बॉलीवुड के 'मिस्टर परफेक्शनिस्ट' आमिर खान अपनी फिल्मों और स्क्रिप्ट के चयन को लेकर बेहद संजीदा माने जाते हैं। दंगल, पीके और 3 इडियट्स जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में देने वाले आमिर खान के करियर में कुछ ऐसी फिल्में भी रहीं, जिन्होंने बॉक्स ऑफिस पर पानी तक नहीं मांगा। इन्हीं में से एक थी साल 2018 में आई मेगा-बजट पीरियड एक्शन ड्रामा फिल्म 'ठग्स ऑफ हिंदोस्तान'।
अमिताभ बच्चन, कैटरीना कैफ और फातिमा सना शेख जैसे बड़े सितारों से सजी 'ठग्स ऑफ हिंदोस्तान' बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह पिट गई थी। अब सालों बाद आमिर खान ने खुद इस फिल्म की असफलता के पीछे के असली कारणों से पर्दा उठाया है।हाल ही में व्हिसलिंग वुड्स इंटरनेशनल में आयोजित 'स्क्रीन एकेडमी मास्टरक्लास' के दौरान आमिर खान ने सिनेमा, अभिनय और अपने करियर के उतार-चढ़ाव पर चर्चा की।
इसी बातचीत के दौरान जब 'ठग्स ऑफ हिंदोस्तान' का जिक्र आया, तो आमिर ने बेहद ईमानदारी से अपनी गलती स्वीकार की। उन्होंने कहा कि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह बाउंस हुई थी और यह उनके पूरे करियर की इकलौती ऐसी फिल्म थी, जहां उन्होंने अपनी ही बनाई एक बुनियादी शर्त को तोड़ दिया था।
आमिर खान ने अपने फिल्म चयन के नियम का खुलासा करते हुए कहा, आमतौर पर मैं किसी भी फिल्म को उसके मुख्य किरदार के आधार पर नहीं बल्कि उसकी पूरी कहानी को देखकर चुनता हूं। मेरे लिए यह मायने नहीं रखता कि मेरा किरदार कितना बड़ा है, बल्कि कहानी दमदार होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, उदाहरण के लिए, जब मैंने 'दंगल' साइन की थी, तो इसलिए नहीं की थी कि महावीर फोगट का किरदार कितना कमाल का है, बल्कि इसलिए कि उसकी पूरी स्क्रिप्ट बेहतरीन थी। लेकिन 'ठग्स ऑफ हिंदोस्तान' मेरे करियर का एकमात्र अपवाद थी, जहां मैंने कहानी से ज्यादा अपने किरदार को तवज्जो दी।
आमिर ने बताया कि वह फिल्म में अपने धोखेबाज और अविश्वसनीय चरित्र 'फिरंगी' से बेहद आकर्षित थे। उन्होंने कहा, फिरंगी एक ऐसा किरदार था जिस पर कोई भरोसा नहीं कर सकता था। वह कब सच बोल रहा है और कब झूठ, यह समझना मुश्किल था। वह सिर्फ अपने बारे में सोचता था। मुझे उसका यह स्वार्थी और उलझा हुआ अंदाज बेहद दिलचस्प लगा और इसी वजह से मैं फिल्म का हिस्सा बनने के लिए तैयार हो गया।
'ठग्स ऑफ हिंदोस्तान' और 'शोले' का दिलचस्प कनेक्शन
मास्टरक्लास के दौरान आमिर खान ने फिल्म की बनावट की तुलना 1975 की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'शोले' से करके सबको चौंका दिया। आमिर ने समझाया, ठग्स ऑफ हिंदोस्तान की कहानी बहुत सामान्य थी। यह मूल रूप से शोले के फॉर्मेट पर ही आधारित थी। जैसे 'शोले' में संजीव कुमार का किरदार 'ठाकुर' अपने परिवार की हत्या का बदला लेना चाहता है और उनकी मदद के लिए जय और वीरू आते हैं। ठीक उसी तरह, 'ठग्स' में ज़ाफिरा (फातिमा सना शेख) का परिवार खत्म हो जाता है और वह बदला लेना चाहती है, जिसकी मदद के लिए फिरंगी (आमिर खान) आगे आता है।
आमिर ने आगे कहा, इस फॉर्मूले के हिसाब से देखा जाए तो जय और वीरू फिल्म के हीरो जरूर थे, लेकिन कहानी असल में ठाकुर की थी। उसी प्रकार, ठग्स ऑफ हिंदोस्तान फिरंगी की कहानी नहीं थी, वह तो ज़ाफिरा की कहानी थी। लेकिन प्रस्तुतीकरण में हम संतुलन खो बैठे।
फिल्म के फ्लॉप होने का एक और सबसे बड़ा कारण बताते हुए आमिर ने कहा कि जो फिल्म दर्शकों ने सिनेमाघरों में देखी, वह निर्देशक विजय कृष्ण आचार्य की मूल स्क्रिप्ट थी ही नहीं। आमिर ने कहा, कास्टिंग की समस्याओं के कारण हम लगातार स्क्रिप्ट में बदलाव करते रहे। हमसे यह सबसे बड़ी रचनात्मक भूल हुई। हमें मनमुताबिक कास्टिंग न मिलने पर भी मूल पटकथा से छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए थी। यही वजह रही कि फिल्म अपनी दिशा से भटक गई।