जानिए ...
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हिन्दू पुराणों के अनुसार सात या आठ वट या बरगद के वृक्ष ऐसे हैं जो कि हजारों वर्षों से विद्यमान है। प्रत्येक वृक्ष को किसी न किसी देवी या देवताओं ने लगाया था। इसमें से भी पांच वट को महत्वपूर्ण माना जाता है। जिसमें से पंचवट, अक्षयवट, वंशीवट, बौधवट और ...
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गायत्री मंत्र के चौबीस अक्षरों के चौबीस देवता हैं। उनकी चौबीस चैतन्य शक्तियां हैं। गायत्री मंत्र के चौबीस अक्षर 24 शक्ति बीज हैं। गायत्री मंत्र की उपासना करने से उन मंत्र शक्तियों का लाभ और सिद्धियां मिलती हैं।
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आपने बहुत तरह की परिक्रमा के नाम सुने होंगे, जैसे नर्मदा परिक्रमा, गोवर्धन परिक्रमा, ब्रज मंडल की चौरासी कोस परिक्रमा, अयोध्या पंचकोशी परिक्रमा, प्रयाग पंचकोशी, छोटा चार धाम परिक्रमा, राजिम परिक्रमा, तिरुमलै और जगन्नाथ परिक्रमा, क्षिप्रा परिक्रमा ...
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धरती के 70.8% प्रतिशत भाग पर समुद्र है जिसमें से 14% भाग पर बसा है विराट हिंद महासागर। भारत तीन ओर से समुद्र से घिरा है और जिसके 13 राज्यों की सीमा से समुद्र लगा हुआ है। निम्न प्रमुख समुद्र तटों से समुद्र को निहारना बहुत ही रोमांचक अनुभव होता है। ये ...
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धरती के 70.8% प्रतिशत भाग पर समुद्र है जिसमें से 14% भाग पर बसा है विराट हिंद महासागर। भारत तीन ओर से समुद्र से घिरा है और जिसके 13 राज्यों की सीमा से समुद्र लगा हुआ है। निम्न प्रमुख समुद्र तटों से समुद्र को निहारना बहुत ही रोमांचक अनुभव होता है। ये ...
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भगवान राम की नगरी अयोध्या हजारों महापुरुषों की कर्मभूमि रही है। यह पवित्र भूमि हिन्दुओं के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। यहां पर भगवान राम का जन्म हुआ था। यह राम जन्मभूमि है। इस राम जन्मभूमि पर एक भव्य मंदिर बना था जिसे तोड़ दिया गया था। आओ जानते हैं ...
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भारत में सैंकड़ों सरोवर हैं जिनमें से तो कुछ लुप्त हो गए हैं। 'सरोवर' का अर्थ तालाब, कुंड या ताल नहीं होता। सरोवर को आप झील कह सकते हैं। श्री नगर, जम्मू, नैनीताल, जयपुर, उदयपुर और भोपाल आदि जगहो पर आपने झीलें देखी होगी।
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जगद्‍गुरु शंकराचार्य सहित कई साधु-संत पुण्य नगरी अवंतिका (वर्तमान में उज्जैन) जाने से पहले अपने अखाड़े के साथ इसी मंदिर के परिसर में रुका करते थे।
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दादाजी धूनीवाले का अपने भक्तों के बीच वही स्थान है जैसा कि शिर्डी के साईं बाबा का। उनका समाधि स्थल खंडवा शहर में है।
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देशभर में कई जगहों पर पाताल भैरव नाम से कई मंदिर है। उन्हीं मंदिरों में से खास 5 पाताल भैरव या भैरवी के मंदिर के बारे में जानिए रोचक जानकारी। हालांकि देश में और भी कई मंदिर हो सकते हैं परंतु उक्त मंदिरों की प्रसिद्धि ज्यादा है।
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जम्मू, कश्मीर और लद्दाख दरअसल तीन अलग-अलग क्षेत्र हैं। तीनों ही के कुछ भाग पाकिस्तान ने अपने कब्जे में ले रखे हैं। जम्मू संभाग का क्षे‍त्रफल पीर पंजाल की पहाड़ी रेंज में खत्म हो जाता है। इस पहाड़ी के दूसरी ओर कश्मीर है। अनुमानित रूप से कश्मीर का ...
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