ममता बनर्जी ने X बायो में नहीं लिखा पूर्व मुख्यमंत्री, क्या हैं इसके मायने
Mamata Banerjee X Bio Controversy: तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो एवं पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी विधानसभा चुनाव में अपनी हार को पचा नहीं पा रही हैं। अभी भी उन्होंने ने अपने 'X' अकाउंट के बायो पर पूर्व मुख्यमंत्री नहीं लिखा है। दरअसल, ममता ने विधानसभा चुनाव में हार के बाद स्पष्ट शब्दों में कहा था कि वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी और न ही इस्तीफा देने लोकभवन जाएंगी। इससे एक बात तो स्पष्ट है कि वे शुभेन्दु अधिकारी को चैन से नहीं बैठने देंगी।
क्या लिखा है ममता के X बायो में?
इस्तीफे देने से इनकार
4 मई 2026 को आए नतीजों में भाजपा को 207 सीटें (बहुमत) मिलने और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 80 सीटों पर सिमट जाने के बावजूद, ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि चुनावों में धांधली हुई है और जनादेश को 'लूटा' गया है। वे नैतिक रूप से चुनाव नहीं हारी हैं, इसलिए राजभवन जाकर इस्तीफा देने का सवाल ही नहीं उठता। जब ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने की लोकतांत्रिक परंपरा को नहीं माना, तब राज्यपाल आर. एन. रवि ने संवैधानिक शक्तियों का प्रयोग किया।
संवैधानिक प्रक्रिया के तहत हटाया
7 मई 2026 को राज्यपाल ने संविधान के अनुच्छेद 174 (2) (b) के तहत पश्चिम बंगाल विधानसभा को भंग कर दिया। चूंकि पुरानी विधानसभा का कार्यकाल समाप्त हो चुका था और नई सरकार के गठन के लिए निवर्तमान मुख्यमंत्री का इस्तीफा जरूरी था, राज्यपाल ने ममता बनर्जी को पद से बर्खास्त कर दिया ताकि नई सरकार के शपथ ग्रहण का रास्ता साफ हो सके। ममता बनर्जी ने स्वेच्छा से इस्तीफा नहीं दिया; उन्हें राज्यपाल द्वारा संवैधानिक प्रक्रिया के तहत हटाया गया। ममता के व्यवहार को देखकर लग रहा है कि वह चुप बैठने वाली नहीं हैं। राज्य के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री के लिए वे मुश्किलें खड़ी करती रहेंगी।
ALSO READ: शुभेंदु अधिकारी का बड़ा दावा: भवानीपुर में ममता की हार का बदला है मेरे PA की हत्या, पोस्टमार्टम में हुआ 4 गोलियों का खुलासा
भाजपा पर परोक्ष निशाना
ममता बनर्जी ने परोक्ष रूप से एक पोस्ट में भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने एक्स पर लिखा- मैं विश्व-विख्यात परम विचारक और कवि-सम्राट, गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के चरणों में अपनी अनंत वंदना अर्पित करता हूं। हमारे लिए, रवींद्र जयंती बंगाली भाषा, संस्कृति और विरासत के पुनर्जन्म का एक भव्य उत्सव है। उनका जीवन-दर्शन हमारी दैनिक यात्रा के लिए एक शाश्वत मार्गदर्शक प्रकाश का कार्य करता है। उन्होंने हमें यह शिक्षा दी है कि—विभाजन सत्य नहीं है, एकता ही सत्य है। उग्र राष्ट्रवाद के उन्माद से ऊपर उठकर, उन्होंने संपूर्ण मानव सभ्यता को एकता का महान मंत्र प्रदान किया है।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala
लेखक के बारे में
वेबदुनिया न्यूज़ टीम
वेबदुनिया न्यूज़ डेस्क पर हमारे स्ट्रिंगर्स, विश्वसनीय स्रोतों और अनुभवी पत्रकारों द्वारा तैयार की गई ग्राउंड रिपोर्ट्स, स्पेशल रिपोर्ट्स, साक्षात्कार तथा रीयल-टाइम अपडेट्स को वरिष्ठ संपादकों द्वारा सावधानीपूर्वक जांच-परख कर प्रकाशित किया जाता है।....
और पढ़ें