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Last Modified: लखनऊ , रविवार, 19 अप्रैल 2026 (15:25 IST)

जनगणना पूरी होने तक महिला आरक्षण पर चर्चा नहीं, अखिलेश यादव का बड़ा बयान

Akhilesh Yadav
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने संसद में नारी शक्ति संशोधन विधेयक पारित न होने के मामले को लेकर रविवार को सत्‍तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी पर तीखा प्रहार किया और कहा कि जब तक जनगणना पूरी नहीं हो जाती तब तक महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा नहीं की जा सकती। उन्होंने क्षमता निर्माण और सहायक बुनियादी ढांचे की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए कहा  कि महिलाओं के लिए किसी भी क्षेत्र में काम करने के लिए, विशेष सुविधाओं और सहायता प्रणालियों को सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
यहां पार्टी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस में यादव ने कहा कि सरकार के इरादों की हार और परिसीमन विधेयक को पास कराने में नाकामी का मतलब है कि सरकार लोगों की इच्छा का प्रतिनिधित्व नहीं करती और इसलिए उसे सत्ता में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। असल मायने में विपक्ष ही लोगों की इच्छा का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी की राजनीति फूट डालने पर आधारित है।
उन्होंने कहा कि भाजपा की राजनीति फूट डालने पर टिकी है। पहले वे लोगों के बीच अविश्वास पैदा करते हैं, फिर उन्हें अलग-अलग गुटों में बांटते हैं और एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा कर देते हैं और आखिर में डर का इस्तेमाल करके अपना समर्थन पक्का करते हैं। उन्होंने इस तरीके को ‘अविश्वास और डर पैदा करो’ की रणनीति करार देते हुए कहा कि यह रणनीति अब जनता के सामने बेनकाब हो चुकी है और इसका असर अब कम होता जा रहा है। महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर यादव ने सत्ताधारी पार्टी पर महिला मतदाताओं को बांटने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
 
उन्होंने कहा कि भाजपा महिलाओं के बीच फूट डालने की कोशिश कर रही है, लेकिन आज की महिलाएं जागरुक हैं और वे महंगाई, शोषण और सामाजिक दबाव जैसे मुद्दों से लड़ते हुए ऐसी राजनीति को हरा देंगी। प्रस्तावित महिला आरक्षण ढांचे की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि अगर बुनियाद ही गलत हो, तो नतीजा सही कैसे हो सकता है। जब गिनती ही गलत हो, तो आरक्षण सही कैसे हो सकता है? 
उन्होंने कहा कि पुराने जनगणना आंकड़ों पर निर्भर रहने से इस नीति की नींव ही कमजोर हो जाती है। अगर 2011 के आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाता है, तो महिला आरक्षण का पूरा आधार ही गलत हो जाता है। कुल मिलाकर, सरकार को हमारा संदेश यही था कि जब तक जनगणना पूरी नहीं हो जाती, तब तक महिला आरक्षण पर कोई चर्चा नहीं होनी चाहिए।
 
यादव ने प्रतिनिधित्व को लेकर भी चिंता जताई और कहा, "यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि दलित, पिछड़े, आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाओं को भी प्रतिनिधित्व का उचित हक मिले। उन्होंने तर्क दिया कि जनगणना के नए आंकड़ों के बिना, इस तरह के समावेश की गारंटी नहीं दी जा सकती। सपा प्रमुख ने कहा कि बिना किसी तैयारी के सिर्फ आरक्षण दे देने से यह महज एक दिखावा बनकर रह जाएगा। Edited by : Sudhir Sharma
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