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Last Modified: सोमवार, 22 दिसंबर 2025 (06:36 IST)

मां तुलसी की भक्ति से मोक्ष संभव : प्रो. रावत

तुलसी नगर भ्रमण के पोस्टर का विमोचन

Rajasthan News
विराज फाउंडेशन के तत्वावधान में दिनांक 25 दिसंबर को सीताराम मंदिर, गढ़ परिसर से आयोजित होने वाले तुलसी नगर भ्रमण कार्यक्रम के पोस्टर का विमोचन प्रोफेसर डॉ. रमेश कुमार रावत, कुल सचिव, सिक्किम प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, गंगटोक (सिक्किम) द्वारा किया गया।
 
इस अवसर पर प्रदेशाध्यक्ष भुवनेश तिवाड़ी, प्रदेश संरक्षक डॉ. ओम प्रकाश शर्मा, प्रदेश महासचिव बनवारी लाल शर्मा, जिला मंत्री ओमप्रकाश रीडर, चोमू विधानसभा अध्यक्ष राधेश्याम शर्मा, पं. मनोज शर्मा, पं. विनोद शर्मा सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। सभी ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसे समाज में धार्मिक चेतना एवं सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।
 
विराज फाउंडेशन के प्रदेश अध्यक्ष भुवनेश तिवाड़ी ने जानकारी देते हुए बताया कि तुलसी नगर भ्रमण के दौरान लगभग एक हजार महिलाएँ तुलसी माता के गमलों के साथ चोमू नगर में भ्रमण करेंगी और तुलसी माता की महिमा से जन-जन को अवगत कराते हुए जनचेतना का प्रसार करेंगी। साथ ही युवाओं एवं नई पीढ़ी को भी माता तुलसी के महत्व से जोड़ा जाएगा। उन्होंने बताया कि तुलसी नगर भ्रमण के पश्चात तुलसी मंजरी–शालिग्राम सहस्र पूजन का कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा।
 
इस अवसर पर प्रोफेसर डॉ. रमेश कुमार रावत ने अपने उद्बोधन में कहा कि मनुष्य के जन्म से लेकर मृत्यु तक के सोलह संस्कार माता तुलसी के बिना पूर्ण नहीं माने जाते। सनातन संस्कृति में व्यक्ति की दिनचर्या प्रातः मंदिर में तुलसी युक्त चरणामृत के सेवन तथा प्रातः एवं सायंकाल माता तुलसी के समीप दीप प्रज्वलन से प्रारंभ होती है। बिना तुलसी के भगवान भी भोग स्वीकार नहीं करते।
 
उन्होंने बताया कि विभिन्न धार्मिक पुराणों में माता तुलसी से संबंधित कथाओं, उनके दैनिक जीवन में महत्व तथा भगवान शालिग्राम के साथ माता तुलसी की विधिवत पूजा-अर्चना का विस्तृत वर्णन मिलता है। जो भक्त प्रतिदिन श्रद्धा-भाव से माता तुलसी की पूजा करता है और उन्हें भगवान शालिग्राम से कभी अलग नहीं करता, उसका गृहस्थ जीवन सफल हो जाता है।
 
प्रो. रावत ने कहा कि प्रत्येक घर में माता तुलसी का पौधा एवं भगवान शालिग्राम की प्रतिमा होनी चाहिए। जिस घर में प्रतिदिन तुलसी एवं शालिग्राम की पूजा होती है, वहाँ वास्तु दोष स्वतः समाप्त हो जाते हैं, पितृदेव प्रसन्न होते हैं तथा नवग्रह भी अनुकूल रहते हैं। विद्यार्थियों को विद्या-अर्जन में सफलता के लिए नियमित रूप से तुलसी पूजा, तुलसी दल का सेवन तथा तुलसी युक्त चरणामृत ग्रहण करना चाहिए।
 
उन्होंने बताया कि माता तुलसी को पवित्रता के साथ घर में रखें, प्रतिदिन जल अर्पित करें, सभी बाधाओं से मुक्ति के लिए तुलसी की परिक्रमा करें तथा विशेष रूप से कार्तिक मास में 108 परिक्रमा करें। संध्या काल, रविवार एवं विशेष तिथियों पर तुलसी न तोड़ें और जल अर्पित न करें। प्रत्येक सनातनी को शिव पुराण में वर्णित शंखचूड़ एवं माता तुलसी के वृतांत का एक बार अवश्य अध्ययन करना चाहिए।
 
प्रो. रावत ने एक पौराणिक प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि जब माता सीता ने हनुमान जी को भोजन कराया और समस्त भोजन समाप्त हो गया, तब उन्होंने तुलसी पत्र पर राम नाम लिखकर हनुमान जी को परोसा, जिसे ग्रहण करते ही उनकी भूख शांत हो गई। इसी प्रकार जो व्यक्ति सच्चे मन से माता तुलसी की सेवा करता है, माता तुलसी उसकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करती हैं और उसे मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर करती हैं।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 
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