बिना बीज के खिलते हैं रहस्यमयी फूल, जानिए हनोल के महासू देवता मंदिर की खास बातें
उत्तराखंड के हनोल में स्थित महासू देवता मंदिर में दर्शनों के लिए भक्तों का तांता लगा रहता है। यहां बिना बीज के रहस्यमयी फूल खिलते हैं। मान्यता है कि जो भी भक्त सच्ची श्रद्धा से मंदिर में कामना करता है, उसे महासू महाराज पूरी करते हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने भी देहरादून आने वाले श्रद्धालुओं से मंदिर के दर्शन करने की अपील की। ALSO READ: उत्तराखंड की गोद में बसा अद्भुत श्री सिद्ध नरसिंह मंदिर: जानिए क्यों है खास?
सीएम धामी ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, जनपद देहरादून के जनजातीय अंचल जौनसार-बावर के हनोल में स्थित महासू देवता मंदिर देवभूमि की समृद्ध लोकसंस्कृति, प्राचीन परंपराओं और गहरी आस्था का अद्भुत प्रतीक है। श्रद्धालुओं की अटूट आस्था से जुड़ा यह पावन धाम जनजातीय क्षेत्र की विशिष्ट सांस्कृतिक विरासत को अपने में समेटे हुए है। देहरादून जनपद आगमन पर आप भी इस पावन मंदिर के दर्शन अवश्य करें।
जनपद देहरादून के जनजातीय अंचल जौनसार-बावर के हनोल में स्थित महासू देवता मंदिर देवभूमि की समृद्ध लोकसंस्कृति, प्राचीन परंपराओं और गहरी आस्था का अद्भुत प्रतीक है। श्रद्धालुओं की अटूट आस्था से जुड़ा यह पावन धाम जनजातीय क्षेत्र की विशिष्ट सांस्कृतिक विरासत को अपने में समेटे हुए है।… pic.twitter.com/7ZcZhv1eG6
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) September 10, 2026
नगरास फूलों की फुलवारी
हनोल महासू देवता मंदिर परिसर में स्थित फुलवारी में नगरास के फूल खिलते हैं। इनका पूजा में बड़ा महत्व है। इस फुलवारी की एक बार खुदाई की जाती है। इसके बाद न कोई बीज बोए जाते हैं ना ही पौधे रोपे जाते हैं। इसके बावजूद नगरास उग आते हैं। कुछ समय बाद नगरास के पौधों में खूबसूरत और सुगंधित फूल खिल आते हैं। इन फूलों का देव पूजा में इस्तेमाल किया जाता है।
महासू देवता एक नहीं चार देवताओं का है सामूहिक नाम
महासू एक देवता नहीं, बल्कि 4 देवताओं का सामूहिक नाम है। यह चार भाई हैं। स्थानीय भाषा में महासू शब्द का अर्थ भगवान शिव से है। चारों महासू भाइयों में बाशिक महासू (मैंद्रथ), पवासी महासू (ठडियार), बूठिया महासू (हनोल) और चालदा महासू हैं। चालदा महासू चलायमान देवता हैं। ये सभी भगवान शिव के ही रूप माने जाते हैं।

