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दान की गणना पर चंपत राय ने उठाए सवाल! आखिर किस पर साधा निशाना

Champat Rai
Champat Rai viral letter: राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक के बाद मंदिर में दान व चढ़ावे की चोरी को लेकर नित नए और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। अब इस पूरे प्रकरण में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान व चढ़ावे की चोरी के मामले में सबसे बड़ी जानकारी राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा देने वाले चंपत राय के एक कथित पत्र से सामने आई है, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
 
​इस पत्र में चंपत राय ने दान की गिनती को लेकर बनाई गई गाइडलाइंस (SoP) पर अपने हस्ताक्षर होने से साफ इनकार किया है। उन्होंने दावा किया कि डॉ. अनिल मिश्रा और बैंक ने मिलकर दान के रुपयों की गिनती के तरीके तय किए थे, जिसकी जानकारी उन्हें एक साल बाद हुई। ALSO READ: राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के बाद श्रद्धालुओं की संख्या घटी, अयोध्या की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर

​चंपत राय का तीखा सवाल

​चंपत राय के इस कथित पत्र में गणना प्रक्रिया को लेकर बेहद गंभीर बातें लिखी गई हैं। पत्र के अनुसार, 6 फरवरी 2025 को गणना प्रक्रिया के लिए जो दिशा-निर्देश (SoP) तय किए गए थे, उस पर न्यासी डॉ. अनिल मिश्र और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (अयोध्या शाखा) के मुख्य प्रबंधक गोविंद मिश्र के हस्ताक्षर हैं। इसमें लिखा है कि प्रतिलिपि महासचिव को भेजी गई, लेकिन मुझे इस पत्र की जानकारी 13 जून 2026 को अपने अकाउंट ऑफिस से हुई। मैं इस पत्र से सहमत नहीं हूं और इसे पूरी तरह अस्वीकार करता हूं। ALSO READ: कहां गई 5 करोड़ की 'सोने की रामचरितमानस'? 'महाग्रंथ' गायब होने पर अयोध्या में बवाल, केजरीवाल ने कहा- महापाप
 
​प्रक्रिया पर उठाया सवाल : चंपत राय ने पत्र में लिखा है कि अगस्त 2020 से जून 2026 तक जितने भी अनुबंध हुए, उन सभी पर केवल मेरे और दूसरे पक्ष के प्रमुख अधिकारी के हस्ताक्षर हैं। फिर गणना को लेकर बने इस दिशा-निर्देश पत्र पर मेरे हस्ताक्षर क्यों नहीं कराए गए? अगर मैं अयोध्या में नहीं था, तो मेरा इंतजार किया जाना चाहिए था।

क्या कहती है एसआईटी रिपोर्ट? 

​चढ़ावे व दान की गणना को लेकर जांच कर रही एसआईटी (SIT) ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट में ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। एसआईटी के मुताबिक, ट्रस्ट ने मंदिर परिसर की सुरक्षा के लिए निजी एजेंसी एसआईएस (SIS) से अनुबंध किया गया है। नियम के तहत गणना कक्ष के ठीक बाहर एसआईएस का एक कर्मचारी तैनात रहना चाहिए, जिसका काम पूरी गणना प्रक्रिया की निगरानी करना है, लेकिन ट्रस्ट ने इस नियम का ठीक ढंग से पालन नहीं किया। एसआईटी ने रिपोर्ट में चंपत राय का नाम सीधे तौर पर तो नहीं लिखा, लेकिन ट्रस्ट पर ही नियमों की अनदेखी करने और सुरक्षा व्यवस्था को शिथिल (कमजोर) करने का सीधा आरोप लगाया है। ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर घोटाला, करोड़ों की चोरी से लेकर इस्तीफों और गिरफ्तारियों तक की पूरी टाइमलाइन

कड़े नियमों को क्यों किया गया कमजोर?

​एसआईटी की जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ है कि दान की सुरक्षा से जुड़े नियमों को जानबूझकर बदला गया। फरवरी 2024 में ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक के बीच हुए एमओयू में स्पष्ट था कि चढ़ावे की रकम की गणना और उसे बैंक ले जाने के दौरान सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी ट्रस्ट की होगी। ट्रस्ट के पदाधिकारियों का दायित्व था कि वे एसआईएस के सुरक्षाकर्मियों के जरिए गणना कर्मियों के आने-जाने पर सघन तलाशी सुनिश्चित करवाएं। लेकिन, 6 फरवरी 2025 में ट्रस्ट और बैंक ने मिलकर तलाशी से जुड़े कड़े निर्देशों को शिथिल कर दिया।
 
​नियमित की जगह 'अचानक' तलाशी : पहले यह सहमति बनी थी कि गणना कक्ष में आने-जाने वाले हर व्यक्ति की सुरक्षाकर्मियों द्वारा गहन जांच की जाएगी। लेकिन बाद में इस नियम को बदलकर नियमित तलाशी की जगह 'अचानक (रैंडम) तलाशी' का प्रावधान जोड़ दिया गया, जिससे गड़बड़ी की आशंका बढ़ गई।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 
लेखक के बारे में
संदीप श्रीवास्तव
संदीप श्रीवास्तव करीब 25 वर्ष से ज्यादा समय से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वेबदुनिया के लिए उत्तर प्रदेश में स्ट्रिंगर के रूप में कार्य करते हैं। .... और पढ़ें