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  4. there will be a rare conjunction of events on makar sankranti after 23 years
Written By WD Feature Desk
Last Updated : गुरुवार, 8 जनवरी 2026 (17:24 IST)

मकर संक्रांति पर 23 साल बाद दुर्लभ संयोग, भूत जाति बाघ पर सवार है, जून तक रहना होगा संभलकर

मकर संक्रांति पर दुर्लभ ग्रह संयोग और तिल-गुड़
makar sankranti 2026: 23 साल बाद मकर संक्रांति पर एकादशी के संयोग के साथ ही अन्य कई दुर्लभ योग संयोग बन रहे हैं। ज्योतिषीय गणनाओं और ग्रहों की वर्तमान स्थिति के आधार पर वर्ष 2026 का पूर्वार्ध वैश्विक उथल-पुथल और बड़े परिवर्तनों का संकेत दे रहा है। मकर संक्रांति का पर्व भारतीय संस्कृति में केवल ऋतु परिवर्तन का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह ब्रह्मांडीय ऊर्जा के स्थानांतरण का समय भी है। इस वर्ष, मकर संक्रांति के समय बनने वाले ज्योतिषीय संयोग दुनिया के समृद्ध देशों और उच्च वर्गों के लिए एक चेतावनी की तरह उभर रहे हैं।
 

1. संक्रांति का स्वरूप: संपन्नता पर संकट

मकर संक्रांति का वाहन: इस वर्ष मकर संक्रांति 'भूत' जाति की है, जिनका वाहन 'बाघ' और उप-वाहन 'घोड़ा' है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब संक्रांति का वाहन और स्वरूप इतना आक्रामक होता है, तो इसका सीधा प्रभाव समाज के ऊपरी ढांचे पर पड़ता है। 
 
प्रभाव: इसका अर्थ है कि जो जातियां स्वयं को उच्च मानती हैं या वे देश जो आर्थिक और सैन्य रूप से समृद्ध हैं, उनके लिए यह समय 'भारी समस्या' लेकर आने वाला है। सत्ता परिवर्तन, आर्थिक मंदी या आंतरिक विद्रोह जैसी स्थितियां उन्हें झकझोर सकती हैं। यह धन-धान्य, सुख-शांति के साथ-साथ समाज में कुछ उथल-पुथल का भी संकेत देता है।
 
2. सूर्य का गोचर और उत्तरायण का आध्यात्मिक महत्व
मकर संक्रांति पर सूर्य देव अपने पुत्र शनि की राशि (मकर) में प्रवेश करते हैं। यहाँ से उत्तरायण का प्रारंभ होता है।
 
देवलोक का द्वार: उत्तरायण में सूर्य देव को 'देवलोक' की ओर गमन करने वाला माना जाता है। उत्तर दिशा कुबेर और देवताओं की दिशा है। यद्यपि यह समय आध्यात्मिक रूप से शुभ है, लेकिन भौतिक धरातल पर ग्रहों का संघर्ष तनाव पैदा कर रहा है।
 
3. देवगुरु बृहस्पति और शनि की चुनौतीपूर्ण स्थिति
वर्तमान में ग्रहों के दो सबसे बड़े कारक गुरु और शनि असहज स्थितियों में हैं:
अतिचारी गुरु: देवगुरु बृहस्पति वर्तमान में 'अतिचारी' (अत्यधिक तीव्र गति) हैं। वे जून 2026 में अपनी उच्च राशि 'कर्क' में प्रवेश करेंगे, लेकिन वर्तमान स्थिति के कारण वे अपना पूर्ण शुभ प्रभाव देने में असमर्थ हैं।
 
शनि का प्रभाव: शनि देव वर्तमान में मीन राशि (गुरु की राशि) में गोचर कर रहे हैं, जो धर्म और न्याय के मामलों में कठोर अनुशासन और उथल-पुथल पैदा करते हैं। इसका अर्थ है कि इस वर्ष सभी के कर्मों का हिसाब किताब होगा।
 
4. राहु-केतु और धार्मिक कट्टरता
राहु का कुंभ राशि में और केतु का सिंह राशि में होना विश्व शांति के लिए शुभ संकेत नहीं है।
वैश्विक हालात: यह युति दुनिया भर में धार्मिक कट्टरता (Radicalism) और ध्रुवीकरण (Polarization) को बढ़ावा देगी।
मुस्लिम अलायंस: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुस्लिम देशों के बीच नए समीकरण और गठबंधन (Alliance) बन सकते हैं, जिससे भू-राजनीतिक तनाव बढ़ेगा।
 
5. जून 2026 तक का कठिन समय
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, जून 2026 तक का समय अत्यंत संवेदनशील है। * जून में गुरु कर्क राशि (उच्च राशि) में जाएंगे, जिससे कुछ राहत की उम्मीद की जा सकती है।
 
किंतु, यह राहत अल्पकालिक होगी क्योंकि अक्टूबर के अंत में गुरु सिंह राशि में प्रवेश कर जाएंगे। सिंह राशि में गुरु का फल श्रेष्ठ नहीं माना जाता, जिसके कारण ईश्वर की जिस 'कृपा' या 'दिव्य सुरक्षा' की उम्मीद मानवता करती है, उसमें कमी आ सकती है।
 
कुल मिलाकर, 2026 का वर्ष वैचारिक युद्ध, सत्ता के संघर्ष और धार्मिक टकराव का वर्ष प्रतीत होता है। समृद्ध देशों को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करना होगा, क्योंकि 'बाघ' और 'घोड़े' पर सवार संक्रांति की गति तीव्र और विनाशकारी हो सकती है। जून 2026 तक संयम और शांति ही बचाव का एकमात्र रास्ता है।