उज्जैन का शाही मस्जिद विवाद राष्ट्रीय सुर्खियों में, ओवैसी बोले, इबादतगाहों को बना रहे निशाना, इमरान प्रतापगढ़ी ने उठाए सवाल
मध्यप्रदेश के उज्जैन के शाही मस्जिद का मामला अब राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया है। इस विवाद को लेकर ओवैसी ने बयान दिया है, वहीं कांग्रेस के इमरान प्रतापगढ़ी ने भी उठाए सवाल उठाए हैं। मध्य प्रदेश के धार्मिक और सांस्कृतिक शहर उज्जैन में स्थित ऐतिहासिक 'शाही मस्जिद' (Shahi Masjid) को लेकर विवाद गहरा गया है।
जिला प्रशासन द्वारा मस्जिद के एक हिस्से को कथित रूप से अवैध या अतिक्रमण बताते हुए की जा रही कार्रवाई और नोटिस दिए जाने के बाद यह मामला अब राष्ट्रीय राजनीति में गरमा गया है। एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने इस पूरी कार्रवाई पर तीखे सवाल खड़े किए हैं और केंद्र व राज्य सरकार की नीयत पर सवाल उठाए हैं।
असदुद्दीन ओवैसी बोले, "इबादतगाहों को निशाना बनाया जा रहा है" : AIMIM अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी सरकार पर निशाना साधा। ओवैसी ने कहा कि वर्षों पुरानी और ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल मस्जिदों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई बिना न्यायिक प्रक्रिया के की जा रही है।
'प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991' का हवाला: उन्होंने आरोप लगाया कि 1991 के 'उपासना स्थल अधिनियम' (Places of Worship Act) का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है और देश में सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है।
इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा, इतिहास और पहचान मिटाने की साजिश : कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और शायर इमरान प्रतापगढ़ी ने भी उज्जैन शाही मस्जिद विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे एकतरफा कार्रवाई करार दिया।
प्रशासनिक दबाव का आरोप: इमरान प्रतापगढ़ी ने आरोप लगाया कि प्रशासन राजनीतिक दबाव में काम कर रहा है और वक्फ संपत्तियों तथा ऐतिहासिक अल्पसंख्यक संरचनाओं को निशाना बनाया जा रहा है।
सड़क से संसद तक लड़ाई की चेतावनी: उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय कानून और संविधान के दायरे में रहकर अपनी इबादतगाहों की हिफाजत करेगा और इस मुद्दे को संसद के पटल पर भी उठाया जाएगा।
क्या है पूरा उज्जैन शाही मस्जिद विवाद?
उज्जैन की इस प्राचीन शाही मस्जिद को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब जिला प्रशासन और स्थानीय नगर निकाय ने मस्जिद के निर्माण और आसपास के क्षेत्र के दस्तावेजों का सत्यापन शुरू किया। प्रशासन का दावा है कि मस्जिद का कुछ ढांचा नजूल/सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करके बनाया गया है।
स्थानीय मुस्लिम समुदाय का पक्ष: मस्जिद कमेटी और स्थानीय मुस्लिम समुदाय का कहना है कि यह मस्जिद कई दशकों/सदियों पुरानी वक्फ संपत्ति (Waqf Property) है। उनके पास इससे जुड़े प्रासंगिक ऐतिहासिक दस्तावेज और अभिलेख मौजूद हैं।
अदालत का रुख: विवाद बढ़ने के बाद मामले को अदालत के समक्ष ले जाने की तैयारी की जा रही है, ताकि प्रशासनिक बुलडोजर या तोड़ा-फोड़ी की कार्रवाई पर रोक लगाई जा सके।
क्षेत्र में पुलिस बल तैनात, शांति बनाए रखने की अपील: विवाद और बयानों के बाद उज्जैन प्रशासन ने एहतियात के तौर पर संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया है। जिला प्रशासन ने नागरिकों से किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न देने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है।
60 धार्मिक स्थलों में से कई को हटाया : बता दें कि सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के लिए उज्जैन के कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक 15 मीटर सड़क चौड़ीकरण का काम तेजी से चल रहा है। करीब 900 मीटर लंबे इस मार्ग पर निर्माण में बाधा बन रहे 60 धार्मिक स्थलों में से अधिकांश को हटाया जा चुका है। हालांकि शाही मस्जिद और खड़े हनुमान मंदिर के पास स्थित मजार को लेकर पिछले दिनों तनाव और विरोध की स्थिति बनी और प्रभावित हिस्से को हटाने के दौरान उज्जैन में पथराव की स्थिति बनी। पुलिस ने भीड़ को तितर बीतर करने के लिए आंसू गैस के गोल छोड़े।
असदुद्दीन ओवैसी बोले, "इबादतगाहों को निशाना बनाया जा रहा है" : AIMIM अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी सरकार पर निशाना साधा। ओवैसी ने कहा कि वर्षों पुरानी और ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल मस्जिदों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई बिना न्यायिक प्रक्रिया के की जा रही है।
'प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991' का हवाला: उन्होंने आरोप लगाया कि 1991 के 'उपासना स्थल अधिनियम' (Places of Worship Act) का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है और देश में सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है।
प्रशासनिक दबाव का आरोप: इमरान प्रतापगढ़ी ने आरोप लगाया कि प्रशासन राजनीतिक दबाव में काम कर रहा है और वक्फ संपत्तियों तथा ऐतिहासिक अल्पसंख्यक संरचनाओं को निशाना बनाया जा रहा है।
सड़क से संसद तक लड़ाई की चेतावनी: उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय कानून और संविधान के दायरे में रहकर अपनी इबादतगाहों की हिफाजत करेगा और इस मुद्दे को संसद के पटल पर भी उठाया जाएगा।
उज्जैन की इस प्राचीन शाही मस्जिद को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब जिला प्रशासन और स्थानीय नगर निकाय ने मस्जिद के निर्माण और आसपास के क्षेत्र के दस्तावेजों का सत्यापन शुरू किया। प्रशासन का दावा है कि मस्जिद का कुछ ढांचा नजूल/सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करके बनाया गया है।
स्थानीय मुस्लिम समुदाय का पक्ष: मस्जिद कमेटी और स्थानीय मुस्लिम समुदाय का कहना है कि यह मस्जिद कई दशकों/सदियों पुरानी वक्फ संपत्ति (Waqf Property) है। उनके पास इससे जुड़े प्रासंगिक ऐतिहासिक दस्तावेज और अभिलेख मौजूद हैं।
अदालत का रुख: विवाद बढ़ने के बाद मामले को अदालत के समक्ष ले जाने की तैयारी की जा रही है, ताकि प्रशासनिक बुलडोजर या तोड़ा-फोड़ी की कार्रवाई पर रोक लगाई जा सके।
60 धार्मिक स्थलों में से कई को हटाया : बता दें कि सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के लिए उज्जैन के कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक 15 मीटर सड़क चौड़ीकरण का काम तेजी से चल रहा है। करीब 900 मीटर लंबे इस मार्ग पर निर्माण में बाधा बन रहे 60 धार्मिक स्थलों में से अधिकांश को हटाया जा चुका है। हालांकि शाही मस्जिद और खड़े हनुमान मंदिर के पास स्थित मजार को लेकर पिछले दिनों तनाव और विरोध की स्थिति बनी और प्रभावित हिस्से को हटाने के दौरान उज्जैन में पथराव की स्थिति बनी। पुलिस ने भीड़ को तितर बीतर करने के लिए आंसू गैस के गोल छोड़े।

