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UPI ट्रांजैक्शन पर चार्ज के फैसले पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, केंद्र से मांगी सफाई

upi payment rules change
सुप्रीम कोर्ट ने 2,000 रुपये से अधिक के कमर्शियल यूपीआई ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगाने के वित्त मंत्रालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। कोर्ट ने सरकार से इस फीस या चार्ज के निर्धारण का वैधानिक और प्रशासनिक आधार स्पष्ट करने को कहा है। ALSO READ: इतने विरोध के बाद भी सरकार UPI Charge पर क्यों अड़ी है? समझिए 2000 से ऊपर MDR फीस का गणित
 

हलफनामा दाखिल करने के निर्देश

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की बेंच ने वकील अंजन दत्ता की याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि इस तरह के शुल्क लगाने के पीछे का आधार क्या है। सुनवाई के दौरान बेंच ने यह जानना चाहा कि यदि यह कोई कर (Tax) या शुल्क (Fee) नहीं है, तो इस वसूली का कानूनी प्रभाव और प्रशासनिक आधार क्या है?
 

रोक लगाने से इनकार

याचिकाकर्ता ने इस फैसले पर रोक लगाने की मांग की थी, जिसे अदालत ने फिलहाल ठुकरा दिया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। ALSO READ: UPI Payment पर नया चार्ज, किन लोगों को देना होगा MDR और किसके लिए रहेगा फ्री? सरकार ने दी पूरी जानकारी
 

96% ट्रांज़ैक्शन रहेंगे मुफ्त

सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरमन ने कोर्ट को बताया कि ये चार्ज 15 अक्टूबर से लागू होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुल ट्रांज़ैक्शन का 96% हिस्सा इस दायरे से बाहर रहेगा और उस पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। एएसजी ने साफ किया कि सरकार इन शुल्कों से एक रुपया भी नहीं ले रही है। यह पेमेंट एग्रीगेटर्स और बैंकों के बीच का सेटलमेंट शुल्क है, जो पूरे सिस्टम के रख-रखाव के लिए जरूरी है। सरकार ने दोहराया कि आम नागरिकों के बीच होने वाले सामान्य पर्सनल-टू-पर्सन यूपीआई ट्रांज़ैक्शन पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त बने रहेंगे।
 
ASG ने समझाया कि जब बैंक इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन करते हैं तो लागत आती है और क्रेडिट/डेबिट कार्ड ट्रांज़ैक्शन पर चार्ज लगते हैं, जबकि UPI पेमेंट को उन चार्जेस से छूट दी गई। हालांकि, पूरे सिस्टम को ठीक से चलाने के लिए ये चार्ज जरूरी हैं। इसके बाद जस्टिस बागची ने इनकम टैक्स एक्ट की धारा 269SU का जिक्र किया, जिसके तहत तय टर्नओवर सीमा वाले मर्चेंट्स के लिए ग्राहकों को पेमेंट का इलेक्ट्रॉनिक ज़रिया उपलब्ध कराना जरूरी है।

जस्टिस बागची ने यह जानना चाहा, 'धारा 269 ट्रांसफर की इजाजत देती है... अगर यह ट्रांसफर की इजाजत देती है तो एक करदाता से दूसरे असेसी के पास कैश जाता है... तो उस प्राप्ति की प्रकृति क्या है? UPI में इसे कौन प्राप्त करता है? हम कवरेज पर बात नहीं कर रहे हैं। हम कानूनी प्रभाव पर बात कर रहे हैं। इसका कानूनी प्रभाव किस स्रोत से आता है?
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