उज्जैन के खड़े हनुमानजी के सामने सारी तकनीकें ध्वस्त, अब IIT इंदौर बताएगा क्या है वजह, कैसे विस्थापित होगी प्रतिमा?
- जिस सड़क पर मंदिर है उसकी डिजाइन भी बदली जा सकती है
- चमत्कार या तकनीकी वजह से नहीं हट पा रहे बजरंगबली
- पूजा-पाठ से लेकर जेसीबी की ताकत सबकुछ लगा लिया, टस से मस नहीं हुए हनुमान
उज्जैन में खड़े हनुमान जी के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
— Webdunia Hindi (@WebduniaHindi) September 9, 2026
पिछले चार दिनों से प्रशासन मूर्ति को हटाने की कोशिश में जुटा है।
लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद मूर्ति एक इंच भी नहीं हिली।#ujjain #hanuman #khadehanuman #hanumanji #hanumantemple pic.twitter.com/PHjTU5qsci
अब तक इस घटना ने इंटरनेट पर सनसनी फैला दी है। बता दें कि क्रेन, हाइड्रोलिक जैक और कई उन्नत मशीनों का उपयोग करने के बावजूद प्रतिमा टस से मस नहीं हुई, जिसके बाद प्रशासन और इंजीनियरों को बैकलॉग पर जाना पड़ा। यह घटना अब पूरे शहर में चर्चा और आस्था का केंद्र बन चुकी है। इसके लिए पूजा-पाठ भी की गई। तय कार्यक्रम के अनुसार पुजारियों द्वारा मंत्रोच्चार और विशेष पूजा-अर्चना के बाद प्रतिमा की शिफ्टिंग का काम शुरू किया गया था लेकिन फिर भी प्रतिमा नहीं हटी है। प्रत्यक्षदर्शियों और इंजीनियरों के अनुसार, भारी क्षमता वाली क्रेन का उपयोग करने के बावजूद प्रतिमा अपनी जगह से 1 इंच भी नहीं हिली।
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अब क्या रास्ते हैं प्रशासन के पास : जानकारी है कि तकनीकी विफलता और उफनती जन-आस्था को देखते हुए प्रशासन ने फिलहाल प्रतिमा शिफ्टिंग का काम रोक दिया है।क्या कहते हैं स्थानीय पत्रकार : दूसरी तरफ हनुमानजी की प्रतिमा नहीं हटने के पीछे तकनीकी तर्क भी सामने आ रहे हैं। वेबदुनिया ने उज्जैन के स्थानीय पत्रकारों और कुछ नागरिकों से इस बारे में चर्चा की। चर्चा में सामने आया कि प्रतिमा के आसपास की खुदाई को लेकर सावधानी बरत रहा है। उन्होंने बताया कि मंदिर के आसपास तो खुदाई हो गई है, अब प्रतिमा को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए उसे आसपास से खोदा जा रहा है। ऐसे में हनुमानजी की प्रतिमा को कोई नुकसान न पहुंचे, मूर्ति को किसी तरह का डैमेज न हो इस बात का खासा ध्यान रखा जा रहा है।
कहीं लॉकिंग सिस्टम तो नहीं प्रतिमा में : बता दें कि यह दुर्लभ प्रतिमा मालवा के विशेष बेसाल्ट पत्थर से तैयार की गई है, जो परमार काल और राजा भोज के शासनकाल की शिल्पकला को दर्शाती है। प्रशासन पिछले करीब पांच दिनों से इस प्रतिमा को विस्थापित करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि प्रतिमा को यहां लॉकिंग सिस्टम के मुताबिक स्थापित किया गया होगा। प्राचीन काल में लोहे या अन्य आधुनिक उपकरण उपलब्ध नहीं होते थे। यही कारण है कि उस समय के इंजीनियर पत्थरों में छेद कर न केवल प्रतिमाओं, बल्कि भव्य मंदिरों का भी निर्माण कर देते थे।

