इंदौर के बृजेश्वरी एनेक्स में आग में झुलसने से हुई 8 लोगों की भयावह मौत की घटना बाद इंदौर अग्निशमन (फायर ब्रिगेड) पर डेढ़ घंटे देरी से मौके पर पहुंचने के आरोप लगे हैं। वहीं, फायर ब्रिगेड का दावा है कि वो समय पर पहुंच गई थी। इन आरोपों के बीच
वेबदुनिया ने इंदौर फायर ब्रिगेड सर्विस की पड़ताल की। इंदौर फायर सर्विस में उपकरण से लेकर स्टाफ तक, कर्मचारियों की भर्ती से लेकर सेफ्टी उपकरण की उपलब्धता तक और मध्यप्रदेश में प्रस्तावित फायर एक्ट की स्थिति तक जो सच्चाई सामने आई, वो भयावह है। शहर की नगर निगम सीमा के 276 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में सिर्फ 5 स्टेशन हैं।
इंदौर फायर ब्रिगेड विभाग के पास न तो स्टाफ है और न ही आधुनिक सेफ्टी उपकरण और वाहन। जो फायर वाहन हैं वो इतने पुराने हैं कि उन्हें आरटीओ कंडम घोषित कर चुका है। वहीं, पुलिस विभाग से लेकर नगर निगम इंदौर को दिया गया अग्निशमन विभाग अब न पुलिस विभाग की जिम्मेदारी रहा और न ही इंदौर नगर निगम इसकी खबर ले रहा है। जो हालत इंदौर निगम की है, वही हाल निगम ने अग्निशमन विभाग का कर दिया है। इंदौर फायर ब्रिगेड विभाग लावारिस रह गया है। जानते हैं कैसे आग बुझाने वाला यह विभाग खुद ही लापरवाही और अनदेखी की भेंट चढ़कर जलकर खाक हो चुका है। ऐसे में वो क्या किसी घर में लगी आग बुझाएगा?
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वेबदुनिया की पड़ताल में जो हकीकत आई वो भयावह है
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40 लाख जनसंख्या वाले इंदौर में महज 5 स्टेशन
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2016 में फायर विभाग को मिला था आखिरी वाहन
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20, 22 और 24 साल पुराने वाहन और उपकरण
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आरटीओ ज्यादातर वाहनों को कंडम घोषित कर चुका है
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2010 के बाद विभाग में कोई भर्ती नहीं हुई
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कई राज्यों में है, मप्र में क्यों नहीं फायर एक्ट
सिर्फ 5 फायर स्टेशन : जानकर हैरानी होगी कि मेट्रो की तर्ज पर बढ़ते और करीब 40 लाख जनसंख्या वाले शहर इंदौर में महज 5 फायर स्टेशन सेंटर हैं। यह मोती तबेला, गांधी हॉल, लक्ष्मीबाई नगर, किला मैदान और सांवेर रोड पर स्थित हैं। जबकि शहर देवास से लेकर उज्जैन, धार से लेकर पीथमपुर तक चारों तरफ पसर चुका है। उस पर भी स्टाफ और उपकरण के लिहाज से इन सभी फायर स्टेशनों की हालत बदहाल हो चुकी है।
2016 में मिला था आखिरी वाहन : फायर सर्विस सिस्टम में वाहनों की उपलब्धता की स्थिति यह है कि विभाग को आखिरी बार साल 2016 में एक वाहन मिला था। यह वाहन भी इंदौर नगर निगम ने दिया था। इसके पहले के जितने भी फायर वाहन और अन्य वाहन हैं वो तब के हैं जब फायर ब्रिगेड पुलिस विभाग के अंतर्गत था। जब से फायर ब्रिगेड नगर निगम इंदौर के अंतर्गत आया है, तब से उसकी स्थिति दयनीय हो गई है। पुलिस विभाग के तहत समय समय पर भर्ती और ट्रेनिंग आदि प्रक्रिया चलती रहती थी।
कंडम हो गए सारे वाहन : स्थिति यह है कि इंदौर के पांचों स्टेशन पर जो वाहन हैं वो सभी आरटीओ की गाइड लाइन में कंडम हो चुके हैं। आरटीओ की गाइड लाइन है कि 15 साल से पुराना वाहन नहीं होना चाहिए। लेकिन फायर विभाग के पास वर्तमान में 20 साल, 22 और 24 साल पुराने वाहन हैं।
2010 के बाद नहीं भर्ती नहीं, आउटसोर्स कर रहे : बता दें फायर सर्विस में 2010 के बाद से एक भी कर्मचारी की भर्ती नहीं हुई है। साल 2010 में करीब 200 कर्मचारी थे। इनमें से 60 कर्मचारी रिटायर्ड हो चुके हैं। करीब 60 कर्मचारी रिटायर्ड होने की कगार पर हैं। 11 कर्मचारी तो इसी साल रिटायर हो जाएंगे। इनमें से 30 तो वाहनों के चालक ही हैं। बचे 80 कर्मचारी इंदौर, भोपाल, पीथमपुर और मालनपुर की फायर सर्विस देख रहे हैं।
जो आउट सोर्स हैं वो ट्रेंड नहीं, कैसे बुझेगी आग : इतने कम कर्मचारियों के साथ इंदौर फायर ब्रिगेड बेहद ही बदहाल स्थिति में है। ऐसे में थर्डआई नाम की कंपनी से विभाग के लिए कर्मचारी आउटसोर्स किए जाते हैं। इनमें से एक भी कर्मचारी ट्रेंड नहीं है। बृजेश्वरी कांड में भी यही बात सामने आई थी। जब ये टीम के साथ कुछ आउटसोर्स कर्मचारी पहुंचे तो वे रेस्क्यू करने से ही डर रहे थे, क्योंकि उन्हें कोई अनुभव नहीं था कि कैसे और क्या किया जाए? ये आउटसोर्स कर्मचारी पहले कहीं सिक्योरिटी गार्ड की तरह काम करते रहे हैं।
अब तक नहीं आया रोबोट : इंदौर की संकरी गलियों के लिए रोबोटिक फायर मशीन लाने की योजना थी। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने खुद प्रेजेंटेशन देखा था और एलान किया था कि इन्हें खरीदा जाएगा, लेकिन एलान से आगे बात नहीं बढ़ी। रोबोट नहीं आए। दरअसल, नवंबर 2024 में मप्र सरकार ने प्रदेशभर की अग्निशमन सेवाओं को दुरुस्त करने के लिए 400 करोड़ रुपये का एक्शन प्लान तैयार किया। इसमें 70 मीटर ऊंचाई - यानी 25 मंजिल तक आग बुझाने वाले हाइड्रालिक प्लेटफार्म खरीदने की बात है।
मध्यप्रदेश में क्यों नहीं फायर एक्ट : दरअसल, फायर ब्रिगेड सिस्टम को अत्याधुनिक और बेहतर बनाने के लिए फायर एक्ट की जरूरत होती है। फायर एक्ट लागू होने के बाद फायर सर्विस को सभी तरह के संसाधन, ट्रेनिंग, भर्ती प्रक्रिया और स्टाफ आदि मिलेंगे। महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली आदि राज्यों में फायर एक्ट लागू है, लेकिन मध्यप्रदेश में इसके कोई अते-पते नहीं है। फायर एक्ट का ड्राफ्ट बना हुआ है, लेकिन यह मध्यप्रदेश शासन स्तर पर ही अटका हुआ है। इस बारे में अधिकारियों का कहना है कि शासन स्तर पर ही कुछ हो सकता है।
इंदौर के इन इलाकों में कैसे बुझेगी आग : बता दें कि इंदौर का विस्तार अब सुपर कॉरिडोर, एमआर 10, खंडवा रोड, बायपास, राऊ, देवगुराड़िया और निपानिया जैसे कई नए क्षेत्रों तक हो चुका है। ये इलाके मौजूदा अग्नि शमन केंद्रों से 10 किलोमीटर तक दूर हैं। ऐसे में आग लगने की स्थिति में फायर ब्रिगेड की दमकलों को पहुंचने में लगने वाला रिस्पॉन्स टाइम तेजी से बढ़ रहा है। दमकलें मौके पर पहुंचे और आग बुझाएं तब तक जान और माल का काफी नुकसान हो चुका होता है।
10 नए फायर स्टेशनों की योजना: नगर निगम और इंदौर जिला प्रशासन ने इस समस्या को देखते हुए शहरी क्षेत्र में 10 नए फायर स्टेशन बनाने की योजना बनाई है। नए केंद्र राऊ, स्कीम नंबर 78, देवगुराड़िया, नए आईएसबीटी कुमेड़ी, निपानिया, कनाड़िया और पालदा में प्रस्तावित हैं। इनके अलावा कुछ उपकेंद्र भी विकसित करने की योजना है। लेकिन यह कब और कैसे होगा, इस पर अभी सवाल है।
सीधी बात
आशीष कुमार पाठक, अपर आयुक्त, नगर निगम इंदौर
सवाल : फायर वाहनों की कमी है या बहुत पुराने हैं?
जवाब : वाहनों की खरीदी के प्रपोजल भेजे गए हैं।
सवाल : शहर बढ़ रहा है फायर स्टेशन सिर्फ 5 हैं?
जवाब : 5 नए फायर स्टेशन का भी प्रपोजल भेजा है, ये जल्दी मिलेंगे। इनके साथ ही नए उपकरण, वाहन और
स्टाफ बढ़ेगा।
सवाल : लेकिन अभी स्टाफ की कमी है?
जवाब : जितना भी स्टाफ है उसमें काम चला रहे हैं
सवाल : 2010 के बाद एक भी भर्ती नहीं हुई?
जवाब : नए स्टेशन बनेंगे तो भर्ती भी होगी।
सवाल : उपकरण, सेफ्टी टूल आदि की कमी है?
जवाब : हमारे पास जरूरी संसाधन तो हैं।
सवाल : जो आउटसोर्स कर्मचारी हैं वो ट्रेंड नहीं हैं?
जवाब : यह अच्छा सुझाव है, हम उन्हें भी प्रशिक्षण दिलवाएंगे।
सवाल : बृजेश्वरी अग्निकांड में फायर सर्विस देरी से पहुंची?
जवाब : नहीं, पुलिस से हमारा कॉर्डिनेशन था, कैसे हो सकता है कि पुलिस पहले पहुंच गई और फायर बाद में।
सवाल : लेकिन रेस्क्यू ऑपरेशन सफल नहीं हो सका?
जवाब : बृजेश्वरी में मल्टीपल ईशू थे। वहां, सिलेंडर, एसी और सोलर सिस्टम थे, डिजिटज लॉक भी थे।
सवाल : कई राज्यों में फायर एक्ट है, मध्यप्रदेश में नहीं?
जवाब : फायर एक्ट प्रस्तावित है, उसका क्या स्टेटस है वो तो शासन स्तर का ही काम है, वही बता पाएंगे।
40 लाख जनसंख्या पर 5 फायर स्टेशन
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मोती तबेला
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गांधी हॉल
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लक्ष्मीबाई नगर
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किला मैदान जीएमटी मार्ग
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सांवेर रोड
फायर वाहनों की संख्या
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मोती तबेला : 6 वाहन
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गांधी हॉल : 5 वाहन, 1 खराब
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लक्ष्मीबाई नगर : 6 वाहन
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किला मैदान (जीएमटी) : 02
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सांवेर रोड : 02 फायर वाहन
इनमें से कोई उपकरण नहीं
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बीए सेट
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केमिकल सूट
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फायर एंट्री सूट
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फ्लोटिंग सूट
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अन्य सेफ्टी फीचर
5 स्टेशन का स्टॉफ
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2010 से कुल 200 कर्मचारी
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इनमें से 60 रिटायर हो चुके हैं
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60 कर्मचारी रिटायरमेंट के करीब
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इनमें से 30 तो चालक ही हैं
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80 बचे कर्मचारी देख रहे इंदौर, भोपाल, पीथमपुर, मालनपुर
स्टाफ की हकीकत
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2010 के बाद एक भी भर्ती नहीं हुई
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रिटायरमेंट के करीब पहुंचे कई कर्मचारी
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ज्यादातर उम्रदराजों को बीपी- शुगर की बीमारियां
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कई कर्मचारी आउटसोर्स किए गए
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एक भी आउटसोर्स कर्मचारी ट्रेंड नहीं
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2026 में रिटायर होंगे 11 कर्मचारी