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Written By WD Feature Desk
Last Modified: सोमवार, 5 जनवरी 2026 (15:02 IST)

जनवरी में मकर संक्रांति के साथ पोंगल, लोहड़ी, भोगी पंडिगाई, मकरविलक्कु और माघ बिहु का महत्व

Makar Sankranti 2026
भारत एक ऐसा देश है जहाँ संस्कृति की जड़ें बहुत गहरी हैं, और जनवरी का महीना इस विविधता का सबसे सुंदर उदाहरण पेश करता है। जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, तो पूरे देश में 'फसल उत्सव' की धूम मच जाती है। भले ही नाम अलग हों, लेकिन खुशी और आभार का भाव एक ही है। यहाँ जनवरी के इन प्रमुख त्योहारों का महत्व और उनकी विशेषताएँ दी गई हैं।
 
1. मकर संक्रांति: सूर्य की उपासना (पूरे भारत में):
मकर संक्रांति उस दिन को चिह्नित करती है जब सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर बढ़ता है। आध्यात्मिक रूप से इसे अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का प्रतीक माना जाता है।
महत्व: इस दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं। दान-पुण्य का इस दिन विशेष फल मिलता है।
विशेषता: तिल-गुड़ के लड्डू और पतंगबाजी इस उत्सव की पहचान हैं।
 
2. लोहड़ी: अग्नि और नई ऊर्जा (पंजाब और हरियाणा):
मकर संक्रांति से ठीक एक दिन पहले पंजाब और हरियाणा में लोहड़ी मनाई जाती है। यह सर्दियों की विदाई और रबी की फसल की कटाई का उत्सव है।
महत्व: यह त्योहार नवविवाहित जोड़ों और नवजात शिशुओं के लिए विशेष सौभाग्य लेकर आता है।
विशेषता: रात के समय पवित्र अग्नि (Bonfire) जलाई जाती है, जिसमें तिल, रेवड़ी, मूंगफली और मक्का अर्पित किया जाता है। भांगड़ा और गिद्धा की थाप इस उत्सव में जान फूंक देती है।
 
3. पोंगल: प्रकृति के प्रति कृतज्ञता (तमिलनाडु):
दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु में यह चार दिनों का महा-उत्सव होता है। यह मुख्य रूप से किसानों का त्योहार है।
महत्व: पोंगल का अर्थ है "उबालना"। इसमें मिट्टी के बर्तन में नए चावल और गुड़ का प्रसाद बनाया जाता है। जब बर्तन से दूध उफनकर बाहर गिरता है, तो इसे समृद्धि का सूचक माना जाता है।
विशेषता: इसमें सूर्य देव, इंद्र देव और मवेशियों (विशेषकर बैलों) की पूजा की जाती है।
 
4. भोगी पंडिगाई: पुराने का त्याग, नए युग की शुरुआत (आंध्र प्रदेश और तेलंगाना)
पोंगल के पहले दिन को 'भोगी' के रूप में मनाया जाता है। यह दिन घर की सफाई, नए युग की शुरुआत और नई शुरुआत के लिए समर्पित है।
महत्व: इस दिन लोग अपने घरों से पुरानी और अनुपयोगी वस्तुओं को निकालकर अग्नि में जलाते हैं। यह प्रतीकात्मक रूप से अपने भीतर की बुरी आदतों और नकारात्मक विचारों को त्यागने का दिन है।
विशेषता: घरों के बाहर सुंदर रंगोलियां (कोलम) बनाई जाती हैं।
 
5. माघ बिहु (भोगली बिहु): सामुदायिक भोज का उत्सव (असम):
असम में फसल कटाई के अंत को 'माघ बिहु' के रूप में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।
महत्व: 'भोगली' शब्द 'भोग' (भोजन) से आया है, इसलिए यह त्योहार सामुदायिक भोज और खुशियों का प्रतीक है।
विशेषता: लोग बांस और पुआल से 'भेलाघर' और 'मेजी' (अग्नि की संरचना) बनाते हैं। मेजी को जलाकर अग्नि देव से आशीर्वाद मांगा जाता है। इसमें पारंपरिक असमिया व्यंजन जैसे पीठा और लारू बनाए जाते हैं।
 
6. मकरविलक्कु: श्रद्धा और दिव्य ज्योति (केरल):
केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में मकर संक्रांति के दिन मनाया जाने वाला यह एक भव्य धार्मिक उत्सव है।
महत्व: इस दिन भगवान अयप्पा के भक्त एक विशेष दिव्य ज्योति (मकर ज्योति) के दर्शन करते हैं, जो पहाड़ी पर दिखाई देती है। इसे बहुत शुभ माना जाता है।
विशेषता: भगवान अयप्पा के गहनों (तिरुवाभरणम) की शोभायात्रा और लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति इसे अद्वितीय बनाती है।
 
चाहे वह सबरीमाला में जलने वाली मकरविलक्कु की दिव्य ज्योति हो, असम की मेजी हो या पंजाब की लोहड़ी, ये सभी त्योहार हमें अपनी मिट्टी, अपनी फसलों और अपने ईश्वर के प्रति कृतज्ञता प्रकट करना सिखाते हैं। जनवरी के ये उत्सव भारत की सांस्कृतिक एकता की एक सुंदर माला पिरोते हैं। जनवरी के ये त्योहार हमें सिखाते हैं कि हम अपनी प्रकृति, भूमि और श्रम के प्रति हमेशा आभारी रहें। उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक, ये उत्सव न केवल हमारी सांस्कृतिक एकता को दर्शाते हैं, बल्कि हमें आपसी भाईचारे और उल्लास के साथ जीवन जीने की प्रेरणा भी देते हैं।
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