अयोध्या राम मंदिर के प्रसाद को मिला FSSAI का 'ईट Right' सम्मान
स्वच्छता और शुद्धता के 47 कड़े मानकों पर खरा उतरा रामलला का भोग, मिला 'अतिविशिष्ट' दर्जा
अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में रामलला को अर्पित किए जाने वाले भोग-प्रसाद की शुद्धता और गुणवत्ता पर अब देश की सर्वोच्च खाद्य नियामक संस्था FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) की आधिकारिक मुहर लग गई है। मंदिर को 'ईट राइट प्लेस ऑफ वर्शिप-भोग' (Eat Right Place of Worship) का प्रतिष्ठित प्रमाण पत्र प्राप्त हुआ है।
खाद्य सुरक्षा, साफ-सफाई और निर्माण से लेकर वितरण तक के 47 कड़े मानकों पर हुए मूल्यांकन में मंदिर ने 114 में से 103 अंक हासिल किए हैं, जिसके साथ इसे सर्वोच्च 'अतिविशिष्ट' (Exemplary) श्रेणी में शामिल किया गया है।
मुख्य बातें
- प्राप्त सम्मान : FSSAI द्वारा ईट Right Place of Worship प्रमाण पत्र
- प्राप्त अंक : 114 में से 103 (अतिविशिष्ट श्रेणी)
- प्रमाण पत्र प्रदान किया : FSSAI के CEO राजित पुन्हानी द्वारा विशेष समारोह में
- वैधता (Validity) : आगामी दो वर्षों तक
- समीक्षा प्रक्रिया : मंदिर ट्रस्ट की आंतरिक टीम द्वारा हर 15 दिन में जाँच
समारोह और अधिकारियों के विचार
हाल ही में आयोजित एक विशेष प्रमाणपत्र वितरण समारोह में FSSAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजित पुन्हानी अपनी टीम के साथ अयोध्या पहुंचे। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि भगवान को लगने वाला भोग सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि हमारी गहरी आस्था और गरिमा का प्रतीक है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं तक सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता वाला प्रसाद पहुंचाना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।
FSSAI की प्रबंधक अनन्या पांडेय ने जानकारी दी कि यह मूल्यांकन मंदिर की रसोई, खाद्य सामग्री के भंडारण, साफ-सफाई और प्रसाद तैयार करने की पूरी व्यवस्था की बारीकी से जांच के बाद किया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव पी. गोविंद देव गिरि ने कहा कि स्वच्छता का सीधा संबंध ईश्वरत्व से है। निर्माण से लेकर वितरण तक हर स्तर पर पवित्रता सुनिश्चित करना ट्रस्ट की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
कैसे तय होती है प्रमाणन की प्रक्रिया?
- कड़े मानक : वैध लाइसेंस, अधिकृत ऑडिटर द्वारा निरीक्षण और खाद्य सुरक्षा प्रशिक्षण जैसे कई चरणों से गुजरना होता है।
- अतिविशिष्ट श्रेणी : 100 से 114 के बीच अंक पाने वाले चुनिंदा और बेहतरीन पूजा स्थलों को ही इस श्रेणी में जगह मिलती है।
- निरंतर निगरानी : यह सर्टिफिकेट दो साल तक वैध रहेगा। इस दौरान FSSAI नियमित ऑडिट करेगा, साथ ही मंदिर ट्रस्ट की आंतरिक टीम हर 15 दिन पर इसकी समीक्षा करेगी।
राम मंदिर के प्रसाद को मिला यह प्रमाण पत्र इस बात की गारंटी देता है कि रामलला का प्रसाद सर्वोच्च स्वच्छता, पवित्रता और उच्च गुणवत्ता के साथ तैयार हो रहा है।

