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ठप पड़ा काम, फूला सरकार का दम

लोकसभा चुनाव मध्यप्रदेश विकास योजना किसान सड़क निर्माण
भोपाल से वैभव श्रीधर
दृश्य एक : किसानों को फसल बीमा योजना के तहत दो सौ करोड़ का भुगतान चुनावी आचार संहिता के कारण अटक गया है। सवाल यह है कि यदि यह राशि 31 मार्च से पहले वितरित नहीं हुई तो यह रकम के डिपाजिट में चली जाएगी। किसानों को जो पैसा आज मिलना था उसके लिए जून तक का इतंजार करना होगा।

दृश्य दो : उदयपुरा से 13 किलोमीटर दूर 80 परिवारों के गांव मौड़ पानी की किल्लत का सामना कर रहा है। सरकार को भी यदि हफ्ता-पन्द्रह दिन में नलकूप या हैंडपंप की व्यवस्था नहीं की गई तो पेयजल का गंभीर संकट हो जाएगा लेकिन लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहा है।

दृश्य तीन : 22 हजार संविदा शिक्षक भर्ती करने पर ब्रेक लग गया है। कई जिलों में विज्ञापन जारी हो चुके हैं लेकिन आगे की प्रक्रिया रोक दी है तो कुछ जिलों में नियुक्ति आदेश तैयार होने के बावजूद नहीं दिए जा रहे।

दृश्य चार : बुरहानपुर जिले में लगने वाला स्वास्थ्य मेला स्थगित कर दिया गया। इसी तरह विभाग ने साफ-सफाई के प्रति जागरूकता फैलाने वाले प्रचार-प्रसार अभियान और स्वास्थ्य शिविर के कार्यक्रम भी रोक दिए हैं। भोपाल जिला चिकित्सालय में नवजात शिशुओं के लिए तैयार हो रही गहन चिकित्सा इकाई का निर्माण कार्य भी ठेकेदार ने भुगतान न होने की वजह से रोक दिया।

यह तो सिर्फ चार वाक्ये हैं जो आचार संहिता की वजह से प्रभावित होने वाले कामों को इंगित कर रहे हैं। इस तरह के कई और मामले हैं। चार माह में दूसरी बार आचार संहिता की पाबंदियों से मुकाबिल सरकार का दम भी अब फूलने लगा है। पानी, बिजली, सड़क, शिक्षा, वन, आबकारी, कृषि, राजस्व से लेकर संभवतः ऐसा कोई भी महकमा नहीं बचा है जो आचार संहिता की मार न झेल रहे हो। लेकिन बात तात्कालिक जरूरतों की करें तो इसमें पानी-बिजली का नंबर सबसे ऊपर है। मध्यप्रदेश का ज्यादातर हिस्सा भीषण पेयजल संकट का सामना कर रहा है।

इसके लिए नलकूप और हैंडपंप खोदने होंगे और पुरानी पाइप लाइनों को बदलना होगा। इसका मसौदा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग निर्वाचन आयोग को सौंप चुका है। लेकिन किंतु-परंतु के साथ आयोग ने प्रस्ताव विभाग को लौटा दिया है। इसी तरह के हालात बिजली को लेकर बने हुए हैं। हालांकि इसका दूसरा पहलू भी है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

यह सबको पता था कि अप्रैल-मई में लोकसभा के चुनाव होने हैं। इसके लिए आचार संहिता फरवरी के अंतिम सप्ताह या मार्च के शुरुआत में लगेगी। ऐसे में सरकार के पास जरूरी कामों को निपटाने के लिए तीन माह का समय था लेकिन इस दौरान कोई रोडमैप तैयार नहीं किया गया। इसकी वजह से समस्याएँ और गहरा गई हैं। उधर निर्वाचन कार्यालय के अधिकारियों का कहना है कि बिना वजह आचार संहिता का हौवा खड़ा किया जा रहा है। आयोग कभी ऐसे कामों पर रोक नहीं लगाता है जो व्यापक जनहित से जुड़े होते हैं।