अनंत चतुर्दशी पर निकलने वाली इंदौर की झांकियों पर 7 रोचक जानकारी
इंदौर की अनंत चतुर्दशी पर निकलने वाली झांकियां केवल धार्मिक जुलूस नहीं, बल्कि शहर की 100 साल से भी अधिक पुरानी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक हैं। गणेशोत्सव के अंतिम दिन रात भर निकलने वाले इस भव्य 'चल समारोह' को देखने के लिए इंदौर ही नहीं, बल्कि देश-विदेश से लाखों लोग जुटते हैं।
इंदौर की झांकियों से जुड़ी 7 बेहद रोचक बातें
1. शुरुआत मिल मजदूरों की देन (1923-24): इंदौर की झांकियों का इतिहास कपड़ा मिलों (Textile Mills) और उनके मजदूरों से जुड़ा है। सबसे पहली झांकी 1923-24 के दौर में सेठ हुकुमचंद मिल के मजदूरों द्वारा बैलगाड़ियों पर निकाली गई थी। इसके बाद मालवा मिल, कल्याण मिल, स्वदेशी मिल, राजकुमार मिल और होप टेक्सटाइल जैसी मिलें भी इससे जुड़ती गईं।
2. मिलें बंद हुईं, लेकिन परंपरा अमर रही:
भले ही समय के साथ इंदौर की कपड़ा मिलें बंद हो गईं, लेकिन मिल मजदूरों का हुनर और यह परंपरा कभी बंद नहीं हुई। आज भी इन मिलों के नाम और उनकी समितियों द्वारा ही झांकियों का निर्माण पूरी निष्ठा से किया जाता है।
3. बैलगाड़ी और लालटेन से AI व 3D तक का सफर:
शुरुआती दौर में झांकियां बैलगाड़ियों पर निकलती थीं और रोशनी के लिए गैस बत्तियों या लालटेन का इस्तेमाल होता था। आज यह परंपरा 80-80 फीट की बड़ी ट्रॉलियों, चलित मैकेनिकल पुतलों, सेंसर तकनीक, 3D इफेक्ट्स और लाखों LED लाइटों से सुसज्जित होकर निकलती है।
4. रात भर चलता है 'लाइट एंड साउंड का कारवां':
अनंत चतुर्दशी की शाम लगभग 6 बजे से शुरू होकर यह चल समारोह अगली सुबह 4 से 5 बजे तक चलता है। पूरी रात इंदौर की सड़कें बहुरंगी रोशनी से जगमगाती हैं।
5. पारंपरिक अखाड़े और हैरतअंगेज़ करतब:
झांकियों के साथ इंदौर की प्रसिद्ध व्यायामशालाओं और अखाड़ों का काफिला चलता है। युवा और बच्चे सड़क पर तलवारबाज़ी, बनेठी, पटा और लाठी जैसी पारंपरिक भारतीय शस्त्रकलाओं का हैरतअंगेज प्रदर्शन करते हैं।
6. धार्मिक कथाओं से सामाजिक संदेशों तक:
इन झांकियों में केवल शिव-पार्वती विवाह, कृष्ण लीला या रामायण के प्रसंग ही नहीं दर्शाए जाते, बल्कि देश की सेना, अंतरिक्ष मिशन (जैसे चंद्रयान), नशामुक्ति और समसामयिक विषयों पर आधारित रचनात्मक झांकियां भी तैयार की जाती हैं।
7. सर्वश्रेष्ठ झांकियों का मुकाबला:
हर साल नगर निगम और जिला प्रशासन द्वारा श्रेष्ठ झांकियों और अखाड़ों को पुरस्कृत किया जाता है। इसके लिए महीनों पहले से कलाकार और कारीगर कड़ी मेहनत कर झांकियों को अंतिम रूप देते हैं।
झांकी चल समारोह का पारंपरिक मार्ग
झांकियां शहर के प्रमुख क्षेत्रों (जैसे मालवा मिल, डीआरपी लाइन) से एकत्र होकर जेल रोड, एमजी रोड, कृष्णपुरा छतरियां, नंदलालपुरा, नृसिंह बाजार, खजूरी बाजार और ऐतिहासिक राजवाड़ा से होते हुए गुज़रती हैं। राजवाड़ा पर होलकरकालीन महल की पृष्ठभूमि में झांकियों का दृश्य सबसे अद्भुत होता है।
झांकियों के पुरस्कार और नियम
प्रशासन और निर्णायक समिति द्वारा अनंत चतुर्दशी चल समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली कपड़ा मिलों की झांकियों को पुरस्कृत किया जाता है।

