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कांग्रेस के पार्षद से बंगाल के मुख्यमंत्री तक: शुभेंदु अधिकारी का राजनीतिक सफर बना मिसाल
Suvendu Adhikari CM of Bengal : 2026 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत के बाद शुभेंदु अधिकारी को पश्चिम बंगाल का मुख्यमंत्री चुना गया। कांग्रेस के पार्षद से शुरू हुआ उनका राजनीतिक सफर अब मुख्यमंत्री पद तक पहुंच चुका है। नंदीग्राम और भवानीपुर जैसी अहम सीटों पर जीत के साथ उन्होंने खुद को बंगाल की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल किया। शुभेंदु की राजनीति को आक्रामक शैली, मजबूत संगठन क्षमता और जनसंपर्क आधारित नेतृत्व के लिए जाना जाता है।
56 साल के शुभेंदु ने टीएमसी प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भवानीपुर से हराया है। वे नंदीग्राम से भी लगातार दूसरी बार चुनाव जीते। यहां से 2021 में उन्होंने ममता को हराया था। भाजपा ने विधानसभा चुनाव में 207 सीटें जीती हैं।
1995 में कांथी नगर पालिका में पार्षद के रूप में चुनकर अपने चुनावी सफर की औपचारिक शुरुआत करने वाले शुभेंदु ने पहले ममता के साथ राजनीति की। फिर ममता से लड़कर अपनी राजनीति चमकाई और अब वे बंगाल में सीएम की जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं।
शुभेंदु अधिकारी की कहानी केवल राजनीतिक पद हासिल करने की नहीं, बल्कि लगातार संघर्ष, समय के साथ बदलाव और जनता के बीच मजबूत पकड़ बनाने की कहानी भी है। उनका मुख्यमंत्री बनना पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत माना जा रहा है। शुभेंदु अधिकारी ने रबिन्द्र भारती यूनिवर्सिटी से स्नातकोत्तर की पढ़ाई की है।
शुभेंदु अधिकार पश्चिम बंगाल की राजनीति का वे चेहरा बन चुके हैं, जिन्होंने अपने लंबे राजनीतिक सफर में कई बड़े उतार-चढ़ाव देखे। कांग्रेस के एक साधारण पार्षद के रूप में राजनीति शुरू करने वाले शुभेंदु अधिकारी अब भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद तक पहुंच गए हैं। उनका यह सफर संघर्ष, रणनीतिक बदलाव और मजबूत जनाधार का उदाहरण माना जा रहा है।
राजनीतिक परिवार से संबंध
शुभेंदु अधिकारी का जन्म 15 दिसंबर 1970 को पूर्वी मेदिनीपुर जिले के कर्कुली गांव में हुआ था। उनके पिता Sisir Adhikari लंबे समय तक बंगाल की राजनीति में सक्रिय रहे। राजनीतिक माहौल में पले-बढ़े शुभेंदु ने शुरुआती दिनों से ही जनसंपर्क और संगठनात्मक राजनीति में रुचि दिखाई।
कांग्रेस से राजनीति की शुरुआत
1995 (नगर पालिका चुनाव): शुभेन्दु अधिकारी ने मात्र 25 वर्ष की उम्र में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के टिकट पर कांथी (Contai) नगर पालिका से पार्षद का चुनाव जीता था। स्थानीय राजनीति में सक्रियता और जनता के बीच मजबूत पकड़ के कारण वे जल्द ही चर्चित चेहरा बन गए। पार्षद रहने के बाद, साल 2006 में वे इसी नगर पालिका के अध्यक्ष (Chairman) भी बने।
TMC में एंट्री और तेजी से उभार
1998 में उन्होंने अपने पिता के साथ All India Trinamool Congress (TMC) का दामन थाम लिया। इसके बाद उनकी राजनीतिक यात्रा ने तेज रफ्तार पकड़ ली।
2006 में वे कांति दक्षिण विधानसभा सीट से विधायक चुने गए और राज्य की राजनीति में मजबूत पहचान बनाई। इसके बाद 2009 और 2014 में तामलुक लोकसभा सीट से सांसद बने।
ममता बनर्जी सरकार में शुभेंदु अधिकारी को परिवहन मंत्री समेत कई अहम विभागों की जिम्मेदारी मिली। सिंगूर और नंदीग्राम आंदोलन में उनकी सक्रिय भूमिका ने TMC को सत्ता तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई।
लोकसभा और विधानसभा दोनों हारे
शुभेंदु ने 2001 के विधानसभा चुनाव और 2004 के लोकसभा चुनाव लड़े, लेकिन दोनों में हार गए। अंततः उन्हें 2006 में सफलता मिली जब उन्होंने कोंटाई विधानसभा सीट जीती। 2007 में, नंदीग्राम में कृषि भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन ने उन्हें टीएमसी की अग्रणी पंक्ति में ला खड़ा किया।
BJP में शामिल होकर बदली राजनीतिक दिशा
2020-21 में बंगाल की राजनीति ने बड़ा मोड़ लिया, जब शुभेंदु अधिकारी ने TMC छोड़कर Bharatiya Janata Party का दामन थाम लिया। 2021 विधानसभा चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम सीट से ममता बनर्जी को हराकर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं। पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता बने और राज्य में बीजेपी के सबसे बड़े चेहरों में शामिल हो गए। Edited by : Sudhir Sharma
