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दिलजीत दोसांझ की 'सतलुज' को ओटीटी से हटाने पर सिख संगठनों का विरोध, DSGMC करेगी गली-गली स्क्रीनिंग

Satluj movie controversy
पंजाबी एक्टर-सिंगर दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' (Satluj) को रिलीज के महज 48 घंटे के भीतर ही भारत में ओटीटी प्लेटफॉर्म Zee5 से अचानक हटा दिया गया। इस 'शैडो बैन' ने न सिर्फ दर्शकों को हैरान किया है, बल्कि सिख समुदाय और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।
 
अब इस मामले में दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) ने सीधे तौर पर मैदान संभाल लिया है। DSGMC ने सरकार और प्लेटफॉर्म के इस कदम को सच दबाने की साजिश बताते हुए फिल्म की पब्लिक स्क्रीनिंग और एजुकेशनल सेमिनार करने का बड़ा ऐलान किया है। 
गली-गली होगी स्क्रीनिंग, कॉलेजों में लगेंगे सेमिनार
फिल्म के हटते ही दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, जसवंत सिंह खालड़ा ने दुनिया के सामने पंजाब का जो सच रखा, उसे इस तरह दबाना पूरी तरह गलत है। यह सिख समुदाय की भावनाओं को आहत करने वाला है। अगर एक अकेला व्यक्ति इतना बड़ा बदलाव ला सकता है, तो हम सब मिलकर उनकी विरासत को मरने नहीं देंगे।
 
DSGMC ने तय किया है कि वे इस फिल्म को घर-घर और जन-जन तक पहुंचाएंगे। इसके लिए सभी गुरुद्वारा कमेटियों को फिल्म डाउनलोड कर अपने-अपने इलाकों में पब्लिक स्क्रीनिग करने का निर्देश दिया गया है। कमेटी के अंतर्गत आने वाले सभी स्कूलों और कॉलेजों के प्रिंसिपलों की बैठक बुलाकर कॉलेजों में एजुकेशनल सेमिनार आयोजित किए जाएंगे, ताकि युवा पीढ़ी जसवंत सिंह खालड़ा के संघर्ष को जान सके।
कौन थे जसवंत सिंह खालड़ा? 
फिल्म 'सतलुज', जिसका पहला नाम 'पंजाब 95' और उससे पहले 'घल्लूघारा' था, पंजाब के मशहूर मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और उनकी शहादत पर आधारित है। 1980 और 1990 के दशक में जब पंजाब उग्रवाद और आतंकवाद विरोधी अभियानों के दौर से गुजर रहा था, तब बैंक अधिकारी से एक्टिविस्ट बने खालड़ा ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया था। 
 
उन्होंने अमृतसर और आसपास के नगर निगमों के श्मशान घाटों के रिकॉर्ड खंगालकर यह साबित किया कि पुलिस ने लगभग 25,000 अज्ञात शवों का गैर-कानूनी तरीके से अंतिम संस्कार कर दिया था। उन्होंने इस सच्चाई को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाया। इसके बाद सितंबर 1995 में उनका अपहरण कर लिया गया और उनकी हत्या कर दी गई। 
 
सेंसर बोर्ड से जंग, फिर OTT का 'साइलेंट ब्लास्ट'
फिल्म के निर्देशक हनी त्रेहन पिछले चार साल से इस फिल्म को रिलीज कराने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे। सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन यानी सेंसर बोर्ड ने फिल्म के नाम और दृश्यों पर आपत्ति जताते हुए 120 से अधिक कट्स की मांग की थी।
 
मेकर्स ने इस सेंसरशिप से बचने के लिए एक बड़ा दांव खेला। चूंकि ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म सीधे तौर पर सेंसर बोर्ड के क्षेत्राधिकार में नहीं आते, इसलिए उन्होंने फिल्म का नाम बदलकर 'सतलुज' किया और बिना किसी प्रमोशन के इसे अचानक Zee5 पर रिलीज कर दिया। दिलजीत दोसांझ ने खुद इंस्टाग्राम लाइव पर कहा था कि उन्हें अंदाजा था कि दफ्तर खुलते ही इस पर बैन लग जाएगा, इसलिए इसे बिना शोर-शराबे के रिलीज किया गया ताकि लोग कम से कम सच देख सकें।
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