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Last Modified: शनिवार, 9 मई 2026 (13:30 IST)

10 मई से शुरू हो रहा है खास पंचम, जानिए इसका नाम और कौनसे काम हैं वर्जित

rog panchak
प्रत्येक माह 5 दिनों का पंचक रहता है। 10 मई 2026, रविवार से 'पंचक' प्रारंभ हो रहा है। ज्योतिष शास्त्र में पंचक के समय को कुछ विशेष कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है। चलिए जानते हैं कि इस पंचम का नाम क्या है और इस पंचम में कौनसे कार्य करना है वर्जित । यहाँ 10 मई से शुरू होने वाले पंचक की विस्तृत जानकारी दी गई है।
 

1. पंचक के नाम:

रविवार का रोग पंचक, मंगलवार का अग्नि पंचक, शुक्रवार का चोर पंचक, शनिवार को पड़ने वाले पंचक को मृत्यु पंचक कहते हैं। बुधवार और गुरुवार को सोमवार और मंगलवार का पंचक माना जाता है। इसके अलावा धनिष्ठा नक्षत्र में अग्नि का भय रहता है। शतभिषा नक्षत्र में कलह होने की संभावना रहती है। पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रोग बढ़ने की संभावना रहती है। उतरा भाद्रपद में धन के रूप में दंड होता है और रेवती नक्षत्र में धन हानि की संभावना रहती है।
 

2. पंचक का नाम: 'रोग पंचक'

चूंकि इस बार पंचक का आरंभ रविवार को हो रहा है, इसलिए इसे ज्योतिष शास्त्र में 'रोग पंचक' के नाम से जाना जाता है।
प्रभाव: माना जाता है कि इस दौरान शुरू किए गए कार्यों में शारीरिक और मानसिक कष्ट होने की संभावना रहती है। व्यक्ति को सेहत से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
 

3. पंचक का समय (मई 2026)

प्रारंभ: 10 मई 2026, रविवार को दोपहर के समय से (नक्षत्रों की गणना के अनुसार)।
समाप्त: यह पंचक 15 मई 2026 तक रहेगा।
 

4. पंचक में वर्जित काम (जो भूलकर भी न करें)

शास्त्रों के अनुसार पंचक के दौरान इन 5 कार्यों को करने की मनाही होती है, क्योंकि माना जाता है कि यदि इनमें से कोई एक काम किया जाए, तो उसकी 5 बार पुनरावृत्ति (दोहराव) होती है:
 
घास या लकड़ी एकत्र करना: इस दौरान ईंधन के लिए लकड़ी इकट्ठा करना, घास काटना या घर में लकड़ी का काम (जैसे चौखट बनवाना) अशुभ माना जाता है।
दक्षिण दिशा की यात्रा: दक्षिण को यम की दिशा माना गया है। पंचक के दौरान इस दिशा में यात्रा करना वर्जित है।
घर की छत डलवाना: पंचक के दौरान घर का लेंटर डालना या छत बनवाना धन हानि और क्लेश का कारण बन सकता है।
चारपाई या बेड बनवाना: इस समय नया पलंग, चारपाई या बेड खरीदना या बनवाना वर्जित है।
शव दाह (अंतिम संस्कार): यदि पंचक के दौरान किसी की मृत्यु हो जाए, तो शव दाह करते समय विशेष विधान (कुश के पांच पुतले साथ जलाना) किया जाता है ताकि पंचक दोष शांत हो सके।
 

5. सावधानी और उपाय

चूंकि यह रोग पंचक है, इसलिए इस दौरान अपनी और परिवार की सेहत का विशेष ध्यान रखें। किसी भी नए निवेश या मांगलिक कार्य को शुरू करने से पहले विद्वान ज्योतिषी की सलाह लेना उचित रहता है।
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वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम
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