दिल्ली के मालवीय नगर में रेस्टोरेंट की आग ने 21 लोगों की जान ले ली। इसके पहले इंदौर में आग घर में आग लगने से एक ही परिवार के 8 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। इसके अलावा देशभर में लगातार आग की घटनाएं हो रही हैं, जिनमें लोगों की मौतें हो रही हैं। इंदौर की बात करें तो यहां आग की लगातार घटनाएं हो रही हैं, लेकिन यहां का फायर सिस्टम बदहाल है। बावजूद इसके स्थानीय प्रशासन इतना लापरवाह है कि शहर में होटल, रेस्टोरेंट और बड़ी इमारतों में फायर सेफ्टी के इंतजामों की जांच नहीं कर पा रहा है।
हाल ही में शहर में करीब 10 हजार इमारतों की फायर सेफ्टी की जांच की जाना थी, लेकिन अब तक सिर्फ 452 भवनों की ही जांच हो सकी है। इंदौर में कई होटल और रेस्टोरेंट पर्याप्त फायर सेफ्टी के बगैर संचालित हो रहे हैं, कई तो संकरी गलियों में चल रहे हैं, जहां अगर दिल्ली जैसा हादसा होता है तो बड़ी संख्या में लोग हताहत हो सकते हैं। हैरान करने वाली बात तो यह है कि कई इमारतों के पास तो फायर सेफ्टी एनओसी भी नहीं है।
क्या कहते हैं अधिकारी : नगर निगम अपर आयुक्त आशीष कुमार पाठक ने बताया कि हमने 450 इमारतों को नोटिस दिया है। कई होटल, रेस्टोरेंट, और स्कूलों को सर्वलाइंस में रखा हैं, मुझे लगता है कि हमने पर्याप्त कार्रवाई की है। बाकी भी एनओसी और फायर सेफ्टी के नियम जांच रहे हैं।
इंदौर में फायर सेफ्टी पर लापरवाही
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सिर्फ 452 भवनों का निरीक्षण
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3 मंजिल से ज्यादा ऊंचाई वाली 10 हजार इमारतें
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इंदौर में 250 से 300 छोटे-बड़े होटल
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1500 से ज्यादा रेस्टोरेंट
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सिर्फ 7 होटल और 32 व्यावसायिक भवन सील
10 हजार में से सिर्फ 452 भवनों की जांच हो सकी : आग की घटनाओं के बाद नगर निगम प्रशासन ने बहुमंजिला इमारतों, होटल और रेस्टोरेंट की जांच के लिए एक विशेष अभियान की शुरुआत की थी। इस अभियान के तहत तीन मंजिल से ज्यादा ऊंचाई वाली लगभग 10 हजार इमारतों की जांच की जाना थी, लेकिन अब तक सिर्फ 452 भवनों की ही जमीनी जांच पूरी हो सकी है। हालांकि जांच के दौरान निगम ने कड़ा रुख अपनाते हुए 7 होटलों समेत कुल 32 व्यावसायिक भवनों को सील करने की कार्रवाई की, क्योंकि इन जगहों पर फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। हकीकत यह है कि शहर में कई व्यावसायिक प्रतिष्ठान और होटल आज भी बिना किसी पुख्ता सुरक्षा इंतजामों के धड़ल्ले से चल रहे हैं। इस मामले में फायर सेफ्टी अधिकारी विनोद मिश्रा का स्पष्ट कहना है कि चूंकि 50 बेड से कम क्षमता वाले होटल्स हमसे एनओसी नहीं लेते हैं, इसलिए विभाग के पास उनका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड मौजूद नहीं है
हकीकत में उड़ रही नियमों की धज्जियां : निगम की कार्रवाई में सामने आया कि कई होटलों में सुरक्षा के इंतजाम बहुत दयनीय हैं। जिसके बाद 7 होटलों को सील किया गया। गंभीर बात यह है कि इन होटलों से संबंधित आवश्यक जानकारियां भी निगम के रिकॉर्ड में व्यवस्थित तरीके से दर्ज नहीं थीं। इसका सीधा मतलब यह है कि जब तक यह सर्वे शुरू नहीं हुआ था, तब तक संबंधित प्रशासन को इस बात की जानकारी तक नहीं थी कि ये होटल किस हाल में और किन शर्तों पर चलाए जा रहे हैं। प्रशासन होटल वालों के लिए फायर एनओसी, फायर सेफ्टी समय-समय पर फायर ऑडिट करवाने की बात तो करता है, लेकिन हकीकत में कई जगह नियमों का पालन नहीं हो रहा है।
सैकड़ों होटल- रेस्टोरेंट का रिकॉर्ड नहीं : इंदौर में इस समय तकरीबन 260 से 300 से ज्यादा छोटे-बड़े होटल और 1500 से ज्यादा रेस्टोरेंट सक्रिय रूप से संचालित हो रहे हैं। इनमें से जो बड़े होटल हैं, वे नियमानुसार फायर एनओसी के लिए नगर निगम में विधिवत आवेदन करते हैं, जिसकी वजह से उनकी निगरानी करना प्रशासन के लिए काफी आसान होता है। इसके विपरीत, शहर के छोटे होटलों और लॉजिंग प्रतिष्ठानों की कुल संख्या, उनकी वास्तविक क्षमता और वहां मौजूद आपातकालीन सुरक्षा इंतजामों का कोई भी संयुक्त डेटा या समग्र रिकॉर्ड स्थानीय प्रशासन के पास उपलब्ध नहीं है।
शहर में 10 हजार से ज्यादा इमारतें : बता दें कि इंदौर में तीन मंजिल से अधिक ऊंचाई वाली इमारतों की कुल संख्या 10 हजार से भी ज्यादा है। इन इमारतों में से करीब 1 हजार भवन शहर के सबसे व्यस्त, संकरे और घनी आबादी वाले रिहायशी व व्यावसायिक इलाकों में स्थित हैं। इन घने क्षेत्रों में किसी भी आपातकालीन स्थिति या आगजनी के दौरान राहत और बचाव कार्य का संचालन हर बार मुश्किल होता है। ऊपर से फायर ब्रिगेड के पास भी आग बुझाने के पर्याप्त संसाधन नहीं है। बावजूद इसके आग की घटनाओं से कोई सबक नहीं लिया जा रहा है, पिछले 2 महीनों में निगम के भवन अधिकारियों की टीम ने केवल 452 भवनों का ही निरीक्षण किया है।
Fire Safety के क्या इंतजाम होना चाहिए?
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स्मोक और हीट डिटेक्टर्स
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मैनुअल कॉल प्वॉइंट्स (MCP)
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सेंट्रल फायर अलार्म सिस्टम
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फायर एक्सटिंग्विशर
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होस रील और वेट राइजर
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ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर सिस्टम
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इमरजेंसी एग्जिट
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फायर एक्जिट डोर
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साइनबोर्ड और इमरजेंसी लाइट
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किचन हुड सप्रेशन सिस्टम
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गैस लीक डिटेक्टर
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पानी का बैकअप और फायर पंप
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Fire No Objection Certificate (NOC)
क्या इंतजाम होना चाहिए?
1. आग की पहचान और चेतावनी (Detection & Alarm Systems)
आग लगने पर सबसे जरूरी होता है कि लोगों को तुरंत इसकी जानकारी मिले।
स्मोक और हीट डिटेक्टर्स (Smoke & Heat Detectors): किचन, कमरों, बेसमेंट और कॉरिडोर में पर्याप्त संख्या में डिटेक्टर्स होने चाहिए जो धुआं या असामान्य गर्मी भांपते ही अलर्ट हो जाएं।
मैनुअल कॉल प्वॉइंट्स (MCP): हर फ्लोर पर लाल रंग के बॉक्स (ग्लास तोड़कर दबाने वाले बटन) होने चाहिए, ताकि कोई भी व्यक्ति आग देखकर अलार्म बजा सके।
सेंट्रल फायर अलार्म सिस्टम: एक मुख्य कंट्रोल पैनल होना चाहिए जो सुरक्षाकर्मियों को तुरंत बताए कि आग किस फ्लोर या किस कमरे में लगी है।
2. आग बुझाने के उपकरण (Fire Extinguishing Systems)
शुरुआती स्टेज में आग पर काबू पाने के लिए ये उपकरण बेहद जरूरी हैं:
फायर एक्सटिंग्विशर (Fire Extinguishers): इमारत में जगह-जगह आग के प्रकार के हिसाब से (A, B, C या K टाइप) अग्निशामक सिलेंडर होने चाहिए। विशेषकर रेस्टोरेंट के किचन में 'K-Class' (कमर्शियल किचन के तेल की आग के लिए) सिलेंडर अनिवार्य है।
होस रील और वेट राइजर (Hose Reel & Wet Riser): हर मंजिल पर पानी के पाइप (Hose Reel) होने चाहिए जो सीधे पानी के बड़े टैंक और पंप से जुड़े हों।
ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर सिस्टम (Sprinklers): छतों पर लगे स्प्रिंकलर तापमान बढ़ने पर अपने आप टूट जाते हैं और पानी की बौछार करने लगते हैं। बड़ी इमारतों और होटलों के कमरों में यह बहुत जरूरी हैं।
3. सुरक्षित निकास (Evacuation & Escape Routes)
अगर आग बढ़ जाए, तो लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के इंतजाम होने चाहिए:
इमरजेंसी एग्जिट (Emergency Exits): मुख्य सीढ़ियों के अलावा अलग से फायर एग्जिट सीढ़ियां होनी चाहिए, जो बाहर खुले मैदान में खुलती हों।
फायर डोर (Fire Doors): सीढ़ियों के रास्तों पर 'फायर-रेटेड' दरवाजे होने चाहिए जो कम से कम 1 से 2 घंटे तक आग और धुएं को सीढ़ियों में आने से रोक सकें।
साइनबोर्ड और इमरजेंसी लाइट (Illuminated Signage): 'EXIT' के बोर्ड अंधेरे या धुएं में भी चमकने वाले होने चाहिए। बिजली कटने पर भी रास्ते दिखाने के लिए बैटरी से चलने वाली इमरजेंसी लाइट्स होनी चाहिए।
रास्ते खुले रखना: कॉरिडोर, सीढ़ियों और एग्जिट दरवाजों के पास कोई भी सामान (जैसे कचरा, पुराना फर्नीचर) नहीं रखा होना चाहिए।
4. किचन और डक्टिंग की विशेष सुरक्षा (For Restaurants & Hotels)
होटल और रेस्टोरेंट के किचन में आग लगने का खतरा सबसे ज्यादा होता है:
किचन हुड सप्रेशन सिस्टम (Kitchen Hood Suppression): गैस स्टोव के ऊपर लगे हुड में ऑटोमैटिक आग बुझाने का सिस्टम होना चाहिए।
गैस लीक डिटेक्टर: LPG या PNG पाइपलाइन के पास गैस लीक का पता लगाने वाले सेंसर और ऑटोमैटिक शट-ऑफ वाल्व (जो गैस सप्लाई काट दे) होने चाहिए।
चिमनी की सफाई: किचन की चिमनी और डक्ट्स में तेल-कचरा (Grease) जमा हो जाता है, जिसकी नियमित सफाई जरूरी है क्योंकि यह बहुत जल्दी आग पकड़ता है।
5. पानी का बैकअप और पंप हाउस
फायर वाटर टैंक: इमारत के अंडरग्राउंड या छत पर सिर्फ आग बुझाने के लिए आरक्षित (Reserved) पानी का बड़ा टैंक होना चाहिए।
फायर पंप: बिजली जाने की स्थिति में भी काम करने के लिए ऑटोमैटिक डीजल से चलने वाले बैकअप फायर पंप होने चाहिए।
6. ट्रेनिंग और मॉक ड्रिल (Human Readiness)
सिर्फ उपकरण लगाना काफी नहीं है, उनका चलना और लोगों को उनका इस्तेमाल आना भी जरूरी है:
फायर मॉक ड्रिल: साल में कम से कम दो बार कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों के लिए मॉक ड्रिल होनी चाहिए ताकि उन्हें पता हो कि आपातकाल में क्या करना है।
फायर सेफ्टी ऑफिसर: बड़ी इमारतों और होटलों में एक प्रशिक्षित फायर सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्ति होनी चाहिए।
फायर NOC: स्थानीय फायर ब्रिगेड विभाग से हर साल Fire No Objection Certificate (NOC) लेना और सभी सिस्टम्स का मेंटेनेंस सर्टिफिकेट रिन्यू कराना कानूनी रूप से अनिवार्य है।