गुजरात विधानसभा में ‘पशुधन आहार-चण विधेयक’ पारित, जमीन म्यूटेशन नियम भी आसान
गुजरात विधानसभा में मिलावट रोकने के लिए पशुधन आहार-चण विधेयक पारित कर दिया गया है। इसके साथ ही सरकार ने किसानों को राहत देते हुए जमीन म्यूटेशन प्रक्रिया को और अधिक सरल बना दिया है। ALSO READ: गुजरात विधानसभा में अत्याधुनिक पोर्टेबल अस्पताल 'BHISHM Cube-R300' की प्रदर्शनी, महज 12 मिनट में होता है तैयार
गुजरात विधानसभा में पशुधन आहार-चण विधेयक पारित
गुजरात विधानसभा के सत्र में पशुपालन क्षेत्र को प्रोत्साहन देने और आहार की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए पशुधन आहार-चण विधेयक साढ़े तीन घंटे की संवेदनशील चर्चा के बाद पारित किया गया है। WHO की विचारधारा पर आधारित इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य पशुओं और मुर्गियों के भोजन में होने वाली मिलावट को रोकना है। इस कानून के तहत अब से पशु आहार और मुर्गी के दाने के व्यवसाय के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य बना दिया गया है।
गुणवत्ता जांच, जुर्माना और सजा के कड़े प्रावधान
नए कानून के अनुसार बाजार में बिकने वाले पशु आहार की समय-समय पर चेकिंग की जाएगी और भ्रामक ब्रांडिंग या गुमराह करने वाले विज्ञापनों के खिलाफ लेबलिंग के नियम लागू होंगे। यदि कोई व्यापारी भ्रामक जानकारी देगा, तो उसे 3 लाख रुपए तक का जुर्माना और 1 वर्ष के लिए लाइसेंस निलंबित किया जा सकता है। इसके अलावा, मिलावटी या हानिकारक आहार के कारण पशु की मृत्यु होने पर 10 लाख रुपए तक का जुर्माना और लाइसेंस रद्द करने का कड़ा प्रावधान रखा गया है। ALSO READ: ड्रग्स के खिलाफ गुजरात पुलिस का ऐतिहासिक फैसला: अब हर जिले में काम करेगी 'एंटी नारकोटिक्स विंग'
किसानों को कानून से छूट और सर्वसम्मति से समर्थन
इस कानून में अपने पशुओं के लिए घर पर ही आहार (दाना) तैयार करने वाले किसानों को लाइसेंस प्रक्रिया से पूरी तरह बाहर रखा गया है। सदन में यह बिल पेश करते समय गुजरात को श्वेत क्रांति की राजधानी बताकर बनास डेरी द्वारा की जा रही अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारियों का उल्लेख किया गया था। इस बिल को सत्ताधारी पक्ष के अलावा विपक्षी कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की तरफ से भी पूरा समर्थन मिला।
AMC द्वारा श्रीजी इंफ्रास्ट्रक्चर पर कड़ा एक्शन
अहमदाबाद म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (AMC) द्वारा नोटिस देने के बावजूद उचित जवाब न देने वाली ठेकेदार कंपनी श्रीजी इंफ्रास्ट्रक्चर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। दो-दो बार नोटिस देने के बाद भी कंपनी के मौन रहने और काम में लापरवाही बरतने के कारण उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है।
जमीन म्यूटेशन प्रक्रिया सरल होगी
राज्य सरकार ने जमीन के म्यूटेशन (नाम ट्रांसफर) के नियमों में सुधार करके किसानों और जमीन मालिकों को बड़ी राहत दी है। नई व्यवस्था के अनुसार यदि 7/12 के उत्तारा (अभिलेख) और हकपत्रक में लगातार एक वर्ष से एक ही व्यक्ति का नाम दर्ज हो और उसके बाद बिक्री दस्तावेज (सेल डीड) होता है, तो जरूरी प्रक्रिया पूरी होते ही उसी दिन म्यूटेशन एंट्री मंजूर कर दी जाएगी।
विवादित मामलों का 7 दिनों में निपटारा और 135-B नोटिस से मुक्ति
पहले विवादित मामलों में म्यूटेशन मंजूर करने के लिए 30 दिनों का समय लगता था, जिसकी जगह अब केवल 7 दिनों की समय सीमा तय की गई है। इसके अलावा SSRD, GRT, हाईकोर्ट या अन्य सक्षम प्राधिकारी का आदेश होने की स्थिति में 135-B का नोटिस देने की आवश्यकता नहीं होगी और आदेश की मूल प्रति प्रस्तुत करते ही म्यूटेशन एंट्री मंजूर हो जाएगी।
किसानों की परेशानी और भ्रष्टाचार पर अंकुश
म्यूटेशन की 30 दिनों की अवधि का गलत फायदा उठाकर किसानों से पैसे ऐंठने और बेवजह परेशान करने की शिकायतों पर इस फैसले से सीधा अंकुश लगेगा। इस कानूनी सुधार से किसानों को कलेक्टर कार्यालय या अदालत के चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी और सरकारी तंत्र पर कार्यभार भी काफी कम होगा।

