वर्ष 2009: सूचना तकनीक में भारत
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NDबाजार विनिमय दर के अनुसार भारत दुनिया की 12वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और क्रय शक्ति समता के अनुसार यह दुनिया की चौथी बड़ी अर्थ व्यवस्था है। भारत में हर साल 4 लाख इंजीनियर बनते है जिनमें से 1 लाख सूचना तकनीक क्षेत्र से हैं।
बेंगलुरु से घबराया अमेरिका
2008 में अमरीका के राष्ट्रपति चुने गए बराक ओबामा ने ऐसे समय में अमेरिका की बागडोर संभाली जबकि वो घोर मंदी से जूझ रहा था। तब उन्होंने अपने देश के आईटी महारथियों को खुले शब्दों में एक मंच से ये चेतावनी दी थी कि 'आप लोग चेत जाइए नहीं तो बेंगलुरु आपसे आगे निकल जाएगा।' दरअसल भारत की सॉफ्टवेयर बनने करने वाली कंपनियां बड़ी तेज रफ्तार से दुनिया के आईटी मार्केट में सिलिकॉन वैली के वर्चस्व को चुनौती दे रही हैं। इस प्रतिस्पर्द्धा में भारत की सिलिकॉन वैली यानी बेंगलुरु की सॉफ्टवेयर कंपनियों का योगदान सबसे ज्यादा है।
इस वर्ष में यहाँ की आईटी और बीपीओ कंपनियों के बदौलत न सिर्फ कर्नाटक में 300 मिलियन डॉलर का निवेश हुआ बल्कि सिलिकॉन वैली के ग्राहक (अमेरिकन एक्सप्रेस, स्विसआर, ब्रिटिश एयरवेज और ब्रिटिश टेलिकॉम) भी बेंगलुरु की ओर चले आए। नैसकॉम के सर्वे के अनुसार यहाँ की कंपनियाँ ई-बिजनेस सॉल्यूशन से 18 बिलियन डॉलर का कारोबार करेगी।
बेंडा-काल-वरु से बेंगलुरु बने इस शहर के सॉफ्टवेयर पार्क ऑफ इंडिया से संबंद्ध 1200 कंपनियाँ काम कर रही हैं, जो भारत की सॉफ्टवेयर
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NDइस शहर का क्रेज कहें या जरूरत, याहू को भी अपना बिजनेस ऑफिस यहाँ खोलना पड़ा। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि जबतक सिलिकॉन वैली हाइटेक समस्या की पहचान करता है, तब तक बेंगलुरु के सॉफ्ट इंजीनियर समस्या का समाधान ढूँढ लेते हैं। जैसे वाईटूके का रिजल्ट।
मंदी के इस साल में सिलिकॉन वैली में बेरोजगारी दर 7.6 से बढ़कर 9.4 हो गई मगर उस दौरान भी यहाँ पेशेवर इंजीनियरों की डिमांड बनी रही और आईटी एक्सपोर्ट ग्रोथ रेट 23 फीसदी रहा। हालात ऐसे हैं तो अमेरिकी प्रेजिडंट ओबामा भला चिंतित क्यों न होंगे।
आउटसोर्सिंग में बढ़ते कदम
2009 में, भारत की 7 कंपनियों ने विश्व की 15 शीर्ष तकनीकी आउटसोर्सिंग कंपनियों में जगह बनाई। मार्च 2009 में आउटसोर्सिंग ऑपरेशंस से होने वाली आय 60 अरब डॉलर थी और 2020 तक इसके 225 अरब डॉलर होने की संभावना है।
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