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सहारनपुर कलेक्ट्रेट में मस्जिद का मलबा हटाते ही मिला पुराना कुआं, जमीन के नीचे क्या छिपा था? सामने आया चौंकाने वाला राज

saharn pur
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित विवादित मस्जिद ढांचे के ध्वस्तीकरण के बाद जेसीबी से मलबे हटाया जा रहा है। सफाई के दौरान वहां प्राचीन ईंटों से बनी गोलाकार कुंए की संरचना दिखी दी है, जिसके बाद अब उसके निर्माण काल को लेकर सवाल उठने लगे है।
 
कलेक्ट्रेट में बनी मस्जिद जमीदोंज होने के बाद अब जमीन के नीचे से निकला पुराना कुआं सुर्खियों में आ गया है।प्रशासनिक कार्रवाई के तहत ढांचा हटाए जाने के बाद जब जेसीबी मशीनों से मलबा और मिट्टी साफ कराई जा रही थी, तभी जमीन के नीचे दबा एक गहरा गोलाकार कुआं सामने आया। कुएं की दीवारें पुरानी समय की ईंटों से बनी प्रतीत हो रही हैं। इसके सामने आने के बाद कलेक्ट्रेट परिसर की पुरानी संरचनाओं और इस स्थान के इतिहास को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं।
 
कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित विवादित ढांचे को लेकर लंबे समय से शिकायत और कानूनी प्रक्रिया चल रही थी। न्यायालयी प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रशासन ने शनिवार सुबह कड़ी सुरक्षा के साथ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई थी। परिसर के प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए और बड़ी संख्या में पुलिस बल के साथ आरएएफ को तैनात किया गया। जेसीबी और डंपर पहले ही परिसर में पहुंचा दिए गए थे। इसके बाद मशीनों से ढांचे को हटाने की कार्रवाई शुरू हुई।
 
ध्वस्तीकरण के बाद ढांचे का मलबा हटाने और जमीन को समतल करने का काम शुरू हुआ। इसी दौरान जेसीबी की खुदाई में मिट्टी और मलबे के नीचे दबा कुआं दिखाई दिया। कुआं गोलाकार है और उसकी चिनाई में इस्तेमाल ईंटें देखकर मौके पर मौजूद लोगों का ध्यान इसकी तरफ गया। कुएं की गहराई और वास्तविक संरचना की जांच चल रही है।
 
कुएं के सामने आने के बाद सबसे प्रश्न उठता है कि इसकी उम्र और निर्माण काल क्या है? क्या यह कलेक्ट्रेट परिसर के मौजूदा निर्माण से पहले का हिस्सा है? क्या कभी यह स्थान सार्वजनिक जलस्रोत के रूप में इस्तेमाल होता था? या फिर किसी पुराने निर्माण परिसर का यह अवशेष है? फिलहाल इन सवालों के जवाब ढूंढना पुरातत्व विभाग और संबंधित अभिलेखों से ढूंढा जायेगा।
 
स्थानीय स्तर पर इसे पुराना कुआं बताया जा रहा है, लेकिन इसके ऐतिहासिक होने की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। कुएं की ईंटों, चिनाई की तकनीक और संरचना की विशेषज्ञ जांच से ही इसके निर्माण काल और महत्व का वास्तविक आकलन संभव होगा।
 
मस्जिद ढांचे के ध्वस्तीकरण के बाद उसी स्थान पर जमीन के भीतर से निकली यह संरचना अब प्रशासन के लिए भी जांच का विषय बन गया है। फिलहाल मौके पर मलबा हटाने, सफाई और सुरक्षा का काम जारी है। कुएं को सुरक्षित रखते हुए यदि विशेषज्ञों से इसकी जांच कराई जाती है तो कलेक्ट्रेट परिसर के अतीत से जुड़े कई अनदेखे पहलू उजागर हो सकते है।
लेखक के बारे में
हिमा अग्रवाल
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