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मैक्रों ने ट्रम्प की 'ईरान नीति' की धज्जियां उड़ाईं, युद्ध और नाटो पर फ्रांस के राष्ट्रपति का बड़ा बयान

मैक्रों की दो टूक, गंभीर नेता हर दिन बात नहीं बदलते, ट्रम्प की बदलती रणनीति से यूरोप में हताशा

Emmanuel Macron vs Donald Trump
Emmanuel Macron vs Donald Trump: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के हालिया बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भूचाल ला दिया है। मैक्रों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें एक ऐसा 'अस्थिर' नेता करार दिया है, जिसकी नीतियां न केवल ईरान के साथ युद्ध को भड़का रही हैं, बल्कि दशकों पुराने नाटो (NATO) गठबंधन की जड़ें भी खोद रही हैं। आइए समझते हैं कि आखिर पेरिस और वॉशिंगटन के बीच यह 'जुबानी जंग' क्यों छिड़ी है और इसका आम इंसान पर क्या असर होगा।

नाटो (NATO) पर संकट 

क्या अमेरिका अपने सबसे पुराने सहयोगियों का भरोसा खो रहा है?
  • होर्मुज़ जलडमरूमध्य की घेराबंदी : तेल की कीमतों में उछाल का खतरा, ब्रिटेन ने बुलाई आपातकालीन बैठक।
  • खूनी आंकड़े : युद्ध में अब तक 2900 से अधिक नागरिकों और 13 अमेरिकी सैनिकों की मौत।

"हर दिन बोलना ज़रूरी नहीं" : मैक्रों का ट्रम्प पर तंज

दक्षिण कोरिया की यात्रा के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए मैक्रों बेहद आक्रामक नज़र आए। उन्होंने ट्रम्प के उस टीवी संबोधन की आलोचना की, जिसमें युद्ध खत्म करने का कोई ठोस रोडमैप नहीं था। मैक्रों ने कहा कि जब हम गंभीर होते हैं, तो हम हर दिन वह बात नहीं कहते जो पिछले दिन कही गई बात के उलट हो। शायद इंसान को हर दिन नहीं बोलना चाहिए।
 
यूरोपीय देशों का मानना है कि ट्रम्प की 'अनप्रेडिक्टेबिलिटी' (अनिश्चितता) ईरान के खिलाफ अभियान को कमजोर कर रही है।

नाटो (NATO) : दोस्ती में दरार?

ट्रम्प लगातार नाटो देशों की आलोचना कर रहे हैं क्योंकि वे ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजराइल सैन्य अभियान में सीधे शामिल नहीं हो रहे हैं। इस पर मैक्रों ने चेतावनी दी: "यदि आप अपनी प्रतिबद्धता पर हर दिन संदेह पैदा करेंगे, तो आप गठबंधन को खोखला कर देंगे।"

होर्मुज़ की घेराबंदी: आपकी जेब पर पड़ेगा असर!

ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की घेराबंदी कर दी है। यह दुनिया का वह रास्ता है जहां से वैश्विक ऊर्जा (तेल और गैस) का बड़ा हिस्सा गुज़रता है।
  • ब्रिटेन की पहल : ब्रिटेन ने दर्जनों देशों के साथ एक वर्चुअल बैठक की, जिसमें जानबूझकर अमेरिका को शामिल नहीं किया गया।
  • सैन्य बल का उपयोग : संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव आने वाला है, जो इस जलमार्ग को खोलने के लिए सैन्य कार्रवाई की अनुमति दे सकता है।

भारत के लिए क्या है इसके मायने?

भारत के लिए यह स्थिति बेहद संवेदनशील है। ईरान से तेल की आपूर्ति बाधित होने और खाड़ी देशों में अस्थिरता का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था और वहां रह रहे लाखों भारतीयों पर पड़ सकता है। मैक्रों और ट्रम्प के बीच का यह टकराव दिखाता है कि पश्चिमी जगत अब एक सुर में नहीं बोल रहा है। क्या ट्रम्प की 'अकेले चलो' की नीति दुनिया को एक बड़े संकट में डाल देगी? मैक्रों के तेवर बताते हैं कि अब सहयोगी देश अमेरिका की हर बात आंख मूंदकर मानने को तैयार नहीं हैं।
 
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